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भूत की कहानी- खून पीने वाला पिशाच

हम एक से बढ़कर एक डरावनी और खौफनाक कहानियां प्रकाशित करते हैं।पेश है इसी कड़ी में “खून पीने वाला पिशाच” भूत की कहानी आशा है,ये आपको पसंद आएगी।

भूत की कहानी

रमेश और सुरेश अपनी गाड़ी से घर जा रहे थे।अजमेर से जयपुर जा रहे थे 2 घंटे का रास्ता था।रास्ते में उसे एक लड़की लिफ्ट मांगते हुए नजर आती है।रमेश उसे लिफ्ट देता है।वो लड़की भी जयपुर जा रही थी।लड़की का नाम निशा होता है।सुरेश पूछता है कि आप क्या करती है।वो बोलती है मैं कॉल सेंटर में जॉब करती थी।बातो का सिलसिला सफ़र के साथ चलता रहता है।तभी सुनसान रास्ते पर उनकी गाड़ी खराब हो जाती है। अनजान रास्ता जहा मदद की कोई उम्मीद नहीं थी।तभी लड़की बोलती है यहाँ नज़दीक ही उसके चाचा की हवेली है और वो वही रुकने की सोचते है।जंगल के रास्ते से होकर उस हवेली में पहुंचना था।झींगुर और कुतो की रोने की आवाज़ वातावरण को डरावना बना रही थी।वो हवेली पहुँच जाते है।वहा खाने पीने का इंतज़ाम बहुत बढ़िया था।खाने के बाद वो लोग सो जाते है।सुबह होने पर वो जैसे ही जागते है तो देखते है वो हवेली तो खंडहर है।वह सोचते हैं वह लड़की कहां पर है? वहां से एक आदमी गुजर रहा होता है उसको रोक कर पूछते हैं कि आखिर जगह कौन सी है।वो आदमी बोलता है कि आप लोग भी शिकार हो गए लगता है। सुरेश बोलता है क्या मतलब?वो आदमी बोलता है आज से 300 साल पहले इस हवेली पर खून पीने वाले पिसाच का राज था।इस गाँव में उसका आतंक था।एक दिन एक साधु उस गाँव में आये थे।
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गाँव वाले उस साधू को अपने परेशानी बताते है।वो महल जाकर उस राक्षस को चुनौती देते हैं और उस राक्षस को अपने तंत्र मंत्र से हरा देते है और हवेली के आँगन में ज़िंदा दफना देते है।वो लड़की उसी पिशाच की बेटी है जो अपने पिता की मुक्ति के लिए कोशिश कर रही है।वो लोगो का खून पीकर उसे जमा करती है ताकि अपने पिता को मुक्त कर सके।उन दोनों की कब्र हवेली में है।इस हवेली को जलाकर ही उनकी आत्मा को मुक्त कर सकते है।रमेश अपने गले में काटे हुए निशान को देखता है। और अपनी गाडी से पेट्रोल निकालकर हवेली पर छिड़क देते हैं और फिर आग लगाकर हवेली को नष्ट कर देते हैं।इसके बाद दोनों अपने घर आ जाते हैं पर यह क्या वह उस पिशाच और उसके बेटी को अपने घर में पाते हैं।ये पिसाच तो वही था जिसने उन दोनों को कहानी सुनाई थी।वो दोनों बहुत डर जाते है।जैसे ही पिशाच उनकी तरफ हमला करते है,रमेश और सुरेश एक दम पीछे हट जाते है और बाहर भागने लगते है।भागते भागते वो एक मंदिर पहुँच जाते है जहा वो आत्मा नहीं आ सकती थी।वहा के पंडित उन आत्माओ को कैद कर लेते है।वो दोनों पूरी बात पंडित को बताते है।पंडित कहता है कि तुमने हवेली जला तो दी पर वो उनकी लाशे नहीं जल पाई थी।वो उनकी चाल थी ताकि नया ठिकाना बना सके,अब ये दोनों आत्माये कैद है,डरो मत। इस तरह उन्दोनो दोस्तों का उस खुनी पिशाच और उसकी बेटी से पिछा छूटता है।
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भूत की कहानी




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