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ghost stories in hindi- वो कौन थी

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हम एक से बढ़कर एक डरावनी और खौफनाक कहानियां प्रकाशित करते हैं। पेश है इसी कड़ी में वो कौन थी ghost stories in hindi. आशा है , ये आपको पसंद आएगी।




संजीव अपनी पढ़ाई पूरी कर लेने के बाद जॉब की तलाश में जुट गया।काफी मश्कत करने के बाद भी उसे मनलायक जॉब नहीं मिल पा रहा था,वो काफी परेशान था, तभी उसके एक दोस्त ने एक कॉलेज का एड्रेस दिया जो नया-नया खुला ही था,जहाँ उसके लायक काम था। कॉलेज शहर से कुछ दुरी पर बना हुआ था, कॉलेज के आस-पास कुछ नहीं था,दूर दूर तक वीराना था । शायद जमीन सस्ती मिली होगी, इसलिए कॉलेज के मालिक ने कॉलेज खोल दिया। नया होने की वजह से बहुत से लोग उस कॉलेज के बारे में जानते भी नहीं थे। कुछ ही स्टूडेंट्स ने एडमिशन भी लिया था। कॉलेज कैंपस के अंदर ही खाने-पिने और रहने की व्यवस्था थी । मतलब साफ़ था की जितना भी सैलरी मिलता सब बच जाती। एक बात जरूर थी कॉलेज कैंपस शुरू होने से पहले एक गुमटी थी,जहाँ चाय और सिगरेट के साथ साथ छोटी-छोटी सामान मिल जाती थी। संजीव ने पाया की अभी तक पूरी तरह से कॉलेज बनी भी नहीं थी। पहले तो वीराना देख कर उसका दिल हुआ की वहां से लौट जाये, लेकिन फिर सोचा कम ही सही सुरवात करने के लिए इतनी सैलरी सही है उसके लिए, इसलिए वो वहां काम करने के लिए तैयार हो गया। कॉलेज में स्टाफ भी बहुत कम ही थे। धीरे-धीरे संजीव की उन सबो से दोस्ती हो गयी। दिन तो काम करने में निकल जाता था,लेकिन रात को अकेलापन संजीव को बहुत ही खलता था, उसकी आदत थी देर से सोने की जबकि बाकि के स्टाफ जल्दी सो जाते थे,इसलिए वो अकेला ही कॉलेज के चाट पर जा कर घुमा करता था,और मोबाइल में ईयर फोन लगा कर गाना सुना करता था। एक रात गाना सुनते सुनते काफी लेट हो गया, और वो वापस अपने कमरे की तरफ लौट ही रहा था की दूर उसने किसी को जाते देखा, उसे समझ नहीं आ रहा था की इतनी रात को और वीराने में भला कौन जा रहा है,उसने सोचा कॉलेज का ही कोई स्टूडेंट होगा, लेकिन इतनी रात को कहाँ जा रहा है, उसे ताजुब हुआ, लेकिन वो चुप chap अपने कमरे में जा कर सो गया और सोचने लगा की भला इतनी रात को कौन बहार घूम रहा है,जबकि कॉलेज का गेट बंद हो जाता है,सोचते सोचते उसकी आँख लग गयी और वो सो गया।अगली रात उसने फिर दूर जाते एक शख्स को देखा,लेकिन गौर से देखने पर पाया की वो कोई लड़की है,अब तो उसे और भी ताजुब हुआ की भला इतनी रात को कौन सी लड़की इस वीराने में घूमती है । उसकी कुछ समझ में नहीं आ रहा था,उसने सोचा पास जा कर देखु, लेकिन कॉलेज के गेट में टाला लगा होने की वजह से वो जा नहीं पाया।अब तो संजीव के दिल में बेचैनी होने लगी की भला इतनी रात को कौन वीराने में रोज घूमता है।अगले दिन उसने वाचमैन से पूछा तो उसने बोला, उसे नहीं मालूम उसने किसी को जाते नहीं देखा। संजीव ने गेट की चाभी उससे मांग ली और सोचा रात को वो खुद पता करेगा।
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अगली रात चांदनी रात थी,सब कुछ साफ़ साफ़ दिख रहा था,संजीव ने साफ़ साफ़ देखा की कोई लड़की वीराने में घूम रही है।वो जल्दी से गेट खोला और उस लड़की की तरफ बढ़ गया,लेकिन जब तक उस लड़की के नजदीक पहुँचता,लड़की गायब हो चुकी थी,वो वापस कॉलेज लौट गया,ये सिलसिला कुछ रातें और चला लेकिन संजीव को उस लड़की का कुछ पता नहीं चल पाया। अब तो संजीव की बेचैनी बढ़ती चली गयी की आखिर ये लड़की कौन है जो पास जाते ही गायब हो जाती है और गायब हो कर जाती कहाँ है? संजीव अपनी दिल की उलझन किसी को बता नहीं पा रहा था,क्योंकि बताता भी तो क्या बताता की वो रात को किसी लड़की का पीछा करता है,लोग क्या सोचेंगे? ये सोच कर संजीव किसी को कुछ नहीं बता पा रहा था,लेकिन उसने मन में ठान लिया था की वो उस लड़की तक पहुंच कर रहेगा .संजीव ऐसा सोच कर रात को पहले ही उस जगह पहुँच गया,जहाँ वो लड़की को देखा करता था,लेकिन काफी रात हो जाने के बाद भी लड़की नजर नहीं आयी,संजीव ने सोचा शायद लड़की ने उसे पहले ही देख लिया होगा,इसलिए वो नहीं आयी होगी । जब वो लौट कर कॉलेज के गेट पर पहुंचा तो पाया की लड़की वहीँ खड़ी है,अब तो संजीव को बहुत ही आस्चर्य हुआ की अभी तो कोई लड़की वहां नहीं था,अचानक से वहां लड़की कैसे आ गयी? वो दौड़ कर लड़की की तरफ भागा, लेकिन जब तक वहां पहुँचता,लड़की जा चुकी थी,संजीव बहुत थक चूका था, रात भी बहुत हो चुकी थी। अचानक उसके दिल ने कहा,क्या वो किसी साया या आत्मा का तो पीछा नहीं कर रहा है,लेकिन उसे विश्वास नहीं हो रहा था की आज के भी युग में आत्मा होती हैं।




वो सोचा अगली रात वो फिर जायेगा और पूछेगा की वो कोई इंसान है या आत्मा। अगली रात वो तय समय से कुछ पहले वहां पहुंच कर उस लड़की का इंतजार करने लगा,लेकिन कोई नहीं आया तो उसने कहा,वो जनता है की तुम यही हो मेरे आस-पास,तुम आत्मा हो ,और यहाँ रात को क्यों भटकती हो? इस पर उसके सामने वो आत्मा नजर आने लगी ,वो 23 -24 साल की होगी जो बहुत ही सुंदर थी,उसकी सुंदरता देख कर संजीव उसे देखता रह गया, कुछ देर तक देखने के बाद संजीव ने उससे पूछा, तुम क्यों भटक रही हो, तुम इंसान नहीं हो सकती ,तुम साया हो या फिर भूतनी हो, तुम जो भी बुरी नहीं हो,अच्छी हो । इस पर लड़की ने पूछा, मैं साया हूँ ये तुम कैसे कह सकते हो? और मैं अच्छी हूँ इसका तुम्हे कैसे विश्वास है? इस पर संजीव ने कहा, अचानक से आती हो और अचानक से गायब हो जाती हो,इस वीराने में अकेली घूमती हो,तुम्हे डर नहीं लगता,इसलिए तुम साया हो और तुम अच्छी हो क्योंकि मैं तुम्हारा पीछा काफी रातों से कर रहा हूँ,ये जानते हुए भी तुमने कभी मुझे कुछ नहीं किया,इसलिए तुम अच्छी हो।।इस पर लड़की ने कहा,तुम समझदार हो,फिर यहाँ क्यों मेरा पीछा करते हो? संजीव ने कहा, मुझे तुम्हारा असलियत जानना है,इसलिए मैं तुम्हारे पीछे पड़ा हुआ हूँ। लड़की ने कहा,हाँ मैं साया हूँ और तुम जहाँ खड़े हो, यहाँ बहुत सी लाशे दफन हैं, ये पूरा का पूरा कब्रिस्तान है, यहाँ तुम्हे साया ही मिलेंगी,जिन्दा इंसान नहीं । इस पर संजीव ने पूछा,क्या और भी साया यहाँ घूम रही हैं? लड़की ने कहा,हाँ और भी साया,तुम्हारे आस-पास घूम रही हैं। संजीव ने पूछा,फिर सिर्फ तुम क्यों दिख रही हो? और कोई क्यों नहीं दिख रही हैं। इस पर साया ने कहा, शायद तुम मेरी कोई मदद कर सको,इसलिए मैं तुम्हे दिख रही हूँ। संजीव ने पूछा कैसी मदद? साया ने बताया की, आज से 4 महीने पहले मैं इस कॉलेज में एडमिशन ली थी, और मेरा बलात्कार करके मुझे यहीं दफना दिया गया, तुम्हे उस बलात्कारी को सजा दिलवाना है। संजीव को सुन कर बहुत ही आस्चर्य हुआ की, भला कॉलेज में ऐसा कुछ हुआ और किसी को कुछ पता नहीं चला ऐसे कैसे हो सकता है? उसने पूछा तो लड़की ने कहा, वो एडमिशन लेने के लिए अकेली आयी थी और रात हो जाने की वजह से कॉलेज में ही रुक गयी थी, और उसी रात उसके साथ ऐसा हुआ,और उसके जब घर वाले आये तो उन्हें बताया गया की मैं यहाँ से एडमिशन ले कर लौट चुकी हूँ,उसके बाद से आज तक मेरा पता कोई नहीं लगा सका है। अब उसे इंसाफ संजीव को ही दिलाना है। संजीव ने कहा, उसके साथ ऐसा काम किसने किया, इस पर साया ने बताया की कॉलेज के मालिक के भतीजे ने, अब वो पास के ही शहर में रहता है। संजीव उसकी मदद करने का वादा करके वहां से चला गया और सोचने लगा की किस तरह उस साया की मदद की जाये। काफी सोचने के बाद संजीव ने एक प्लान बनाया और प्लान के मुताबिक उसने कॉलेज के मालिक के भतीजे को जेल तक पहुंचा दिया,लेकिन उस दिन के बाद से संजीव को उस साया से कभी मुलाकात नहीं हो पायी,वो काफी रातें कबिर्स्तान जा कर उस साया का इंतजार करता लेकिन वो साया उसे कभी नहीं दिखाई दी।
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