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haunted stories in hindi- कोई है

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हम एक से बढ़कर एक डरावनी और रोमांचक कहानियां प्रकाशित करते रहते हैं। इसी कड़ी में आज प्रस्तुत है haunted stories in hindi कहानी “कोई है”.आशा है ये आपको अच्छी लगेगी।
नीरज ने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई अपने शहर मथुरा से की । बारहवीं में उसने कॉमर्स ली, उसके आगे चल कर सीए बनना था,इसलिए उसने पूरी मेहनत के साथ अच्छे नंबर से बारहवीं की परीक्षा पास की,लेकिन आगे की पढ़ाई वो मथुरा में रह कर नहीं कर सकता था,इसलिए वो कोलकाता जा कर पढ़ने की सोची । हलाकि उसके मम्मी-पापा कोलकाता नहीं जाने देना चाहते थे,लेकिन पढ़ाई पूरी करने के लिए उन्होंने जाने दिया। नीरज के पापा मथुरा में ही एक कंपनी में अकाउंटेंट थे,उनकी सैलरी ठीक-ठाक थी,लेकिन वो नीरज को ज्यादा पैसा नहीं दे सकते थे,ये बात नीरज जानता था,इसलिए कुछ दिन अपने मामा के यहाँ रुकने के बाद वो किसी लॉज में जा कर रहने का सोचा,इसी क्रम में उसे सुंदरी लॉज का पता मिला,जो काफी सस्ता था और नीरज के बजट में आता था,लेकिन सुंदरी भवन पहुँचने के बाद उसे पता चला की वहां कोई कमरा खली नहीं है, चुकी वो कोलकाता में नया-नया आया था,इसलिए उसकी जान पहचान भी किसी के साथ नहीं थी ।वो उदास हो गया,लेकिन उसने हार नहीं मानी, तभी उसे पता चला की सुंदरी भवन में कमरा खाली है,हलाकि वो वहां पूछ चूका था,लेकिन दोबारा गया और सुंदरी भवन की मालकिन से एक कमरा देने की बात कही, मालकिन ही सब कुछ करती थी, उस भवन का मालिक मर गया था,इसलिए मालकिन को हो सारा देख -रेख करना पड़ता था।नीरज के दोबारा आने पर मालकिन ने बताया की एक कमरा खाली है जो सबसे ऊपर है,सुंदरी भवन चार मंजिले का मकान था, जिसमे कुल 40 कमरे थे।

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नीरज उस कमरे को बिना देखे, मालकिन को हामी भर दिया साथ ही साथ कमरे का रेंट भी दे दिया,क्योंकि कहीं कोई और ले लेता तो वो कहाँ जाता। ये सोच कर उसने कमरा ले लिया। शाम को जब भवन के कुछ लड़के आये तो कमरा का ताला खुला पाया,उस कमरे का नंबर 410 था,जो सबसे अंत में था,और उस कमरे से नीरज को बाहर आया देख सभी चकित हो गए,नीरज ने अपना नाम सभी को बताया और बोला की आज ही वो इस कमरे में शिफ्ट किया है । उसके बगल के कमरे में रहने वाला लड़का जिसका नाम पंकज था,उसने नीरज से पूछा,क्या बुढ़िया ने कुछ नहीं बताया। नीरज ने पूछा कौन बुढ़िया ? पंकज ने बोला इस भवन की मालकिन। नीरज ने कहा, क्यों क्या हुआ? पंकज ने कहा,ये कमरा हमेशा बंद रहता है,इस कमरे में तरह तरह की आवाजे आती हैं,ये भूतिया कमरा है। नीरज ने कहा,नहीं मालिकन ने कुछ नहीं बताया और उसे भूतो से डर नहीं लगता । रात को नीरज जल्दी सो गया,क्योंकि वो कमरा शिफ्ट करने में काफी थक गया था । इसलिए वो सो गया, और ऐसा सोया की उसकी नींद सुबह को खुली,पंकज ने पूछा की सब ठीक है तो नीरज ने हम में इशारा किया । धीरे-धीरे समय बीतता चला गया, एक रात अचानक नीरज को किसी चलने की आवज आयी,रात को 2 बज रहे थे,इतनी रात को भला कौन चल रहा है? उसे लगा की उसकी तरह ही कोई और भी सोया नहीं होगा, चलने की आवाज से उसे पढ़ने में समस्या हो रही थी। नीरज दिन में सोता था और रात को पढ़ाई करता था, जाव सभी सो जाते तो वो शांति में पढ़ता था। लेकिन इतनी रात को भला कौन चल रहा है,वो चुप चाप कमरा का दरवाजा खोला,बाहर घुप अँधेरा था, और कोई नहीं था, वो अँधेरा देख कर वापस आया और सो गया। अगली सुबह जब वो जगा तो उसने पंकज से पूछा,इतनी रात को बाहर क्या कर रहे थे? पंकज ने कहा वो तो सोया हुआ था, किसी ने कुछ नहीं बताया,उसे लगा कोई उसके साथ मजाक कर है। अगली रात फिर उसे किसी के चलने की आवाज सुनाई दी। वो कमरा खोला और बाहर आया तो देखा कोई नहीं है,फिर उसे लगा की छत पर कोई चल रहा है,वो सीढ़ी की और बढ़ गया,लेकिन सीढ़ी से ऊपर जाने वाले गेट में ताला बंद था,फिर भला कौन छत पर चल रहा है,उसे लगा कोई चोर होगा और वो चुप चाप कमरा बंद करके सो गया । अगले दिन उसने मलाकिन से ताला की चाभी मांगी, मालकिन ने बताया की चाभी तो नहीं है । उस ताला को बंद किये हुए चार साल हो गया और उस दिन से कभी छत जाने का ताला नहीं खुला। सुन कर नीरज को आस्चर्य हुआ की,आखिर चार साल से ताला क्यों बंद है? उसने ये बात जब पंकज से पूछा तो बताया की चार साल पहले इस रूम में रहने वाला लड़का छत से कूद कर अपनी जान दे दी थी,और आज तुम इस रूम में रह रहे हो।




इससे पहले भी जो रहता था,उसे आवाज सुनाई देती थी। नीरज ने इस बात की सच्चाई पता करने के लिए चुप चाप छत पर जाने वाले रास्ते का ताला तोड़ दिया। रात को फिर किसी के चलने की आवाज आयी तो नीरज चुप चाप छत पर जा कर देखा तो कोई नहीं था, वो अब आवाज का पीछा करने लगा, लेकिन उसे कोई नजर नहीं आ रहा था, वो परेशान हो कर सोचने लगा की आखिर कौन है ? उसे लगा की कोई तो है,जो नजर नहीं आ रहा है। मतलब साफ़ था की पंकज ने जो कहा वो सच था, लेकिन नीरज कमरा छोड़ना नहीं चाह रहा था, उसे इतना सस्ता कमरा नहीं मिलता,लेकिन रात को अब वो सो नहीं पाता था,एक रात तो उसे आस्चर्य लगा जब पायल की आवाज आने लगी। कल तक सिर्फ किसी चलने की आवाज आती थी,अब तो पायल की भी आवाज आती है। वो परेशान रहने लगा,अब तो किसी लड़की की भी आवाज आने लगी। नीरज सोच में डूब गया की पहले तो लड़का मारा था,लेकिन ये लड़की कौन है? उसकी समझ में कुछ नहीं आ रहा था,एक रात हिम्मत करके नीरज ने छत पर जा कर पूछा तुम दोनों कौन हो? कभी लड़का तो कभी लड़की,आखिर बात क्या है? मुझे ही क्यों सुनाई दे रहे हो? मेरा क्या कसूर है? उधर से लड़की का आवाज आया, मेरा नाम तृष्णा है, और ये मेरा बॉय फ्रेंड है, तुम जिस कमरे में रहते हो,उसी में रहता था, इसने मेरी खातिर ही अपनी जान दी थी,इसके गम में मैं भी अपनी जान दे दी । तब से आज तक हम दोनों यही साथ मिलते हैं,हम दोनों कभी तुम्हे परेशान नहीं करेंगे। तुम भी मुझे परेशान मत करना,अब चले जाओ,यहाँ से। नीरज चुप चाप चला गया, और सोचने लगा क्या करू? कमरा छोड़ू या नहीं,लेकिन रात को उसकी परेशानी बढ़ती जा रही थी,क्योंकि रात को पायल का आवाज उसे ना पढ़ने देता था ना ही सोने देता था।खैर कुछ दिनों तक तो नीरज वहां रहा,फिर अपना ठिकाना दूसरी तरफ ले गया,आज भी नीरज को सुंदरी भवन की वो रातें याद आती हैं तो शरीर के रोंगटे खड़े कर देती हैं।
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