real love story in hindi-ये इश्क़ नहीं आसान

real love story in hindi

अंकुर बहुत मेहनती लड़का था, वो हमेशा अपने काम पर ध्यान दिया करता था। ग्रेजुशन पूरा करने करने के बाद परिवार की स्थिति अच्छी ना होने होने की वजह से उसे जॉब ज्वॉइन करना जरुरी हो गया था,इसलिए उसने एक प्राइवेट कंपनी ज्वॉइन कर लिया। उसे कंपनी नहीं कल सेंटर कहना ज्यादा सही रहेगा, किस्मत उसकी इतनी अच्छी थी की 3 महीने के बाद ही उसे टीम लीडर की पोस्ट मिल गयी, अब वो और मेहनत करने लगा, सैलरी ज्यादा नहीं होने के बाबजूद भी उसका खर्च निकल जाता था, उसके अंदर काम करने वाले सभी स्टाफ खुश थे । क्योंकि वो सभी से प्यार से बात करता था और प्यार से ही वो सभी से काम करवाता था। जिसकी वजह से काम भी अच्छे से होता था, इसलिए उसके सीनियर भी उससे खुश थे, करीब एक साल तक वो उस कॉल सेंटर में काम किया,जहाँ उसकी मुलाकात स्वेता से हुई, जो उसी कम्पनी में अंकुर के निचे काम करती थी,वो बहुत ही सुंदर और सुशील थी, काम के सिलसिले में वो दोनों हमेशा एक दूसरे से बात-चीत किया करते थे,कब अंकुर को स्वेता से प्यार हो गया,अंकुर को खुद पता नहीं चला, अब वो और स्टाफ से ज्यादा स्वेता पर ध्यान देता था, कभी कभी स्वेता को ऑफिस के बाद खाना खिलाने रेस्टुरेंट भी ले जाया करता था,जिसकी वजह से उसके खर्चे बढ़ गए और उसने अपने बॉस से सैलरी बढ़ाने को बोला,लेकिन बॉस सैलरी बढ़ाने के मूड में नहीं था,इसी बीच दूसरी कॉल सेंटर ने अंकुर को अपने यहाँ काम करने का मौका दिया,वो भी अच्छी सैलरी के साथ,अंकुर ने तुरंत हामी भर दी और दूसरी कॉल सेंटर ज्वॉइन कर लिया,वहां भी अंकुर को टीम लीडर का ही पोस्ट मिला। वहां भी कुछ ही दिनों में अंकुर सभी का चहेता बन गया,और अपने काम से सभी का दिल का जीत लिया,लेकिन ऑफिस से निकलने के बाद वो हमेशा स्वेता से मिलता था,अब स्वेता का काम करने में दिल नहीं लगता था,वो भी अंकुर की कंपनी ज्वॉइन करना चाहती थी,लेकिन अंकुर की कम्पनी में जगह खाली ना होने की वजह से उसे वहाँ जॉब मिल नहीं पा रहा था,देखते देखते कुछ समय और गुजर गए,एक दिन अंकुर स्वेता के साथ रेस्टुरेंट में बैठा हुआ था,वहीँ अंकुर का एक दोस्त नीरज जो उसी के साथ कंपनी में काम करता था,वो भी उसी रेस्टुरेंट में आ गया, जहाँ अंकुर ने ना चाहते हुए भी उसे स्वेता से मिलवाना पड़ा, बात बात में स्वेता ने दोस्त को अपनी दिली ख्वाइश बता दी की वो उसी ऑफिस में काम करना चाहती है,जिस ऑफिस में अंकुर काम करता है । इस पर अंकुर के दोस्त नीरज ने बोला,अगर अंकुर चाहेगा तो वहां वो ज्वॉइन कर सकती है, लेकिन फिर स्वीटी का क्या होगा? इस पर स्वेता ने तुरंत स्वीटी के बारे में पूछा? इस पर दोस्त ने सिर्फ इतना कहा की ये तो अंकुर ही बताएगा,और वो मुस्कुराते हुए वहां से चला गया । अब तो अंकुर बेचारा फस गया,क्योंकि उसके दोस्त ने बेवजह आग जो लगा दी थी, स्वीटी अंकुर के निचे काम करने वाली लड़की थी,और अंकुर उसे भी अपने और सभी स्टाफ की तरह ही ट्रीट करता था। लेकिन ये बात स्वेता समझने को तैयार ही नहीं थी,वो बार बार पूछ रही थी की स्वीटी ही क्यों? और भी स्टाफ हैं तो उसके दोस्त ने स्वीटी का ही नाम क्यों लिया? अब भला अंकुर क्या करता? क्योंकि उसके दोस्त ने उसे फसा दिया था,अगली सुबह अंकुर कंपनी गया तो उसे पता चला की और भी स्टाफ की ज्वॉइन होने वाली है,अंकुर सुन कर बहुत खुश हुआ और उसने अपने अप्प्रोच से स्वेता को ज्वॉइन करवा दिया। स्वेता अंकुर के दोस्त अमृत के निचे ही काम करने लगी,अमृत को ये नहीं मालूम था की अंकुर और स्वेता एक दूसरे से प्यार करते हैं, वो स्वेता को पहली नजर में ही प्यार करने लगा,अब उसका पूरा ध्यान स्वेता की तरफ रहता था,इधर स्वीटी अपना ध्यान अंकुर की तरफ ज्यादा देने लगी,अंकुर बहुत ज्यादा परेशान रहने लगा,क्योंकि एक तरफ स्वीटी…..
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