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short hindi stories with moral value- तीन ठगों की रोचक कहानी

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हम हर दिन एक से बढ़कर एक प्रेरणादायक कहानिया प्रकाशित करते हैं। इसी कड़ी में आज तीन ठगों की रोचक कहानी short hindi stories with moral value प्रकाशित कर रहे हैं।आशा है ये आपको अच्छी लगेगी।
लेखक- संजीव

short hindi stories with moral value

प्राचीन काल की बात है एक गांव में चतुरवीर नामक एक युवक रहता था। उसके गांव में ज्यादार लोग अनपढ़ थे और गरीबी में अपना जीवन यापन करते थे।उसी गांव में चन्दन,नंदन और दुर्जन नामक अपराधी प्रवृति के युवक भी रहते थे जिनका काम लोगो को ठग कर अपना पेट भरना था। चतुर्वीर थोड़ा पढ़ा लिखा था और उसने शहर जाकर पैसा कमाने की सोची। वो शहर गया और पहले एक छोटी सी नौकरी की और बाद में बड़ी। एक साल में उसने अच्छा खासा पैसा बना लिया और उसने गांव जाने की सोची और इस बारे में अपने घर वालों को बता दिया। पूरे गांव में उसके वापस आने की बात फैल गयी। गांव वाले यह सुनकर बड़े खुश हुए पर चन्दन, नंदन और दुर्जन ने चतुरवीर को रास्ते में ही ठगने और लूटने की योजना बना ली। जिस दिन चतुर्वीर को आना था, तीनो ठग रास्ते में अलग अलग जगहों पर जाकर खड़े हो गए और उसके आने का इंतजार करने लगे। चतुर्वीर ने अपने अपने सारे कमाए हुए धन को एक गठरी में बंधा और अपने पीठ पर लादकर अपने गांव को चला, जब वो आधे रास्ते में पंहुचा तो चन्दन ने दूर से ही उसको देखकर नमस्ते कहा और उसका हाल चाल पुछा। जब वो पास आया तो चन्दन जोर से चिल्लाया की तुम्हारे पीठ पर सांप है।चतुर्वीर ने पीछे देखा तो उसे कुछ नहीं नजर आया। वो इसे चन्दन की नजरो का भ्रम समझ कर आगे बढ़ा। आगे बढ़ने पर उसे नंदन मिला और उसने भी उससे कुशल छेम पुछा और फिर उसके कंधे पर देखते ही जोर से चिल्लाया की तुम्हारे कंधे पर सांप है।
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इसबार चतुर्वीर भी घबरा गया और उसने अपना सामान उतर कर पूरी पीठ को झाड़ा पर उसे कुछ ना मिला। थोड़ी देर इंतजार कर वो आगे बढ़ा और जब वो अपने गांव पहुंचने को था की उसे दुर्जन मिला और वो दूर से उसे देखते हुए चिल्ला पड़ा की चतुर्वीर तुम्हारे पीठ पर साँप है। ये सुनते ही चतुर्वीर बुरी तरह दर गया और सोचा की तीन लोग गलत नहीं बोल सकते और अपने पीठ का सामान पटक कर द्रुत गति से गांव की और भाग चला और अपने परिजनों को सारी बात बताई। उन्होंने भी उसकी पीठ और कपड़ो को देखा पर उन्हें कुछ भी नजर नहीं आया। तब उसकी समझ में आया की तीनो ठगो ने मिलकर उसके कमाए हुए धन को ठग लिया है। इधर तीनो ने उस धन को आपस में बराबर बाँट लिया और ऐसे चले गए जैसे की कुछ हुआ ही ना हो।अपनी मेहनत से कमाए हुए धन के ऐसे जाने से चतुर्वीर बहुत व्यथित था किन्तु उसने उन तीनो ठगो को रंगे हाथ पकड़ने की योजना बनायीं और फिर शहर वापस चला गया। कुछ ही दिन बाद उसने योजना के अनुसार गांव वापस आने के घोषणा करवा दी। तीनो ठगों ने फिर से उसे लूटने की योजना बनायीं और रास्ते में उसका इंतजार करने लगे। ज्योही चतुर्वीर दिखा,चन्दन जोर जोर से चिल्लाने लगा की भागो तुम्हारे पीछे भूत है। तभी चतुर्वीर और उसके छिपे परिजनों ने मिलकर चन्दन को पकड़ लिया और उससे कहा की हमने नंदन और दुर्जन को भी पकड़ लिया है और उन्होंने अपना पूरा राज हमें बता दिया है की तुम तीनो मिलकर कैसे सब को ठगते थे। ये सुनते ही चन्दन डर गया और उसने सारा राज उगल दिया। उसकी निशानदेही पर नंदन और दुर्जन भी पकडे गए और उनसे ठगी और लूट का सारा सामान बरामद कर लिया गया। इस तरह च
तुरवीर की सूझ बुझ से गांववालों को तीनो ठगो से निजात मिला और वो ख़ुशी पूर्वक रहने लगे।
कहानी से सीख- किसी के बहकावे में नहीं आना चाहिए और अपनी अक्ल का इस्तेमाल करना चाहिए।
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