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short hindi story with moral value- राजकुमारी की असली सुंदरता

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हम हर दिन एक से बढ़कर एक प्रेरणादायक कहानिया प्रकाशित करते हैं। इसी कड़ी में आज हम राजकुमारी की असली सुंदरता कहानी short hindi story with moral value प्रकाशित कर रहे हैं।आशा है ये आपको अच्छी लगेगी।
लेखक- संजीव

short hindi story with moral value

एक राज्य में एक राजा था जिसकी एक बेटी थी जिसपर वह जान छिड़कता था। राजा के राज में प्रजा खुशहाल थी और सब कुछ अच्छा चल रहा था परन्तु राजा की एकलौती बेटी का बायां हाथ दाहिने से छोटा था। यूं तो राजकुमारी का चेहरा बहुत सुन्दर था पर अपने हाथ के कारण वह दुखी रहती थी। इस शारीरिक कमी के अलावा राजकुमारी में गुण ही गुण थे। उन्हें सारे शास्त्र याद थे और शास्रार्थ में कोई उनसे जीत नहीं पाता था। धीरे धीरे राजकुमारी विवाहयोग्य हुई और राजा ने उसके स्वंवर करने की सोची। चुकी सभी लोग राजकुमारी ने छोटे हाथ के बारे में जानते थे तो बहुत कम ही राजकुमार स्वंवर के लिए पधारे। उनमे विदर्भ देश का राजकुमार भी था,जो की परमवीर, ज्ञानी और उच्च कोटि का धनुर्धर था। उसके अलावा केवल दो और राजकुमार पधारे थे। खैर समय होने पर स्वंवर शुरू हुआ। राजा ने राजकुमारों को अपने बेटी से शादी के लिए कोई भी परीक्षा नहीं रखी थी, बस उन्हें कुछ पलों के लिए राजकुमारी को देखना था और उन्हें अपना आकलन राजा को बताना था।
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पहले वाले कुमार ने राजकुमारी को कुछ पल देखा तो राजा ने उससे पुछा की “हे कुमार तुम्हे मेरी बेटी में क्या दिख रहा है? राजकुमार ने उत्तर दिया की “हे राजन मुझे उसकी बायीं छोटी बांह दिख रही है” इसके बाद दूसरे राजकुमार की बारी आयी तो फिर से राजा ने उससे वही प्रश्न पूछा, तो दुसरे वाले कुमार ने उत्तर दिया की मुझे आपके बेटी का सुन्दर मुखड़ा दिख रहा है और बड़ी झुकी हुई आखें दिख रही है जिससे जैसे की सारा संसार समाया है। राजा ने उससे पुछा की क्या तुम्हे राजकुमारी की बायीं हाथ भी दिख रही है? इसपर दुसरे कुमार ने कहा की हाँ वो इस सुन्दर राजकुमारी में एक दोष है जैसे की चाँद में दाग। इसके बाद विदर्भ देशके राजकुमार की बारी आयी और उन्होंने राजकुमारी को लम्बे समय तक निहारने के पश्चात राजा से कहा की हे राजन मुझे इस राजकुमारी में भोलापन, दयालुता, एक वीरांगना, और एक विदुषी दिख रही है। इसपर राजा ने पुछा की क्या तुम्हे उसकी बायीं बाँह दिख रही है ।राजकुमार ने उत्तर दिया की नहीं, राजकुमारी के सुन्दर चेहरे से मेरी नजर ही नहीं हट रही । राजा में भरे दरबार में कहा की मैं अपनी बेटी के लिए ऐसा वर चाहता था जो उसी बाह्य नहीं आतंरिक सुंदरता का पारखी हो और मेरी बेटी को उसी रूप में स्वीकारे। और इसमें केवल विदर्भ देश के राजकुमार ही सफल हुए, इसीलिए मैं उनसे अपनी बेटी की विवाह की घोषणा करता हूँ। इस तरह दोनों का विवाह हो गया और वो सुखपूर्वक अपना जीवनयापन करने लगे।

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