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true love story in real life in hindi- प्यार या कुछ और


हम देसिकहानियाँ पर एक से बढ़कर एक रोमांटिक प्रेम कहानियां प्रकाशित करते हैं। इसी कड़ी में पेश है आज “प्यार या कुछ और ” true love story in real life in hindi. आशा है ये आपको पसंद आएगी।
वर्मा जी को शादी के 17 साल के बाद भी कोई बच्चा नहीं हुआ तो वो सोचने पर मजबूर हो गए आखिर इतना धन दौलत उनके बाद कौन भोग करेगा,और वो भला किसके लिए इतना कमा रहे हैं. वर्मा जी और उनकी पत्नी रोज मंदिर की सीढ़ियों पर अपना माथा टेकंते थे,शायद भगवान उनकी सुन ले और उन्हें औलाद का सुख दे दे. एक दिन सुबह-सुबह दोनों पति-पत्नी मंदिर की सीढ़ियों पर माथा टेंक रहे थे तभी उनके कानो में एक बच्चे की रुदन सुनाई दी. दोनों उस आवाज की तरफ बढ़ गए,तो पाया की मंदिर के पीछे एक छोटी सी बच्ची रो रही थी,उन्होंने बच्ची को उठाया और आस-पास सभी जगह उसके माँ-बाप को ढूंढने की कोशिश की,लेकिन कोई नहीं मिला,शायद कोई उस बच्ची को मंदिर की सीढ़ियों पर उनके लिए ही छोड़ गया था,ये सोच कर वो भगवान को धन्यवाद देते हुए,बच्ची को घर ले आये,जहाँ उन्होंने उसका नाम ख़ुशी रखा. क्योंकि उसके आने से ही उनके घर में ख़ुशी आयी थी. वो दोनों बहुत थे, ख़ुशी के आने के बाद तो वो दोनों मंदिर जाना ही भूल गए थे. धीरे-धीरे बेटी बढ़ने लगी और वर्मा जी और कमाने में जुट गए, उन्होंने सोच लिया था की वो अपनी बेटी को संसार की हर ख़ुशी ला के देंगे,इसलिए वो सिर्फ और सिर्फ पैसा कमाने में लग गये. ज्यों-ज्यों पैसा बढ़ने लगा,वर्मा जी को शराब की लत भी बढ़ने लगी,अब तो कभी कभी वर्मा जी पत्नी भी शराब पिने लग जाती. ख़ुशी माँ-पिता के होने के बाबजूद भी अकेली होती,क्योंकि उसके माता-पिता दोनों शराब में डूबे रहते थे. वर्मा जी पैसो को अहमियत देने लगे, उनकी नजर में पैसा से ही हर ख़ुशी खरीदी जा सकती थी,इसलिए वो ख़ुशी को खर्चा करने के लिए बचपन से ही पैसे देने लगे. ख़ुशी अब 13 साल की हो गयी थी,वो भी एक दिन शराब की एक घूंट पी ली,जिसका फैयदा उसके पड़ोस में रहने वाले 21 साल के राकेश ने उठा लिया. ख़ुशी जिसे प्यार समझती थी,वहीँ राकेश सिर्फ खुश होने का जरिया. अब तो जब भी मौका मिलता, राकेश और ख़ुशी संबंध बना लेते, ख़ुशी बहुत खुश थी,क्योंकि जो प्यार उसे माँ-बाप से नहीं मिलता था,वो प्यार उसे राकेश से मिल रहा था, और जो नहीं होना था,वही हो गया, ख़ुशी के पेट में तेज दर्द हुआ,उसे डॉक्टर से दिखाया गया,जहाँ डॉक्टर ने बताया की ख़ुशी माँ बनने वाली है,जिसे सुन कर वर्मा जी बर्दास्त नहीं कर पाए और दिल का दौरा पड़ने से वो चल बसे. अब तो वर्मा जी पत्नी के जीवन में अचानक से अंधकार समा गया,किसी तरह उसने बच्चे को गिरवा कर और ख़ुशी को अपने साथ दूसरे शहर चली गयी. धीरे-धीरे पैसे खत्म होने लगे, अब तो समस्या और बढ़ने वाली थी, अब ख़ुशी 15 साल की हो गयी थी,तभी उनके पड़ोस में रहने वाला संजीव ख़ुशी को देख कर उस पर फ़िदा हो गया और उसने ख़ुशी की माँ से ख़ुशी के साथ शादी करने की बात कह डाली, संजीव 18 साल का था,और वो ऑटो चलाता था, ख़ुशी ने मना कर दिया,क्योंकि वो राकेश से प्यार करती थी,लें जब राकेश ने ख़ुशी से अपना रिश्ता तोडा तो ख़ुशी भी टूट चुकी थी और उसने संजीव के साथ शादी करने के लिए हाँ कह दी. अब तो संजीव ख़ुशी के साथ साथ उसकी माँ का भी खर्चा चलाने लगा, साथ ही साथ जमा पूंजी भी खर्च होने लगा,देखते ही देखते ख़ुशी के 2 बच्चे भी हो गए,लेकिन 19 साल की उम्र और चेहरे की दमक से कोई नहीं कह सकता था की वो बच्चो की माँ है. धीरे-धीरे खर्चा बढ़ने की वजह से संजीव का प्यार काफूर होने लगा था,वो बार बार खर्च कम करने को बोलता था,लेकिन ख़ुशी पर कोई फर्क नहीं पड़ता था,ख़ुशी ने खर्च कम करने के बजाय जॉब करना ज्यादा सही समझा. और जॉब की तलाश में बाहर निकल गयी,जिसे एक छोटी सी कंपनी में जॉब मिल गया,ख़ुशी ने उस कंपनी में अपने आप को शादी-शुदा नहीं बताया और सिर्फ इतना बताया की वो अपनी माँ के साथ अकेले रहती है और उसे जॉब की बहुत जरुरत है. उस कम्पनी के मालिक ने उसकी मज़बूरी को देख कर उसे जॉब दे दिया. कम्पनी का मालिक भी 21 -22 साल का होगा, जो ख़ुशी पर दिल दे बैठा, अब तो ख़ुशी और पंकज,जो कंपनी का मालिक था,दोनों साथ साथ नजर आने लगे,दोनों का प्यार इतना बढ़ गया था की दोनों कब इतने करीब आ गये की उन्हें खुद पता नहीं चला,ये बात जब ख़ुशी के पति को पता चली तो वो घर छोड़ कर अकेले रहने लगा, उसने ख़ुशी से अपना रिश्ता तोड़ लिया.





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धीरे-धीरे ख़ुशी और पंकज इतने करीब आ गए की दोनों ने शारीरिक सम्बन्ध भी बना लिए,अब ख़ुशी,पंकज पर शादी करने का दवाब बनाने लगी,पंकज ने भी शादी के लिए हाँ कह दिया. लेकिन जब ये बात ख़ुशी की माँ को पता चली तो उसने कहा ये नहीं हो सकता,पहले ख़ुशी को उसके पति के साथ तलाक लेना होगा,और जब ये बात पंकज को पता चली की ख़ुशी शादी शुदा है और दो बच्चो की माँ है तो उसके पैरो तले जमीं खिशक गयी,अब वो ख़ुशी से अपना सारा रिश्ता तोड़ लिया,उसे विश्वास नहीं हो रहा था की ख़ुशी उससे अपनी जिंदगी का इतना बड़ा सच छुपाएगी.इधर ख़ुशी पंकज को अपनी  जिंदगी से जाने नहीं देना चाहती थी,लेकिन पंकज तो ऐसे गायब हुआ,जैसे गदहे के सर से सींग. ख़ुशी ने बहुत कोशिश की पंकज उसकी जिंदगी में वापस आ जाये,लेकिन पांकन नहीं आया,और तो और संजीव भी उसकी जिंदगी से दूर जा चूका था,एक बार फिर ख़ुशी अकेली हो गयी और वो सच्चा प्यार की तलाश में जुट गयी . अब तो उसके पास जॉब बही नहीं रहा, तभी उसके पापा के दोस्त ने उसे बताया की उसे अनुकम्पा के आधार पर पापा के बदले जॉब मिल सकता है,वो बहुत खुश हुई, उसने जॉब के लिए जोर-शोर से प्रत्यन करने लगी, उसके पापा के दोस्त अब उसे पैसो की भी मदद करने लगे. घर का खर्चा सही से चल रहा था, लेकिन पापा के दोस्त का कर्जा बहुत हो गया था,अब तो अनुकम्पा पे जॉब मिलने में भी देरी होने लगी थी, उसके पापा के दोस्त ने पैसे देने से मना कर दिया,आखिर कब तक वो पैसे देते रहते, और एक दिन उसके पापा के दोस्त ने उसे पैसे देने के बदले हम बिस्तर होने का प्रस्ताव दिया,जिसे ख़ुशी ने मान लिया, अब जब भी पैसे की जरुरत होती ख़ुशी हम बिस्तर होती और पैसे मिल जाते, ये बात ऑफिस के एम डी को भी पता चली और उसने भी जॉब के बदले हम बिस्तर होने को बोला और ख़ुशी मान गयी. अब तो ख़ुशी को जॉब भी मिल गयी थी,हर महीने पैसे भी आने लगे थे,लेकिन उसकी प्यार की तलाश अभी तक जारी थी. तभी उसकी जिंदगी में नीरज में आया,जो ख़ुशी को दिलो जान से चाहता था,वो ख़ुशी की आँखों में आसूं नहीं देख पाता था. वाकई उससे बहुत प्यार करता था,उसकी हर जरुरत की चीजे पूरा करता था, कुछ दिनों तक सब कुछ अच्छा चलता रहा, नीरज और ख़ुशी इन दोनों कई बार हम बिस्तर भी हुए,लेकिन एक दिन अचानक से ख़ुशी ने नीरज को अपनी जिंदगी से निकल जाने को बोला,नीरज को समझ में नहीं आया,आखिर क्यों ख़ुशी ऐसा कर रही है, इस पर ख़ुशी का कहना था की वो उससे प्यार नहीं करती,ये सुन कर नीरज की आँखे नम हो गयी,क्योंकि वो ख़ुशी से बहुत ज्यादा प्यार करता था,उसके बच्चो को अपने बच्चे की तरह प्यार देता था,लेकिन इसके बाबजूद भी ख़ुशी उससे प्यार नहीं करती थी, जब उसने ख़ुशी से इसका कारन पूछा तो उसने बताया की वो आज भी पंकज को नहीं भूल पायी है और वो पंकज को हर हाल में पाना चाहती है,जिसे सुन कर नीरज ख़ुशी की जिंदगी से ये कहते हुए दूर हो गया की कभी भी कहीं भी उसकी जरुरत महसूस हो तो उसे याद कर लेना,वो उसकी हर मदद के लिए तैयार रहेगा. ख़ुशी बहुत अपसेट थी और उसकी उदासी उसके चेहरे से नजर आ रही थी, उसी के साथ काम करने वाला संदीप ने उससे उदासी की वजह पूछी तो ख़ुशी ने पंकज की बात बता डाली. फिर क्या था संदीप ने एक बाबा का पता बताया और उसे साथ में ले गया,जहाँ बाबा बिछडो को मिलाने का काम करते थे, लेकिन ये क्या संदीप ने बाबा से ये बताया की वो ख़ुशी से उसे मिलवा दे,और बाबा ने ऐसा ही किया, अब ख़ुशी संदीप के करीब होने लगी और कब दोनों हम बिस्तर हो गए पता भी नहीं चला, जब ख़ुशी लगातार उसके पीछे पड़ी रही तो,एक बार फिर संदीप ने बाबा की शरण ली और इस बार पंकज को ख़ुशी का आशिक बताया, बाबा ने पंकज को ख़ुशी के करीब ले आया. एक बार फिर पंकज और ख़ुशी करीब हो गए, लेकिन धीरे-धीरे पंकज को पता चल गया की उसके जाने के बाद ख़ुशी की जिंदगी में बहुत से लोग आये और वो एक बार फिर ख़ुशी को छोड़ कर अपना रास्ता खुद बनाने में लग गया. और आज भी ख़ुशी पंकज का इंतजार कर रही है,लेकिन पंकज उसके करीब जाने से भी डरता है..
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