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viral love story in hindi-मानसून की पहली बारिश और प्यार

viral love story in hindi

आज हम आपको ऐसी viral love story in hindi सुनाने जा रहे हैं जो आपने कभी नहीं सुनी होगी।धनदीप अपने बाइक से काम करके घर लौट रहा था, तभी अचानक से जोर जोर से हवा चलनी लगी,और रिम झिम बारिश शुरू हो होगी। धनदीप उसी बारिश का मजा लेते हुए,घर की तरफ बढे जा रहा था,तभी काफी तेज बारिश होने लगी और वो पास के ही दुकान में जा कर बारिश से बचने का तरीका ढूंढ लिया, काफी देर तक बारिश होते रही, दिन से जो बारिश शुरू हुई सो शाम तक लगातार बारिश होती रही, इतना तेज बारिश हुआ की लग रहा था, आज पुरे शहर को डूबने का मन था आसमान को,देखते ही देखते पूरा सड़क जलमग्न हो गया, अब तो चारो तरफ सिर्फ पानी ही पानी नजर आने लगा, पूरा का पूरा सड़क डूब चूका था, सड़क के किनारे बने नाले भी उफान पर आ गए थे, और बारिश खतम होने के बाद सड़क गाड़ियों से भर गया था, क्योंकि काफी देर से बारिश हो रही थी,इसलिए सभी बारिश रुकने का इंतजार कर रहे थे,ऐसे में धनदीप भी बारिश खत्म होने के बाद बाइक ले कर सड़क पर आया तो पाया उसकी बाइक सड़क पर लगे पानी में डूब चूका है, वो धीरे-धीरे बाइक चला रहा था,क्योंकि सड़क पर गड्ढे पानी से भरे हुए थे, इसलिए कहीं बाइक गड्ढे में ना गिर जाये,वो जाम में फसा हुआ था तभी हलकी हलकी बारिश फिर शुरू हो गयी,निचे भी पानी और ऊपर से भी पानी, जिधर देखो उधर पानी ही पानी साथ ही साथ सड़क पर गाड़ियों का जाम, अजीब सा मंजर देखने को मिल रहा था, जाम भी बहुत ही लम्बा लगा हुआ,तभी उसकी कानो में एक आवाज आयी की साइड हो जाओ,हवा-हवाई आ रहा है, धनदीप ने बगल में देखा तो पाया एक रिक्शा वाला ऐसा कहता हुआ,तेजी से उसके बगल से निकल रहा है, और अचानक से आगे सड़क में बने गड्ढे की वजह से रिक्शा वाला रिक्शा को संभाल नहीं पाया और रिक्शा सहित पानी में जा गिरा,रिक्शा पर बैठे लोग भी पानी में गिर कर पूरी तरह से भींग चुके थे, धनदीप इतना समझ चूका था की सड़क के किनारे गड्ढे हैं,जिनसे बच कर निकलना है,इसलिए वो धीरे-धीरे अपनी बाइक को पानी से निकल रहा था,तभी एक स्कूटी उसके बगल से निकला और वो भी स्पीड में,धनदीप के मुँह से निकला, उधर से नहीं, तब तक तो स्कूटी भी गड्ढे में जा कर फस गयी, स्कूटी एक लड़की चला रही थी, उसने काफी कोशिश की स्कूटी गड्ढे से निकल जाये,लेकिन स्कूटी निकल ही नहीं रही थी,लड़की ने आस-पास नजर घुमाई,शायद कोई मदद कर दे,लेकिन इस पानी में उसकी कोई मदद नहीं कर रहा था, ये नजर धनदीप की और भी गयी,लेकिन धनदीप भी आगे निकल गया,फिर उसने पीछे मुड़ कर देखा तो लड़की असहाय मदद की आस लिए हुए इधर-उधर देख ही रही है,धनदीप से रहा नहीं गया,उसने बाइक साइड में लगा कर पानी में कूद पड़ा और लड़की की मदद करने के लिए स्कूटी को निकालने का प्रयास करने लगा,लेकिन स्कूटी निकल ही नहीं पा रही थी, और सभी देख कर हस रहे थे, आखिर कार धनदीप की हिम्मत और मेहनत ने रंग लायी और स्कूटी गड्ढे से निकल गयी, लेकिन धनदीप और लड़की पूरी तरह से भींग गए थे, और एक नयी मुसीबत ये हुई की स्कूटी में पानी जाने की वजह से स्कूटी स्टार्ट नहीं हो पा रही थी, धनदीप जैसे-तैसे करके स्कूटी को पानी से निकला और काफी कोशिश की स्कूटी चल पड़े,लेकिन पानी की वजह से स्कूटी स्टार्ट नहीं हुई, अंत में धनदीप ने बोला,स्कूटी को किसी मेकेनिक यहाँ दिखाना पड़ेगा, लड़की बेबस हुए बोली ठीक है, धनदीप पास के ही दुकान में स्कूटी को धकलते हुए ले गया और मेकेनिक से दिखाया तो मेकेनिक ने बताया,पानी अंदर तक चला गया है, इसमें समय लगेगा, इधर लड़की पूरी तरह से भींगे की वजह से काँप रही थी,धनदीप ने बोला स्कूटी यहीं छोड़ दो,कल ले लेना मैं अपनी बाइक से आपको छोड़ देता हूँ, लड़की मान गयी।लड़की धनदीप के पीछे बैठ गयी,लेकिन हवा की वजह से उसे और ठण्ड लग रही थी,उसने धनदीप को कस कर पकड़ रखा था, धनदीप उसकी हालत समझ रहा था,इसलिए उसने उससे बात करने को बोला,और अपना नाम बताया,इस पर लड़की ने अपना नाम स्वेता बताया, इसके बाद धनदीप ने उसके घर का पता पूछा,लड़की ने अपने घर का पता बताया तो धनदीप उसे उसके घर तक छोड़ दिया ।घर पहुंचने के बाद स्वेता ने धनदीप को अपने घर आने को बोला,धनदीप ने अगली बार आने को बोला लेकिन स्वेता के जिद की वजह से धनदीप उसके घर चला गया,जहाँ स्वेता ने उसके टॉवल दिया,धनदीप ने चुप चाप टॉवल ले कर अपना सिर पोछने लगा,इतने में स्वेता ने कपडे बदल कर गरमा गर्म चाय बना कर ले आयी,चाय की वजह से धनदीप की भी ठण्ड काम हो गयी। फिर कुछ देर तक दोनों में बात होती रही और स्वेता बार बार उसे धन्यवाद बोल रही थी,क्योंकि वहां इतने लोग थे लेकिन किसी ने उसकी मदद नहीं की, लेकिन धनदीप की मदद की वजह से वो सही सलामत घर पहुंच गयी,ये बात जब स्वेता के माता-पिता को पता चली तो वो भी धनदीप को बार बार धन्यवाद बोल रहे थे, फिर धनदीप ने बोला उसे घर जल्दी जाना है, क्योंकि वो अकेला रहता है,इसलिए उसे खाना भी बनाना है । इस पर स्वेता की मम्मी ने खाना यहीं खाने को बोला, धनदीप के बार बार मना करने के बाद भी स्वेता नहीं मानी और उसने खाना बना कर धनदीप को खिला दिया,साथ ही साथ ये भी कह डाला की जब दिल करे आ कर खाना खा ले। फिर दोनों ने आपस में अपना मोबाइल नंबर चेंज किया और धनदीप वापस अपने घर लौट आया,लेकिन रात भर वो स्वेता के बारे में ही सोचता रहा, अगले दिन जब वो सो कर जगा तो स्वेता कॉल कर रही थी अब तो स्वेता और धनदीप के बीच रोज बातें होने लगी, काफी दिनों तक बातें होने के साथ साथ दोनों मिलते भी,धनदीप को स्वेता से प्यार हो गया था,लेकिन क्या स्वेता भी उससे प्यार करती है,ये बात धनदीप को पता नहीं चल पा रही थी,लेकिन स्वेता के बात चीत से उसे…..

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