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विज्ञान कथा- बरमूडा ट्रायंगल का रहस्य


हम हर दिन एक से बढ़कर एक वैज्ञानिक कहानिया प्रकाशित करते हैं। इसी कड़ी में आज बरमूडा ट्रायंगल का रहस्य विज्ञान कथा प्रकाशित कर रहे हैं।आशा है ये आपको अच्छी लगेगी।
लेखक-शुभम
राहुल अमेरिका से थे और उन्हें पारलौकिक चीजों में बहुत इंटरेस्ट था। उन्होंने बरमूडा ट्रायंगल के बारे में पढ़ रखा था। बरमुंडा ट्रायंगल के बारे में कहा जाता है जो उसके ऊपर से गुजरता है वह चीज दोबारा वापस नहीं आती। उन्होंने फैसला किया कि वह इसके ऊपर से उड़ेंगे और एक किराए पर एक प्लेन लिया। शाम को उनकी हवाना एयरपोर्ट से उड़ान भरने की प्लानिंग थी उससे पहले वाली रात को उन्होंने एक डरावना सपना देखा की उनका जहाज डूब गया है और एलियंस उनके जहाज को ले जा रहे हैं। उन्होंने सोचा यह तो मजाक है सपना तो सपना ही होता है। फिर अगले दिन शाम को उन्होंने हवाना से उड़ान भरी। वो अपने सफर को लेकर बहुत रोमांचित थे। जब रोमांच और साहस चरम पर होता है तो हिम्मत अपने आप आ ही जाती है। हवाना से बरमुंडा ट्रायंगल 500 किलोमीटर की दूरी था। शुरुआत में मौसम बहुत साफ था। उड़ती हुई चिड़िया को देखना,नदी पहाड़ और जंगल को एरोप्लेन से देखना बहुत ही सुहाना पल था। एरोप्लेन में FM रेडियो भी बज रहा था जो शहर का हाल बता रहा था और मौसम का हाल भी। रेडियो के अनुसार मौसम काफी साफ था और अगले 2 दिन तक बारिश होने की संभावना नहीं थी। 300 किलोमीटर बाद सागर की सीमा शुरू हुई और उसके 150 किलोमीटर बाद बरमूडा छेत्र के समुद्र की शुरुवात। आगे जाने के बाद रेडियो अपने आप बंद हो गया। उन्होंने सोचा एकदम से यह क्या हो गया फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और वो उड़ते रहे। वह बरमूडा ट्रायंगल के सीमा में गए ही थे की तभी अचानक प्लेन का दिशासूचक यन्त्र गलत दिशा बताने लगा और रेडियो से अनजान आवाज़े आनी लगी जैसे की आगे जाने से मना कर रही हो। मौसम के अचानक खराब होने के कारण प्लेन के इंजन सही से काम नहीं कर रहे थे फिर भी राहुल का हौसला कम नहीं हुआ ।कुछ दूर आगे जाने के बाद राहुल को आसमान में चमकती लाल रंगो वाली उडनतश्तरी नज़र आयी।उस उडनतश्तरी में से नीली रौशनी ने प्लेन पर प्रहार किया जिससे उनका प्लेन उस उडनतश्तरी की तरफ खीचा चला गया।





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जैसे ही वो प्लेन उडनतश्तरी के मुख्य दरवाजे में शामिल हुआ,उसने देखा वो उडनतश्तरी अनजान चमकीली धातु से बनी थी । दोनों मशीनें जिसमे अलग अलग तरह के बटन लगे थे,जिससे वो एलियन शिप संचालित हो रही थी।उसमे कुछ त्रिकोणीय पिरामिड आकर के यन्त्र अपने आप चलने लगे थे । वहां कुछ 3 फ़ीट के एलियन भी थे जिनके सर किसी घोड़े जैसे थे और बाकि का पूरा शरीर इंसानो जैसा था।उन्होंने एक बटन दबाया जिससे एक विशालकाय हाथ जैसा यन्त्र प्लेन के मुख्य द्वार को तोड़कर राहुल की तरफ बढ़ने लगा और राहुल को पकड़कर एक बिस्तर पर लिटा दिया। उसके चारों तरफ एक हरे रंग का बुलबुला सा बन गया जिसमे वो हवा में उड़ने लगा उसकी तरफ एक नुकीली सुई बढ़ने लगी जैसे की वो उसकी चीरफाड़ करने वाली हो।अब उसकी बचने की उम्मीद कम लग रही थी। सुई उस तक पहुंचे उससे पहले ही वो बुलबुल फोड़ देता है और अपने जीन्स से गन निकालकर एलियन पर चला देता है, जिससे वो एलियन घायल हो जाते है। वो अपने प्लेन में बैठकर उसे चालू कर देता है। एलियन उसे रोकने की पूरी कोशिश करते है और एक बटन दबा देते है जिससे एलियन शिप का मुख्य द्वार धीरे धीरे बंद होने लगता है। राहुल ये देख लेता है और प्लेन की स्पीड बढ़ा देता है। अब द्वार बंद होनी ही वाला होता है क्योंकि वो देखता है अब प्लेन का आकार इतना नहीं था कि वो एलियन शिप के मुख्य द्वार से बाहर निकल सके, इसलिए वो चलते प्लेन से कूद जाता है और 5 फीट लंबे उडनतश्तरी की खिड़की से अपनी बन्दुक की मदद से कांचनुमा चीज को तोड़कर कूद जाता है।प्लेन उडनतश्तरी के मुख्य द्वार से टकराकर नष्ट हो जाता है और प्लेन से निकले पेट्रोल से एलियन स्पेसशिप जलकर नष्ट हो जाती है।ऐसा लग रहा था जैसे बरमूडा ट्रायंगल को उन एलियंस से मुक्ति मिल गयी हो। राहुल के पास किस्मत से पैराशूट था जिससे वो समुद्र में गिरे इससे पहले ही अमेरिकी नौसेना का गस्ती जहाज उसे बचा लेता है, जहाँ वो उन्हें पूरी बात बताता है और वो नौसैनिक उसे घर तक छोड़ देते है।उसके इस साहस से वो एरिया आतंक मुक्त हो चूका था।अब से बरमूडा एरिया में किसी भी जहाज और प्लेन के साथ कभी कोई दुर्घटना नहीं हुयी है।राहुल ये साहसिक यात्रा कभी नहीं भूलेगा।कहानी कैसी लगी जरूर बताना दोस्तों ।
मैं आशा करता हूँ की आपको ये “विज्ञान कथा” आपको अच्छी लगी होगी। कृपया इसे अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ फेसबुक और व्हाट्स ऍप पर शेयर करें। धन्यवाद्। ऐसी ही और कहानियों के लिए देसिकहानियाँ वेबसाइट सब्सक्राइब करें




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