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हौसले बुलंद हो तो कुछ भी करना आसान हो जाता है-a motivational story in hindi for life

हम एक से बढ़कर एक motivational जगत की Story प्रकाशित करते हैं। पेश है इसी कड़ी में आज हम “हौसले बुलंद हो तो कुछ भी करना आसान हो जाता है” a motivational story in hindi for life प्रकाशित कर रहे हैं . आशा है आपको ये story पसंद आएगी.


हौसले बुलंद हो तो कुछ भी करना आसान हो जाता है
हम सब के अन्दर एक बहुत ही बड़ी ताकत होती है, लेकिन हम उसे समझ नही पाते, और जिन्दगी में कुछ खास नहीं कर पाते.
जो अपनी इस ताकत को समझ जाते हैं, वो जीवन में बहुत कुछ कर जाते हैं. हमारे पास दो हाँथ है, दो पैर है, दो ऑंखें हैं, और सबसे बड़ी चीज हमारे पास घर वालों का सहयोग है, फिर भी हम अपने जीवन में ज्यादा कुछ नहीं कर पाते हैं. आज हम आपको एक ऐसी लड़की की कहानी बताएँगे, जिसके पास ज्यादा कुछ नहीं था, लेकिन उसने अपने जीवन में कुछ ऐसा कर दिया , जो सब सिर्फ सपनों में देखते हैं.
दिल्ली की एक झोपड़ पट्टी में रूप नाम की लड़की रहती थी, जिसके पापा मोची का काम किया करते थे. रूप अपने मां बाप की इकलोती औलाद थी. रूपा विकलांग थी, उसे पढने का बहुत शौक था. लेकिन घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण उसे अपनी पढाई के लिए पैसे भी कमाने पड़ते थे.
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एक दिन रूपा की जिन्दगी में कुछ ऐसा हुआ, जिससे उसकी दुनिया ही बदल गई, रविवार का दिन था, रूप घर के बहार बैठ कर पढ़ रही थी, तभी उसे अपने पापा के एक्सीडेंट की खबर सुनाई दी. उसके पापा सिग्नल के पास जूते चप्पल ठीक करने का काम किया करते थे, एक दिन उनके उपर किसी अमीर जादे ने अपनी गाड़ी चढ़ा दी और रूपा के पिता की वहीं मौत हो गई.
अब गाड़ी वाला अमीर था, तो वो जेल जाने से बच गया और पुलिस ने भी उसकी मदद की. रूपा कर भी क्या सकती थी, वो कई बड़े बड़े अधिकारीयों से मिली, लेकिन कुछ न हो सका, मुआवजे के नाम पर उन्हें कुछ पैसे दे दिए गये, लेकिन रूपा ने अपने पापा के कातिल को सजा दिलाने की मन में ठान ली थी.
उसे एक बड़ा अधिकारी बनना था, लेकिन उसका ये सफ़र इतना आसान भी नहीं था. क्योंकि उसे घर चलाना था, साथ में पढाई करनी थी और एक सबसे बड़ी मुसीबत वो विकलांग थी. लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी.
वो सिर्फ जिला अधिकारी बनने का सपना देख रही थी और दिन रात एक कर के वो रोज थोड़ा थोड़ा अपनी सपने की ओर बढती.
सुबहा चार बजे उठ कर वो पहले अपनी पढाई करती इसके बाद लोगों के घरों में बर्तन मांजती इसके बाद शाम को बच्चों पढ़ाती फिर अपना पढ़ती और पढ़ते-पढ़ते वो सो जाती तो कभी कभी पढ़ते पढ़ते सुबह भी हो जाती. दो साल की कड़ी मेहनत और लगन से एक दिन वो अपने सपने तक पहुँच ही गई. अंत में वो एक जिला अधिकारी बन कर अपने पापा के कातिल को जेल भी भिजवा दिया.
किसी ने सच ही कहा है, जो तुम करना चाहते हो वो तुम कर के रहोगे, चाहे तुम्हारे रास्ते में कितनी भी मुसीबत क्यों न आये.
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