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अनूठा भाव-a new hindi short inspirational story of the grand old man of India

a new hindi short inspirational story of the grand old man of India

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पुत्र का विवाह उस समय के अनुसार-ग्यारह वर्ष में ही कर दिया गया। कन्या की उम्र सात वर्ष की थी। परन्तु कन्या के चुनाव नहीं था ,ऐसा एहसास माता को हुआ। उसकी माता ने सर्वगुण संपन्न,उत्तम गुणोंवाली लड़की की खोज शुरू कर दी। किन्तु पुत्र जो अब समझदार हो चला था ,ने स्पस्ट शब्दों में कहा की,’माँ दूसरा विवाह ना हो सकेगा। माँ नाराज हो गयी। उसने अपने पुत्र से कहा -यह मेरा निर्णय है,तुमहारा नहीं। मैंने कन्या पक्ष को आश्वासन भी दे दिया है। क्या मैंने तुम्हे पाल-पोसकर इसलिए बड़ा किया है की तुम मेरे अवहेलना करो और समाज में मुझे लज्जित होना पड़े ? पुत्र ने उत्तर दिया -,’माँ ,आपका मान मुझे प्राणो से भी प्यारा है पर माँ सोचो क्या दूसरे करने पर पहली पत्नी का जीवन नष्ट नहीं हो जाएगा ?’ माँ नहीं मानी। तब बेटा ने कहा -अगर कन्या के स्थान पर मई ही उन्हें अयोग्य लगता तो क्या तुम उस कन्या को दूसरा विवाह करने की अनुमति देती ?प्रश्न तर्कसंगत था और माँ के पास इसका कोई जवाब नहीं था।
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पुत्र ने कहा -माँ हम सभी अपने ही जीवन का ख़याल रखते हैं अपनी खुशहाली देखते हैं। पर कभी नहीं सोचते की अपनी खुशहाली से किसी की हानि तो नहीं हो रही ?हमें दूसरे के जीवन,उसके सुख -दुःख का भी ख़याल रखना चाहिए.तभी तो जीवन सार्थक माना जाएगा। इसी में वास्वतिक सुख और आनंद है। माता ने पुत्र की बातें ध्यान पूर्वक सुनी। और वेहद लज्जित भी हुई उस दिन के बाद से माता ने अपने पुत्र के दूसरे विवाह के बारे में सोचना भी छोड़ दिया। आज के समाज को जहां नैतिक मूल्यों का सतत हनन हो रहा है ,यह प्रसंग एक सीख देता है। ह बालक के बारे में आप जरूर जानना चाहेंगे-यह बालक थे-कांग्रेस के प्राणदाता,भारत माता के सच्चे सपुत,एक सच्चे सेवक,दादाभाई नौरोजी

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