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मां का घर-A new inspirational story about mother’s house

A new inspirational story about mother’s house
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पूजा तेजी से सीढि़यां चढ़ कर लगभग हांफती हुई सुप्रिया के घर की कालबेल दबाने लगी. दोपहर का समय था, उस पर चिलचिलाती धूप. वह जब घर से निकली थी तो बादल घिर आए थे.
सुप्रिया ने दरवाजा खोला तो पूजा हांफती हुई अंदर आ कर सोफे पर पसर गई. आने से पहले पूजा ने सुप्रिया को बता दिया था कि वह मां को ले कर बहुत चिंतित है. कल शाम से वह फोन कर रही है, पर मां का मोबाइल स्विच औफ जा रहा है और घर का नंबर बस बजता ही जा रहा है.
सुप्रिया ने फौरन उस के सामने ठंडे पानी का गिलास रखा तो पूजा एक सांस में उसे गटक गई. फिर रुक कर बोली, ‘‘सुप्रिया, मैं ने धीरा आंटी को कल रात फोन किया था और सुबह वे मां के घर गई थीं. वे कह रही थीं कि वहां ताला लगा हुआ है. अब क्या करूं? कहां ढूंढूं उन्हें?’’
रोंआसी पूजा के पास जा कर सुप्रिया बैठ गई और उस के कंधे पर हाथ रख धीरे से पूछा, ‘‘तेरी कब बात हुई थी उन से?’’
‘‘एक सप्ताह पहले, मेरे जन्मदिन के दिन. मां ने सुबहसुबह फोन कर के मुझे बधाई दी थीं.’’
पूजा रुक कर फिर बोलने लगी, ‘‘मैं चाहती थी कि मां यहां आ कर कुछ दिन मेरे पास रहें. मां ने हंस कर कहा कि तेरी नईनई गृहस्थी है, मैं तुम दोनों के बीच क्या करूंगी? देर तक मैं मनाती रही मां को, उन से कहती रही कि 2 दिन के लिए ही सही, आ जाओ मेरे पास. 5 महीने हो गए उन्हें देखे, होली पर घर गई थी, तभी मिली थी.’’
पूजा ने अपनी आंखों से उमड़ आए आंसुओं को रुमाल से पोंछा.
सुप्रिया चुप बैठी रही. कल शाम जब पूजा ने उसे फोन पर बताया था कि उस की मां फोन नहीं उठा रहीं तो वह खुद परेशान हो गई थी. पूजा की शादी के बाद मां मुंबई में अकेली रह गई थीं. सुप्रिया और पूजा मुंबई में एकसाथ स्कूलकालेज में पढ़ी थीं. सुप्रिया उस समय भी पूजा के साथ थी जब उस के पापा का एक्सीडेंट से देहांत हो गया था. उस समय वे दोनों 8वीं में पढ़ती थीं.
पूजा की मां अनुराधा बैंक में काम करती थीं. उन्होंने पूजा की पढ़ाई और परवरिश में कोई कमी नहीं रखी. पूजा ने स्नातक की पढ़ाई के बाद एमबीए किया और नौकरी करने लगी. 2 साल पहले सुप्रिया शादी कर दिल्ली आ गई. पिछले साल पूजा ने जब उसे बताया कि उस का मंगेतर सुवीर भी दिल्ली में काम करता है, तो सुप्रिया खुशी से उछल गई. कितना मजा आएगा, दोनों सहेलियां एक ही शहर में रहेंगी.
पूजा की मां ने बेटी की शादी बहुत धूमधाम से की. हालांकि पूजा और सुवीर लगातार कहते रहे कि बिलकुल सादा समारोह होना चाहिए. पूजा नहीं चाहती थी कि मां अपनी सारी जमापूंजी उस पर खर्च कर दें, लेकिन मां थीं कि बेटी पर सबकुछ लुटाने को आतुर. पूजा के मना करने पर मां ने प्यार से कहा, ‘यही तो मौका है पूजा, मुझे अपने अरमान पूरे कर लेने दे. पता नहीं कल ऐसा मौका आए न आए.’
आज पूजा को न जाने क्यों मां की कही वे बातें याद आ रही हैं. ऐसा क्यों कहा था मां ने?
सुप्रिया ने रोती हुई पूजा को ढाढ़स बंधाया और अपना फोन उठा लाई. उस ने मुंबई अपने भाई को फोन लगाया और बोली, ‘‘अजय भैया, आप से एक जरूरी काम है. मेरी सहेली पूजा को तो आप जानते ही हैं. अरे, वही जो कांदिवली में अपने पुराने घर के पास रहती थी? उस की मां अनुराधाजी कल शाम से पता नहीं कहां चली गईं. प्लीज, भैया, पता कर के बताओ तो. वे बोरिवली के कामर्स बैंक में काम करती हैं. मैं उन का पूरा पता आप को एसएमएस कर देती हूं. भैया, जल्द से जल्द बताइए. पूजा बहुत परेशान है, रो रही है. अच्छा, फोन रखती हूं.’’
सुप्रिया ने अजय भैया को बैंक और घर का पता एसएमएस कर दिया और पूजा के पास आ कर बैठ गई.
‘‘पूजा, भैया सब पता कर बताएंगे, तू चिंता मत कर.’’
पूजा ने सिर उठाया, ‘‘पूरे 24 घंटे हो गए हैं, सुप्रिया. धीरा आंटी बता रही थीं कि पिछले 3 दिन से घर बंद है. पड़ोस के फ्लैट में रहने वाली अमीना आंटी ने 4 दिन पहले मां को बाजार में देखा था. इस के बाद से मां की कोई खबर नहीं है. घर के बाहर न अखबार पड़े हैं न दूध की थैली. इस का मतलब है मां बता कर गई हैं अखबार और दूध वाले को.’’
सुप्रिया ने सिर हिलाया और बोली, ‘‘पूजा, हो सकता है मां कहीं जल्दी में निकल गई हों. पिछले दिनों उन्होंने तुम से कुछ कहा क्या? या कोई बात हुई हो?’’
पूजा कुछ सोचती हुई बोली, ‘‘सुप्रिया, मैं ने अपने जन्मदिन के बारे में तुम को बताया था न कि उस दिन मां ने मुझ से कहा कि वे मुझे जन्मदिन पर कुछ देना चाहती हैं…इस के लिए उन्होंने मेरा बैंक अकाउंट नंबर मांगा था. कल मैं बैंक गई थी. मां ने मेरे नाम 5 लाख रुपए भेजे हैं. यह बात थोड़ी अजीब लगी मुझे, अभीअभी तो मेरी शादी पर इतना खर्च किया था मां ने और…मैं इसी सिलसिले में मां से बात करना चाहती थी तभी तो लगातार फोन पर फोन मिलाती रही, पर…’’
सुप्रिया के चेहरे का भाव बदलने लगा, ‘‘5 लाख रुपए? यह तो बहुत ज्यादा हैं. कहां से आए उन के पास इतने रुपए? अभी तुम्हें देने का क्या मतलब है?’’
पूजा चुप रही. उसे भी अजीब लगा था. मां को इस समय उसे पैसे देने की क्या जरूरत? सुप्रिया दोनों के लिए चाय बना लाई. चाय की चुस्कियों के बीच चुप्पी छाई रही. पूजा पता नहीं क्या सोचने लगी. सुप्रिया को पता था कि पूजा अपनी मां से बेहद जुड़ी हुई है. वह तो चाहती थी कि शादी के बाद मां उस के साथ रहें लेकिन अनुराधाजी इस के खिलाफ थीं. पूजा बड़ी मुश्किल से शादी के लिए राजी हुई थी. उसे हमेशा लगता था कि उस के जाने के बाद मां कैसे जी पाएंगी?
अनुराधा ने उस से बहुत कहा कि 12वीं के बाद वह पढ़ाई करने बाहर जाए, किसी अच्छे कालेज से इंजीनियरिंग या एमबीए करे, लेकिन पूजा मुंबई छोड़ने को तैयार ही नहीं थी. उस ने एक ही रट लगा रखी थी, ‘मैं आप को अकेला नहीं छोड़ सकती. यहीं रहूंगी आप के साथ.’
अनुराधा जब कभी दफ्तर के काम से या अपने किसी रिश्तेदार से मिलने 2 दिन भी शहर से बाहर जातीं, पूजा बेचैन हो जाती. साल में 2 बार अनुराधा अपने किसी गुरु से मिलने जाती थीं. पूजा ने कई बार कहा था कि मैं भी तुम्हारे साथ चलूंगी उन के पास लेकिन मां यह कह कर मना कर देतीं, ‘पूजा, जब मुझे लगेगा कि तुम इस लायक हो गई हो तो मैं खुद तुम्हें ले जाऊंगी.’
लगभग 2 घंटे बाद अजय भैया का फोन आया. फोन पर भैया ने जो कहा, सुन कर सुप्रिया के चेहरे का रंग बदलने लगा. पूजा उस के और पास चली आई. सुप्रिया ने पूरी बात सुन कर जैसे ही फोन रखा, पूजा ने उसे झकझोरा, ‘‘बता न सुप्रिया, अजय भैया ने क्या कहा?’’
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सुप्रिया सोफे पर ढह गई. उस ने आंखें बंद कर लीं. पूजा ने चीखते हुए पूछा, ‘‘सुप्रिया, मां को कुछ हुआ तो नहीं?’’
सुप्रिया ने किसी तरह अपने को संभालते हुए कहना शुरू किया, ‘‘पूजा, तुम्हें यह खबर सुनने के लिए अपने को कंट्रोल करना होगा. सुनो…भैया बैंक गए थे. वहां पता चला कि अनुराधाजी ने पिछले महीने नौकरी से त्यागपत्र दे दिया. तुम्हारी शादी और पढ़ाई के लिए उन्होंने बैंक से लोन लिया था, अपना फ्लैट बेच कर उन्होंने कर्ज चुका दिया और शायद उन्हीं बचे पैसों से तुम्हें 5 लाख रुपए भेजे.’’
पूजा की आंखें बरसने लगीं, ‘‘मां ने ऐसा क्यों किया? वे हैं कहां, सुप्रिया?’’
सुप्रिया ने धीरे से कहा, ‘‘वे अपनी मरजी से कहीं चली गई हैं, पूजा…’’
‘‘कहां?’’
दोनों सहेलियों के पास इस सवाल का जवाब नहीं था कि मां कहां गईं. सुप्रिया ने पूजा के बालों में हाथ फेरते हुए कहा, ‘‘मैं जहां तक तुम्हारी मां को जानती हूं वे संतुलित और आत्मविश्वासी महिला हैं. तुम्हारे पिताजी की मृत्यु के बाद जिस तरह से उन्होंने खुद को और तुम्हें संभाला वह तारीफ के काबिल है. तुम्हीं ने बताया था कि तुम्हारे ताऊजी और दादी ने मां से कहा था कि वे तुम्हारे चाचा से शादी कर लें…पर मां ने यह कह कर मना कर दिया था कि वे अपनी बेटी को खुद पाल सकती हैं. उन्होंने किसी से 1 रुपए की मदद नहीं ली.’’
पूजा ने हां में सिर हिलाया और बोली, ‘‘इस के बाद दादी और ताऊजी हम से मिलने कभी नहीं आए. मेरी शादी में भी नहीं.’’
सुप्रिया ने अचानक पूछा, ‘‘पूजा, तुम्हें याद है, हम जब 10वीं में थे तो एक दिन तुम मेरे घर रोती हुई आई थीं मुझे यह बताने कि तुम्हारी मां कहीं और शादी कर रही हैं और तुम ऐसा नहीं चाहतीं.’’
पूजा का चेहरा पीला पड़ गया. उस घटना ने तो पूजा को तोड़ ही दिया था. पूजा को हलकी सी याद है समीर अंकल की. मां के साथ बैंक में काम करते थे. हंसमुख और मिलनसार. जिस समय पापा गुजरे, मां की उम्र 35 साल से ज्यादा नहीं थी. मां बिलकुल अकेली थीं. न ससुराल से कोई उन से मिलने आता न मायके से. मायके में एक बड़ी और बीमार दीदी के अलावा दूसरा कोई था भी नहीं.
समीर अंकल कभीकभी घर आते. मां और उसे पिक्चर दिखाने या रेस्तरां में ले जाते. वह मुंबई में अकेले रहते थे. मां ने ही कभी बताया था पूजा को कि बचपन में वे पोलियो का शिकार हो गए थे. एक पांव से लंगड़ा कर चलते थे. कभी शादी नहीं की यह सोच कर कि एक अपंग के साथ कोई कैसे निर्वाह करेगा. मां की तरह उन्हें भी शास्त्रीय गायन का बहुत शौक था. जब भी वे घर आते, मां के साथ मिल कर खूब गाते, कभी ध्रुपद तो कभी कोई गजल.
उसी दौरान एक दिन जब मां ने एक रात 15 साल की पूजा के सिर पर हाथ फेरते हुए प्यार से कहा था, ‘पूजा, मेरी गुडि़या, हर बच्चे को जिंदगी में मां पिताजी दोनों की जरूरत होती है. मैं भी तेरी उम्र की थी, जब मेरे पापा गुजर गए थे. मैं चाहती हूं कि तुझे कम से कम इस बात की कमी न खटके. पूजा, मेरी बच्ची, समीर तेरे पापा बनने को तैयार हैं…अगर तू चाहे…’
पूजा बिफर कर उठ बैठी थी और जोर से चिल्ला पड़ी थी, ‘मां, तुम बहुत बुरी हो. मुझे नहीं चाहिए कोई पापावापा. तुम बस मेरी हो और मेरी रहोगी. मैं समीर अंकल से नफरत करती हूं. उन को कभी यहां आने नहीं दूंगी.’
सुप्रिया ने तब पूजा को समझाया था कि जब समीर अंकल मां को अच्छे लगते हैं, उस का भी खयाल रखते हैं तो वह मां की शादी का विरोध क्यों कर रही है?
‘मैं मां को किसी के साथ बांट नहीं सकती, सुप्रिया. समीर अंकल के आते ही मां मुझे भूल जाएंगी. मैं ऐसा नहीं होने दूंगी.’
इस के बाद सब शांत हो गया. मां ने कभी समीर अंकल की बात उठाई ही नहीं. जिंदगी पुराने ढर्रे पर आ गई. बस, समीर अंकल का उन के घर आना बंद हो गया. बाद में उस ने मां को किसी से फोन पर कहते सुना था कि समीरजी की तबीयत बहुत खराब हो गई है और वे कहीं और चले गए हैं.
पूजा ने सिर उठाया, ‘‘सुप्रिया, लेकिन मां के गायब होने का इस बात से क्या संबंध है?’’
सुप्रिया ने सिर हिलाया, ‘‘पता नहीं पूजा, लेकिन भाई कह रहे थे कि अनुराधाजी ने कई दिन से अपना घर बेचने और नौकरी छोड़ने की योजना बना रखी थी. अचानक एक दिन में कोई ऐसा नहीं करता. तुम बताओ कि तुम्हारी शादी के बाद वे यहां क्यों नहीं आईं?’’
‘‘मां हमेशा कहती थीं कि मैं तुम्हारी शादीशुदा जिंदगी में दखल नहीं दूंगी. तुम्हारी अपनी जिंदगी है, अपनी तरह से चलाओ.’’
‘‘हुंह, यह भी तो हो सकता है न पूजा कि वे तुम्हें अकेले रहने का मौका दे रही हों? तुम आज तक उन से अलग नहीं रहीं, यह पहला मौका है. वे हर बार तुम से पूछती थीं कि तुम खुश तो हो?’’
पूजा सोच में डूब गई. जिस दिन शादी के बाद वह दिल्ली के लिए निकल रही थी, मां अपने कमरे से बाहर ही नहीं आईं. टे्रन का समय हो गया था और उसे मां से बिना मिले ही निकलना पड़ा. रास्ते भर वह सोचती रही कि मां ने ऐसा क्यों किया? उस के टे्रन में बैठते ही मां का फोन आ गया कि उन्हें चक्कर सा आ गया था. शादी के कामों में वे बुरी तरह थक गई थीं. पूजा का मन हुआ कि मां के पास वापस लौट जाए, लेकिन जब बगल में बैठे पति सुवीर ने प्यार से उस का हाथ दबाया, तो सबकुछ भूल कर वह नई जिंदगी के सपनों की झंकार से ही रोमांचित हो गई.

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पहले मां से रोज ही उस की बात हो जाया करती थी, फिर बातचीत का सिलसिला कम हो गया. पूजा जब पूछती कि मां, तुम ने खाना खाया कि नहीं, रोज शाम को टहलने जाती हो कि नहीं, तो अनुराधा हंस देतीं, ‘मेरी इतनी फिक्र न कर पूजा, मैं बिलकुल ठीक हूं. मुझे अच्छा लग रहा है कि तुम को अपनी नई जिंदगी रास आ गई. खुश रहो और सुवीर को भी खुश रखो. बस, इस से ज्यादा और क्या चाहिए?’
आज पूजा को पुरानी सारी बातें याद आ रही हैं. जब तक वह मां के साथ थी, हर समय उन पर हावी रहती, ‘मां, आप अपनी सहेलियों को घर न बुलाया करें, कितना बोर करती हैं. हर समय वही बात, शादी कब करोगी, कोई बौयफेंरड है क्या? आप की वह सफेद बालों वाली सहेली मोहिनीजी तो मुझे बिलकुल पसंद नहीं. कितना तेज बोलती हैं और कितना ज्यादा बोलती हैं.’
‘मैं ने मां को समझा ही नहीं,’ पूजा बुदबुदाई और उठ खड़ी हुई.
सुप्रिया ने टोका, ‘‘कहां चली, पूजा?’’
‘‘मां को ढूंढ़ने.’’
‘‘कहां?’’
‘‘पता नहीं, सुप्रिया. पर एक बार मैं उन से मिल कर माफी मांगना चाहती हूं.’’
‘‘तुम चाहो तो मैं तुम्हारे साथ चल सकती हूं,’’ सुप्रिया ने कहा.
अगले दिन सुवीर ने दोनों सहेलियों को हवाई जहाज से मुंबई भेजने की व्यवस्था कर दी. वह खुद भी साथ जाना चाहता था पर पूजा ने कहा, ‘‘जरूरत होगी तो मैं तुम्हें बुला लूंगी. मुंबई हमारी जानीपहचानी जगह है.’’
सुप्रिया के मायके में सामान रख दोनों सहेलियां सब से पहले कांदिवली पूजा के घर गईं. पूजा धीरा आंटी के घर पहुंची तो उसे देख कर वे चौंक गईं, ‘‘अरे पूजा, तू? अनुराधा की कोई खबर मिली?’’
‘‘यही तो पता करने आई हूं. आप बता सकती हैं कि मां की वे सहेलियां कहां रहती हैं जो हमारे घर कभीकभी आती थीं?’’
धीरा आंटी सोचने लगीं, फिर बोलीं, ‘‘सब के बारे में तो नहीं जानती, पर बैंक में तुम्हारी मां के साथ काम करने वाली आनंदी को मैं ने कई बार उन के साथ देखा था बल्कि 10 दिन पहले भी आनंदी यहां आई थीं.’’
‘‘मां ने आप से अपने जाने को ले कर कुछ कहा था…’’
‘‘नहीं पूजा, तुम्हारी मां हम लोगों से कम ही बोलती थीं. दरअसल, 10 साल पहले जब तुम्हारी मां ने शादी की थी, तब से…’’ कहतेकहते अपने होंठ काट लिए धीरा ने.
‘‘मां की शादी?’’ पूजा को झटका लगा. वह गिड़गिड़ाती हुई बोली, ‘‘प्लीज आंटी, आप मुझे सबकुछ सचसच बताइए. शायद आप की बातों से मुझे मां गई कहां हैं यह पता चल जाए?’’
धीरा गंभीर हो कर बताने लगीं, ‘‘तुम समीरजी के बारे में तो जानती ही हो. जिस दिन तुम्हारी मां को पता चला कि समीर बीमार हैं, उन्हें टी.बी. हो गई है, तुम्हारी मां ने घबरा कर मुझे ही फोन किया था. मैं और वे अच्छी सहेली थीं और अपना दुखदर्द बांटा करती थीं. मैं ने तुम्हारी मां को अपने घर बुलाया. समीर अनुराधा की जिंदगी में ताजा हवा का झोंका थे. तुम्हारी मां उन का बहुत सम्मान करती थीं और प्यार भी करती थीं. मैं अनुराधा को ले कर समीर के पास गई थी. समीर की हालत वाकई खराब थी. अनुराधा ही समीर को ले कर अस्पताल गईं लेकिन उन की जिंदगी में तो जैसे चैन था ही नहीं.’’
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‘‘क्या हुआ? समीर अंकल अच्छे तो हो गए?’’ पूजा ने बेसब्री से पूछा.
‘‘हमारे पहुंचने से पहले वहां समीर के मातापिता आ गए थे. उन्होंने अनुराधा के सामने यह शर्त रखी कि वह समीर से शादी करे वरना वे उस की शादी कहीं और कर देंगे. बीमार समीर को जीवनसाथी की जरूरत है और अब बूढ़े मांबाप में इतनी शक्ति नहीं कि उस की देखभाल कर सकें.
‘‘समीर बैंक में नौकरी करते थे, देखने में अच्छे थे, एक पैर ठीक नहीं था तो क्या, कोई न कोई लड़की तो मिल ही जाती. समीर के मातापिता का दिल रखने के लिए अनुराधा और समीर ने कोर्ट में जा कर शादी कर ली.
‘‘मुझे अनुराधा का यों शादी करना अच्छा नहीं लगा. शायद इस की वजह यह थी कि तुम मां की शादी का विरोध कर चुकी थीं. उस समय मैं भी अनुराधा से नाराज हो गई. इस के बाद हमारे संबंध पहले जैसे न रहे,’’ इतना कहतेकहते धीरा की आवाज भर्रा गई.
पूजा की आंखों में आंसू आ गए. वह बोली, ‘‘आंटी, हम औरतें ही दूसरी औरतों को जीने नहीं देतीं. मां की खुशी हमें बरदाश्त नहीं हुई.’’
धीरा ने सिर हिलाया, ‘‘आज पलट कर सोचती हूं तो अपने ऊपर ग्लानि हो आती है. काश, मैं ने उस समय अनुराधा को समझा होता.’’
पूजा भी मन ही मन यही सोच रही थी कि काश, उस ने मां को समझा होता.
धीरा ने अचानक कहा, ‘‘हो सकता है, मोहिनी को अनुराधा के बारे में पता हो. वह यहीं पास में रहती है. चलो, मैं भी चलती हूं तुम्हारे साथ.’’
धीरा फौरन साड़ी बदल आईं. तीनों एक आटो में बैठ कर दहिसर की तरफ चल पड़ीं. पूजा अरसे बाद मोहिनीजी से मिल रही थी. उन के पूरे बाल सफेद हो गए थे. पूजा के साथ धीरा और सुप्रिया को देख वे ठिठकीं. पूजा आगे बढ़ कर उन के गले लग कर रोने लगी. मोहिनी ने पूजा को बांहों में भींच लिया और पुचकारते हुए कहा, ‘‘मत रो बेटी, तुझे यहां देख कर मुझे एहसास हो गया है कि तू बहुत बदल गई है.’’
‘‘मुझे मां के पास ले चलिए, मौसी,’’ पूजा ने रोंआसी आवाज में कहा.
मोहिनीजी ने पूजा के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा, ‘‘तुम अपनी मां को ढूंढ़ती हुई इतनी दूर आई हो तो मैं तुम्हें मना नहीं करूंगी. लेकिन बेटी, अनुराधा को और तकलीफ मत देना, बहुत दिनों बाद मैं ने उसे हंसते देखा है, सालों बाद वह अपनी जिंदगी जी रही है.’’
अगले दिन जब पूजा और सुप्रिया मोहिनी के साथ इगतपुरी जाने को निकलने लगीं तो धीरा भी साथ चल पड़ीं. सुबह की बस थी. दोपहर से पहले वे इगतपुरी पहुंच गईं. वहां से एक जीप में बैठ कर वे आगे के सफर पर चल पड़ीं. जीप पेड़पौधों से ढके एक घर के सामने रुकी. घर के अंदर से वीणा वादन की आवाज आ रही थी.
मोहिनी ने दरवाजा खटखटाया तो एक कुत्ता बाहर निकल आया और उन्हें देख कर भौंकने लगा. अंदर से आवाज आई, ‘‘विदूषक, इतना हल्ला क्यों मचा रहे हो? कौन आया है?’’
अनुराधा की आवाज थी. जब वे सामने आईं तो पूजा के दिल की धड़कन जैसे रुक ही गई. सलवारकमीज और खुले बालों में वे अपनी उम्र से 10 साल छोटी लग रही थीं. माथे पर टिकुली, मांग में हलका सा सिंदूर और हाथों में कांच की चूडि़यां. भराभरा चेहरा. पूजा पर नजर पड़ते ही अनुराधा सन्न रह गईं. पूजा दौड़ती हुई उन के गले लग गई.
मांबेटी मिल कर रोने लगीं. पूजा ने किसी तरह अपने को जज्ब करते हुए कहा, ‘‘मां, मुझे माफ कर सकोगी?’’
अनुराधा ने सिर हिलाया और बेटी को कस कर भींच लिया.
‘‘मां, पिताजी कहां हैं? मुझे उन से मिलना है,’’ पूजा की आवाज में बेताबी थी.
अनुराधा उन सब को ले कर अंदर गई. समीर रसोई में सब्जी काट रहे थे. पूजा उन के पास गई तो समीर ने उस के सिर पर हाथ रख कर प्यार से कहा, ‘‘वेलकम होम बिटिया.’’
अनुराधा को कुछ कहनेसुनने की जरूरत ही नहीं पड़ी. पूजा समझ गई कि साल में 2 बार मां 10 दिन के लिए कहां जाती थीं. क्यों चाहती थीं कि पूजा शादी कर अपने घर में खुश रहे.
शाम को बरामदे में सब बैठे थे. पूजा ने सिर मां की गोद में रखा था. वह दोपहर से न जाने कितनी बार रो चुकी थी. मां का हाथ एक बार फिर चूम वह भावुक हो कर बोली, ‘‘मां, मैं कितनी पागल थी. औरत हो कर तुम्हारा दिल न समझ सकी. आज जब मैं अपने परिवार में खुश हूं तो मुझे एहसास हो रहा है कि तुम मेरी वजह से सालों से अपने पति से अलग रहीं.’’
अनुराधा को विश्वास नहीं हो रहा था कि उस की बेटी के साथसाथ उस की पुरानी सहेली धीरा भी लौट आई है, उस की खुशियों में शरीक होने. रात को सुवीर का फोन आया तो पूजा उत्साह से बोली, ‘‘पता है सुवीर, मेरे साथ दिल्ली कौन आ रहा है? मां और पापा. दोनों कुछ दिन हमारे साथ रहेंगे, फिर हम जाएंगे दीवाली में उन्हें छोड़ने.’’
अनुराधा और समीर मुसकरा रहे थे. बेटी मायके जो आई है.
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