ga('send', 'pageview');
Articles Hub

देवयानी-A new inspirational story in hindi of devyaani daughter of shukracharya

A new inspirational story in hindi of devyaani daughter of shukracharya
A new inspirational story in hindi of devyaani daughter of shukracharya,inspirational story in hindi,inspirational story in hindi for students, motivational stories in hindi for employees, best inspirational story in hindi, motivational stories in hindi language
देवयानी महर्षि शुक्राचार्य की पुत्री थी। प्राचीन काल में देवताओं और असुरों के बीच अनेको युद्ध हुवे। इन युद्धों में कभी असुर तो कभी देवता युद्ध जीतते , लेकिन एक समय ऐसा आया जब असुरों की शक्ति बढ़ने लगी। इसका मूल कारण था मृत संजीवनी विद्या। असुरों के गुरु थे महर्षि शुक्राचार्य जिन्हे भगवान् भोले शंकर द्वारा मृत संजीवनी विद्या का ज्ञान प्राप्त हो चुका था। युद्ध में जो भी असुर मरते शुक्राचार्य अपनी इस विद्या से उसे पुनर्जीवित कर देते। यह एक विकट समस्या देवताओं के लिए बन गई। देवगुरु बृहस्पति को इसका एक उपाय सूझा . उन्होंने अपने पुत्र कच से कहा कि वह जाकर गुरु शुक्राचार्य के शिष्य बन जाएँ। साथ ही वह अगर शुक्राचार्य की अत्यंत रूपवती कन्या देवयानी को आकर्षित कर ले तो संभवतः काम आसान हो जाये। कच ने ऐसा ही किया वह गुरु शुक्राचार्य का शिष्य बन गया। वह एक तेजस्वी युवक था। देवयानी मन ही मन कच को चाहने लगी। इसी बीच असुरों को इस बात का पता चल गया कि गुरु बृहस्पति पुत्र कच शुक्राचार्य का शिष्य बन गया है। और उनसे शिक्षा ले रहा है। असुरों ने निर्णय लिया कि कच का जीवित रहना उनके लिए विनाशकारी साबित हो सकता है। सो एक दिन उनलोगों ने कच को पकड़कर उसका वध कर दिया। देवयानी को जब इस बात का पता चला तब उसका रो -रो कर बुरा हाल था। और उसने कच को पुनर्जीवित करने का अनुरोध किया। पिता समझ गए कि यह प्रेम का मामला है सो पुत्री मोह में उन्होंने कच को पुनर्जीवित कर दिया। असुर इस बात से चिढ से गए और उन लोगों ने कच को पुनः मृत्यु के घात उतार दिया। पर देवयानी के कहने पर उन्होंने कच को फिर से जीवित कर दिया। असुरों ने तीसरी बार कच को मार डाला। इस बार उन लोगों ने चालाकी की उसके शरीर को जला डाला और राख को एक पेय में मिलाकर गुरु शुक्राचार्य को पिला दिया। देवयानी समझ गई इस कुचक्र को।
और भी प्रेरक कहना पढ़ना ना भूलें==>
राजकीय अभिवादन-A new short hindi story of an inspirational incident of royal welcme
अच्छा सेल्समेन-a new short inspirational story of a young salesmen
मूर्खाधिराज-foolish a new very short inspirational story in hindi language from the period of raja krishandeva
A new inspirational story in hindi of devyaani daughter of shukracharya,inspirational story in hindi,inspirational story in hindi for students, motivational stories in hindi for employees, best inspirational story in hindi, motivational stories in hindi language
उन्होंने तपोबल से कच को जीवित करने का प्रयास किया। मगर अगर कच को जीवित किया तो वे स्वयं मर जाते। उन्होंने कच की आत्मा को मृतसंजीवनी का ज्ञान दे दिया। कच पेट फाड़कर बाहर आ गए हुए शुक्त्राचार्य मर गए। कच ने मृतसंजीवनी विद्या का प्रयोग किया और गुरु शुक्राचार्य को जीवित कर दिया। कच ने देवयानी से विवाह करने की इच्छा जताई। उन्होंने शुक्राचार्य को अपने पिता समान कहा क्योंकि वह उनके पेट से निकला था। इस लिहाज से देवयानी उसकी बहन हुई तो भला कोई बहन से कैसे शादी कर सकता है ? इस बात से देवयानी कुपित हुई और क्रोध में उसने कच को श्राप दे दिया कि वह कभी भी मृत संजीवनी विद्या का प्रयोग नहीं कर सकेगा। कच को भी गुस्सा आ गया और उसने भी देवयानी को श्राप दे दिया कि वह जिस भी व्यक्ति से शादी करेगी उसका चरित्र अच्छा नहीं होगा। शर्मिष्ठा ने उसे एक कुवें में धकेल दिया वह बच तो गई ययाति राजा ने उसे बाहर निकालकर उसकी प्राणो की रक्षा की उसने ययाति से प्रेम निवेदन स्वीकार करने को कहा पर राजा ययाति ने अपनी असमर्थता जताई। जीवन में दूसरी बार देवयानी का तिरस्कार हुआ। वह वहीँ बैठकर रोने लगी। शुक्राचार्य उसे खोजने निकल पड़े। अपनी प्रिय पुत्री की यह दुर्दशा देखकर और कारण पूछा। देवयानी ने राजकुमारी शर्मिष्ठा को दासी बनाने को कहा क्योंकि उसने उसका अपमान किया था। अपने वंश और असुर जाती की रक्षा के लिया उसने देवयानी की दासी बन्ना स्वीकार कर लिया। इधर देवयानी का विवाह ययाति से हो गया। शर्मिष्ठा राजा ययाति पर मोहित हो गई इसे कहते हैं विधि का खेल /दोनों एक दूसरे पर मोहित थे। दोनों ने चुपचाप गंधर्व विवाह कर लिया। शुक्राचार्य को जब इस बात का पता चला तब उन्होंने ययाति को श्राप दे डाला ययाति तुरत ही एक वृद्ध व्यक्ति बन गए ययाति के छोटे पुत्र पुरु ने अपने पिता को अपना यौवन दे दिया। ययाति को जब अपने अनंत इच्छा का ज्ञान हुआ तब उन्हें आत्मग्लानि हुई और उन्होंने अपने पुत्र को उसका यवन वापस दे दिया और राज्य छोड़कर वानप्रस्थ हो गए

मैं आशा करता हूँ की आपको ये story आपको अच्छी लगी होगी। कृपया इसे अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ फेसबुक और व्हाट्स ऍप पर ज्यादा से ज्यादा शेयर करें। धन्यवाद्। ऐसी ही और कहानियों के लिए देसिकहानियाँ वेबसाइट पर घंटी का चिन्ह दबा कर सब्सक्राइब करें।

Tags-A new inspirational story in hindi of devyaani daughter of shukracharya,inspirational story in hindi,inspirational story in hindi for students, motivational stories in hindi for employees, best inspirational story in hindi, motivational stories in hindi language

80%
Awesome
  • Design
loading...
You might also like