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प्यार का दर्द-A new love story on pain of love

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मैं खुश भी था और नर्वस भी मैं पहली बार उस लडकी से मिलने वाला था जिसे मैं मन ही मन पसंद करता था पर मोहब्बत के अंजाम से डरता था। मैंने अपने मामा जी की love story में बेइंतहा pain देखा था तो डर बैठ गया था। वो मेरी class में पढती college में। वो मुझसे बहुत सुंदर थी वो मुझसे बात करने का प्रयास करती पर मैं कम ही बात करता था। सच ये है के मुझे girls से बात करने में हिचक होती थी। बहुत लडके उसकी बातें करते थे के वो किसी को भाव नहीं देती थी। मुझे 1 दिन दोस्त ने कहा यार इतनी अच्छी लडकी तुमसे बात करने बहाने ढूंढती है और तुम बचते रहते हो, वो तुम्हारी पढाई और शराफत की तारीफें करती है। मैंने कहा यार दूरी ही ठीक किसी के emotion से खेलने से अच्छा। ये love का लफडा खतरनाक है। पर आखिरकार लडकी ने मुझसे बात की और कहा के मुझसे बात करने में क्या problem है तुम्हें?? मैंने बोला करता तो हूं। इतने में वहां और दोस्त आ गये तो उसने धीरे से कहा शाम को रेस्टोरेंट में मिलना और आना है तुम्हें । मैं मना ना कर सका और मैने सहमति में गर्दन हिला दी। आज मैं उससे मिलने जा रहा था पर नर्वस था। रेस्टोरेंट जान पहचान का था तो उसने हमें कदरन तन्हा कौने में 1 मेज पर बैठाया।
वो बोली— कैसे हो पहले ये बताओ?
मैने कहा- ठीक हूं रोज तो मिलते हैं। पता है तुम्हें।
वो बोली- पर तुम इतना बचे-2 क्यों रहते हो मुझसे??
मै– नहीं तो करता तो हूं तुमसे बात।
वो– देखो मुझे तुमसे दोस्ती करनी है और बस करनी है।
मै– आजकल सच्ची दोस्ती कहां है जमाने में??
वो- तुमसे इसलिये के तुम किसी से मतलब नहीं रखते बस पढाई करते हो। आज तक किसी ने तुम्हारी 1 भी शिकायत नहीं बताई। मुझे लगता है अगर तुम मेरे friend बने तो बस मेरे ही रहोगे। मै चुप रहा उसे क्या बताता के love को लेकर जो डर मेरे मन में था वो मुझे अकेला रहने पर मजबूर करता था। मन मेरा भी करता था दोस्ती के लिये पर डर से बडा कुछ नहीं होता। प्रत्यक्षतः मैने कहा– क्या होगा दोस्ती से??
वो- दोनो 1 दूसरे की problem share करेंगे आपस में पढाई पर बहस करेंगे।
मैं– और इस बीच ज्यादा करीब आ गये तो??
वो- देखा जायेगा। अब तुम दोस्ती के लिये हामी भरो और वेटर को कुछ order करो मुझे भूख लगी है।
मैंने कहा-ठीक है। पर मैं तुमसे life time साथ निभाने का वादा नहीं कर सकता। कोशिश करूंगा के दोस्ती निभाऊं पर जिसे मुझे निभाने की पूरी उम्मीद ना हो वो वादा मैं नहीं किया करता। मैं किसी के जज्बातों से नहीं खेल सकता।
वो–ठीक है कोशिश करोगे ना?? मंजूर है।
उसने हाथ बढा दिया मैंने उससे हाथ मिलाया। और हल्का नाश्ता कर हम घर चले गये।
फिर तो बस जैसे हम 1 दूसरे का हाथ बन गये हर बात share करना 1 दूसरे की care करना। 1 दूसरे की पसंद-नापसंद से वाकिफ होते हम दोनो 1 दूसरे की रूह में समाते चले गये। दोस्ती आदत में बदल गई। और मैं उसके बिना कुछ नहीं ये अहसास तब हुआ जब वो 2 दिन के लिये अपने पैतृक गांव चली गई। उससे बात ना हो पाई तो मुझे लगा मेरे शरीर से किसी ने प्राण खींच लिये हों। अब दिमाग की घंटी बजी तो मैं सहम गया ये तो प्यार था। दो दिन बाद हम मिले तो मैंने कहा-
मेरा मन नहीं लगा तुम्हारे बिना!!
उसने गर्दन उठाई तो उसकी भीगीं हुई थी।
वो बोली- तुम मन की बात करते हो मुझे लगा जिंदगी मैं पीछे दिल्ली में छोड आई हूं।
मेरा दिल किया उसे खींच कर गले लगाऊं और बोलू, बस यहीं जगह है तेरी, कभी ना जाना यहां से दूर। पर खुद पर जब्त किया हम college में थे। पर ये रिश्ता गंभीर हो चला था मैंने उसे कहा आओ बैठते हैं बात करनी है। हम college के पार्क में बैठ गये।
मै- इस तरह कैसे चलेगा?? ये सब क्या है मुझे तुम्हारे बिना कुछ अच्छा नहीं लगता??
वो–मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकती और फिर वो रोने लगी।
मेरा दिल कर रहा था जोर-2 रोऊं पर मेरे रोने से वो और ज्यादा emotional हो सकती थी।
मै–देखो हमें इस रिश्ते पर अब control करना होगा वर्ना ये नासूर बन जायेगा।
वो–(रोते हुए गुस्से से मेरी तरफ देखकर बोली) मेरे प्यार को नासूर मत कहो। तुम मेरे हो तो मेरे तरफ की बात कहो। या दिल पर हाथ रखकर कहो तुम मेरे नहीं हो।
मैं- मैंने कब कहा तुम्हारा नहीं हूं पर मेरा दिमाग अभी जाग रहा है। दिल तो करता है तुम्हें कभी रोने ना दूं सारी जिंदगी तुम्हें अपनी छाती के नीचे अपनी हिफाजत में रखूं। तुम्हें गम को छूने भी ना दूं। पर तुम सच्चाई नहीं जानती हो!!
वो- क्या है सच्चाई मुझे अपने काबिल नहीं समझते हो ना??
मै-नही ऐसा नही है। तुम से ज्यादा मेरे काबिल स्वर्ग की अप्सरा भी ना होगी। पर ये रिश्ता बहुत खतरनाक है।
पर क्यो?? वो झुंझलाये स्वर में बोली।

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क्या ये प्यार है
एक सच्चे प्यार की कहानी
कुछ इस कदर दिल की कशिश
प्यार में सब कुछ जायज है.
मै- तुम्हें मालूम है ना हम अलग-2 जाति से आते हैं और दोनो परिवार कट जायेंगे पर हमें मिलने ना देंगे। दोनो जातियों का झूठा अंहकार हमारे प्यार को लील जायेगा। ये बोलते-2 मेरा गला रुंध गया।
उसने खींच कर मुझे गले लागा लिया।
मैंने कहा लोग देख रहे हैं। उसने बडी मुश्किल से मुझे छोडा।
मै- आंसू पोंछो। और जो मैंने बोला है उस पर विचार करो। या यहीं से हम रिश्ते को खत्म करना शुरू करेंगे।
वो- क्या हम लड नहीं सकते जमाने से??
मै- लड सकते हैं पर किससे?? जो हमारे हैं जिन्होंने जन्म दिया जो हमारी खुशी के लिये मर सकते हैं?? उन अपनो से लडने की हिम्मत नहीं मुझमे।
वो- तो क्या करें? मैं मर जाऊंगी तुम्हारे बिना और वो फिर रोने लगी।
मैं- चुप हो जाओ यार सोचने दो।
मैने विचार किया और बोला– 1 ही तरीका है जिससे शायद हम 1 हो सकें??
क्या?? वो आशा से बोली!
मैं-हम दोनो को काबिल बनना होगा। हमे इतने सक्षम बनना होगा के familys हमारे फैसले को टाल ना सके। यही तरीका है। प्यार में बहुत ताकत है बाबू हम उस ताकत का इस्तेमाल पढाई में करेंगे। देखना हमारा जुनून हमें कामयाब करेगा। हम मिलें या ना मिले पर हम प्यार को दर्द में नहीं काबिलियत में बदलेंगे। आगे खुदा जाने।
वो–तुम ठीक कह रहे हो मैं तुम्हे पाने के लिये कुछ भी कर सकती हूं।
मै– ok पर मैं तुम्हारी बदनामी या दोनो परिवार के टकराव या तुम्हारी रुसवाई की कीमत पर अपनी मोहब्बत को मुकम्मल नहीं करूंगा। प्यार खुशी और इज्ज़त का नाम है। बदनामी और दर्द का नही।
वो फिर रोने लगी पर हमने ये कसम ली के हम अपने प्यार को पाने की हर जायज कोशिश करेंगे।
हम दोनों ने खुद को पढाई में झोंक दिया। Bcom का आखिरी साल था हमारा। उसने c.a. में दाखिला लिया और मैंने नौकरी के लिये संघर्ष शुरू कर दिया। हमने सलाह करके घरवालों को धीरे-2 विश्वास में लेना शुरू किया। मैंने मामू से बात की और उसने अपनी मम्मी से। दोनो ने डांटा पर हमारा आचरण देखकर वो दोनो लगभग हमारे साथ थे। 1 साल बाद ही मैंने government job हासिल कर ली। उसके बहुत अच्छे marks आये। फिर शुरू की हमने परिवारो से बात करनी। मेरे पापा को जब पता लगा उन्होंने साफ इंकार कर दिया। उसके भाई और पापा को पता लगा तो कयामत आ गई उस पर पहरा बैठा दिया गया। पर हमने कुछ गलत तो किया नहीं था। आखिरकार मेरे मामा जी ने उसके पापा से बात की पर उन्होंने कहा- मैं मजबूर हूं। लडके के बारे में पता करा चुका कोई कमी नही पर जाति और रिश्तेदार मुझे करने ना देंगे। और मेरा बडा बेटा शायद जिंदा ना रहे। आखिर ये तय हो गया के हमारे मिलन के सारे रास्ते बंद हैं। Court marriage रास्ता था पर 2 परिवारों की इज्जत मिटाकर हम अपनी खुशी पाना नहीं चाहते थे। मैं उसका मायका और ससुराल उस लडकी नहीं छीन सकता था। उसे किसी रुसवाई में नहीं डाल सकता था, आखिर वो मेरी जान थी, मेरे दिल की जीनत थी।
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उसका सब कुछ छीनकर शादी करना स्वार्थ था। मुझे पता चला उसने खाना पीना छोड दिया है। मेरा भी बुरा हाल था पर हम दोनो के सामने जिम्मेदारी भरी life थी जो जीनी ही थी।मामू ने मुझे कहा तेरी वजह से मासूम लडकी का ये हाल हुआ तू ही ला अब उसे जिंदगी में वापिस। वो सच कह रहे थे मेरा फर्ज बनता था के मैं उसे आगे की जिंदगी जीने के लिये तैयार करूं।तमन्नाओं को भींचकर मैंने उससे आखिरी बार मिलने की इच्छा जताई।
मामा की कोशिश से वो अपनी मां के साथ आखिरी बार मुझसे मिलने उसी रेस्टोरेंट में आई जहां हम सबसे पहले मिले थे।
वहां हम तीनो बैठे। वो रोने लगी।
मैं– रोने से कुछ नहीं होने वाला हमने कोशिश की पर नहीं 1 हो सकते तो ये हंसके कबूल करो। अंदर से दिल कर रहा था उसके कंधे पर सिर रखकर रोऊं और वहीं प्राण त्याग दूं। पर जिम्मेदारी का अहसास मुझे रोके था। उसकी मां हमे बैठाकर चली गई।
वो- हम 1 हो सकते हैं तुम मान जाओ तो??
मै- कैसे??
वो–मेरी मम्मी राजी हैं और कहती हैं के court marriage कर लो।छोटा भाई भी तैयार है पर तुम क्यों नहीं मानते हो??
मैं– क्योंकि मैं अपने प्यार को पाने के लिये इतने लोगों की खुशी में आग नहीं लगा सकता। मेरे पापा ने कहा है मैं तैयार हूं पर रिश्ता तब जुडेगा जब लडकी का पिता मेरा समधी बनेगा। मैं तेरी खुशी के लिये जाति भूलने को तैयार हूं। पर रिश्तेदारी सारी जिंदगी चले ये चाहता हूं। तो पापा गलत नहीं कह रहे। मै दिल पर पत्थर रखकर उसे ये समझा रहा था। दिल तो कर रहा था अभी उसके साथ दुनिया से बहुत दूर चला जाऊं। पर उसकी बदनामी मैं नहीं देख सकता मैं उसे प्यार करता था, उसकी नजर किसी के सामने झुके उससे पहले तो मैं जान देना पसंद करता। इसलिये मुझे उसे समझाकर खुद से दूर करना ही था ताकि वो आने वाली जिंदगी सही तरीके से जी सके। कितना बदनसीब था मैं, मुझे ही जिम्मेदारी मिली थी मेरे प्यार का गला घोंटने की। मैने कहा- ये बताओ court marriage से कितने रिश्ते टूटेंगे ये सोचा है?? 1 रिश्ता बनाने के लिये हम कितने रिश्तों में आग लगायेंगे??क्या होगा सारे में बदनामी होगी के हमने परिवारों को तोडकर घर बसा लिया। तुम्हारी बदनामी कैसे झेल सकता हूं मै?? इससे अच्छा हम अपना ही रिश्ता तोडं लेंगे।
वो रोने लगी और बोली- मैं जान दे दूंगी।
मैं- क्या होगा?? सब दोस्तों को मालूम है सब बोलेंगे मेरी वजह से तुमने जान दी। बोलो मुझे जेल जाते देखना पसंद होगा तुम्हें। दोनो परिवार बर्बाद हो जायेंगे। तुम्हारे पापा कैसे नजरें मिलायेंगे दुनिया से?? के उनकी बेटी ने क्यों जान दी??
मेरे कंधे पर सिर रखकर वो सुबकने लगी।
मै उसके बाल सहलाता हुआ बोला–बस तुमसे दो वादों की भीख मांगता हूं, दोगी??
उसने मेरी तरफ देखा और भीगी आंखों से बोली- हुक्म दो। मैंनें कभी तुम्हारा कहा टाला है?? जान मांग लो तो एहसान होगा
मेरी आंखें भर आईं पर खुद को संभालता मैं बोला—1..शादी के बाद उस लडके में मुझे नहीं ढूंढोगी।
हर हाल में शादी की सारे फर्ज निभाओगी। अगर तुम्हारी शादी टूटी तो वो मेरी जिंदगी का आखिरी दिन होगा।
2..आज ये कंधा तुम्हारा है आज के बाद तुम्हारा नहीं होगा।
वो जोर-2 रोने लगी और कसकर मुझसे लिपट गई। मैंने उसे रोने दिया मैं जानता था के वो हर हाल में मेरी बात मानेगी उसका रोना इस बात का सुबूत था के वो मेरी मजबूरी और उसकी खुशी चाहने की मेरी इच्छा को समझ गई थी। मैं उसे कह तो गया ये सब पर लगा जान निकल गई। यही सोचकर कलेजा मुंह को आया के हम अब 1 नहीं रहेंगे। मैंने उसकी मां को बुलाया। बडी मुश्किल से मैंने उसे खुद से अलग किया। वो मुड-मुडकर मुझे देखती थी मानो कह रही हो कायर इस जन्म में पीछा छुडा गये पर अगले जन्म में ना छुडा पाओगे।
भाग्य की कैसी विडंबना थी, इश्क की त्रासदी और कैसी जौहर ज्वाला थी जिस रेस्टोरेंट से वो सच्ची मोहब्बत का फसाना शुरू हुआ था उसी रेस्टोरेंट में वक्त ने उस कहानी पर बेरहमी से पटाक्षेप लिख दिया।
और फिर रेस्टोरेंट में आंसूओं का सैलाब आ गया। उन आंसुओं ने मेरे प्यार को अमर कर दिया।

Moral
बहुत लोगों को लगेगा लडके ने प्यार खो दिया। पर यही प्यार है जो खुद pain झेल सकता है पर अपनों को रुसवा नहीं कर सकता। हो सकता है लोग इससे सहमत ना हों पर यही जिंदगी है। अपनो के लिये खुद की हसरतो को मार देना और दर्द झेलना। यही प्यार है, यही जिंदगी है।
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