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एहसास-a new short hindi inspiration story of doctors and their feelings

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एक १५ बर्ष के बच्चे को बेहद जरूरी ऑपरेशन के लिए अस्पताल लाया गया। डॉक्टर ऑपरेशन रूम की तरफ जल्दी से आगे बढ़ने लगे। उस बच्चे के पिता अत्यधिक घबराये से थे। उन्होंने डॉक्टर साहब से कहा -आपने आने में इतनी देरी क्यों कर दी ?मेरे बेटे की जान खतरे मई है। आप लोग इतने गैर -जिम्मेवार कैसे हो सकते हैं ?डॉक्टर ने कहा। प्लीज शांत हो जाइये ,जैसे ही मुझे फ़ोन आया ,मैंने यथासंभव अस्पताल पहुँचने की कोशिश की है। मुझे आपके बेटे का इलाज करने दीजिये। लड़के के पिता किंचित गुस्से भरे लहजे में कहा -‘क्या मेरे बेटे की जगह आपका बेटा होता और मौत से लड़ रहा होता तो आप शांत हो जाते ?डॉक्टर ने कहा -समझने की कोशिश कीजिये। हम किसी के जिंदगी को लंबा नहीं कर सकते। आप ईश्वर से अपने बेटे के लिए प्रार्थना कीजिये ,हम पूरी कोशिश करेंगे कि आपके बेटे को कुछ ना हो। लड़के के पिता ने मन ही मन कहा-दूसरों को उपदेश देना आसान है। जिस पर बिताती है वही दर्द को महसूस करता है। कुछ घंटों के अथक प्रयास के बाद ऑपरेशन थिएटर से डॉक्टर साहब बाहर निकले -भगवान् का शुक्र है कि अब आपका बेटा सुरक्षित है। अगर आपको कुछ भी पूछना हो तो कृपया नर्स से पूछ लीजियेगा।
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इतना कहकर डॉक्टर जल्दी से बाहर निकल गए। लड़के के पिता ने नर्स से कहा ,-कितना घमंडी डॉक्टर है सिस्टर ,क्या कुछ समय ठहर नहीं सकते थे ?’नर्स कुछ पल के लिए मौन हो गयी पर उसकी आँखों में आंसूं तैर रहे थे। उसने लड़के के पिता से कहा –‘ कल डॉक्टर साहब के बेटे का निधन हो गया था। हमने जब आपके बेटे के बारे में उन्हें फ़ोन किया तब वे अपने बेटे का अंतिम संस्कार को बीच में छोड़कर ऑपरेशन करने के लिए आये थे। अब वे अपने बेटे का अंतिम संस्कार करेंगे। ‘लड़के के पिता यह सुनकर स्तब्ध रह गए। हर व्यक्ति की अपनी दास्तान होती है -कुछ कही तो कुछ अनकही। हम उनकी परिस्तिथियों के बारे में नहीं जानते फिर उनके व्यवहार के बारे में निर्णय लेने का हमें कोई अधिकार नहीं है। यथार्थ से रु -बरु होने के बाद ही हक़ीक़त का पता चलता है और हमें बाद में पश्चाताप का एहसास होता है।

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