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प्रारब्ध-a new short hindi inspirational story of a hunter and a deer

a new short hindi inspirational story of a hunter and a deer

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एक समय की बात है एक शिकारी जंगल में शिकार करने गया। उसने एक हिरण को घास चरते देखा। शिकार बच ना पाए इसका वह पुख्ता इंतजाम करना चाहता था। उसने जंगल में एक तरफ से आग जला दी। दो तरफ से उसने जाल बिछा दिए और एक तरफ वह स्वयं तीर -धनुष लेकर खड़ा हो गया। शिकार का बचना नामुमकिन था। उसके पश्चात उसने अपने भूखे कुत्ते को उस असहाय हिरण के पीछे लगा दिया। हिरण बेतहासा इधर -उधर भागा जा रहा था। उसके प्राण संकट में थे। कुत्ता उसका पीछा कर रहा था। तभी एक दैवीय चमत्कार हुआ। जैसे ही शिकारी ने अपने धनुष से हिरण पर निशाना साधना चाहा कि उसके एक पैर एक जहरीले सांप पर पड़ गया। निशाना चूक गया। तीर कुत्ते के शरीर को बढ़ता निकल गया। बिषैले सांप के काटने से शिकारी की तक्षण मृत्यु हो गई। उधर उसका कुत्ता भी तीर लगने के कारण मर गया। हिरण जान बचाकर भाग निकला। इसी को कहते हैं ,’जाको राखे साईयाँ ,मार सके ना कोई ,बाल बांका भी ना हो सके जो जग बैरी होइ… इस संसार में हर मनुष्य अपने पूर्व जन्मों के शुभ अथवा अशुभ फलों से प्रभावित होते हैं।
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[२] समय लौट के नहीं आता। -महात्मा बुद्ध नित्य की भांति प्रवचन दे रहे थे। एक शिष्य को उनके प्रवचन में मन नहीं लग रहा था। उसने महात्मा बुद्ध से दस बर्षों के लिए घर जाने की इज़ाज़त मांगी। इज़ाज़त मिल गई। उस शिष्य ने कहा कि वह जरूर लौट कर आएगा और अपनी आध्यात्मिक पढ़ाई पूरा करेगा। वह घर की उलझनों में बुरी तरह फँस चुका था। बेटे-बेटियों की पढ़ाई। फिर उनकी शादी ,नाती पोतों का मोहजाल में इस कदर बंध गया कि उसे अपने वचन भी याद ना रहा। दस बर्षों के बाद महात्मा ने उसे अपने आश्रम पर बुलाया। उसने अपनी पत्नी के बीमारी का हवाला देकर कुछ और समय की मांग की। और इस तरह पारवारिक उलझनों में इस कदर उलझ गया की वह कभी आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त नहीं कर सका। हमारे जीवन में नैतिक मूल्यों कोबनाये रखने के लिए आध्यात्मिक ज्ञान का होना परम आवश्यक है। इसलिए प्राचीन समय में लोग अपने
बच्चों को गुरुकुल भेजा करते थे।

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