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साधू और वैश्या-a new short hindi inspirational story of sadhu and a vashya

a new short hindi inspirational story of sadhu and a vashya

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एक सिद्ध साधू घूमते-घूमते एक नगर में पहुंचे और एक पेड़ के नीचे धूनी लगा दी। सामने एक वैश्या का निवास था उसके घर पर लोगों का आना-जाना लगा रहता था। साधू का ध्यान उसी तरफ लगा रहता। जब भी कोई पुरुष उस वैश्या के घर जाता,साधु जी अपनी धूनी के बगल में एक छोटा सा पत्थर रख देते। कुछ ही दिनों में पत्थरों का ढेर लग गया। एक दिन जब वैश्या उस तरफ से गुजर रही थी,साधु ने बुलाया और कहा-पापिन,यह रहा तुम्हरे बुरे कर्मों का पहाड़। तु तो नरक भोगेगी। वैश्या भय से कापने लगी। उसने अपने उद्धार का मार्ग साधू से पूछा। साधू क्रोध की ज्वाला में जल रहा था,उसने उसे तुरत जाने को कहा और उस दिन उन्होंने उपवास कर प्रायश्चित किया। वैश्या उस दिन से अत्यंत दुखी रहने लगी। एक दिन उसके प्राण-पखेरू निकल गए। साधू का भी अंतकाल आ गया था।
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धर्मराज के यमदूत उन्हें लेने आये साधू ने पूछा -मुझे कहाँ लिए जा रहे हो?उसने कहा-आपको नरक ले जा रहें है वहीँ आपके कर्मो का हिसाब-किताब होगा। साधू ने कहा -तुम लोगों से बड़ी भूल हुई है। मैं तो बचपन से ही ईश्वर में लीन हूँ शायद तुम लोग वैश्या को लेने आये हो। दूत बोला -हमलोगों से कोई भूल नहीं हुई है। वैश्या तो कब की स्वर्ग पहुँच चुकी है। आपने तपस्या तो बहुत की है पर आपका ध्यान हमेशा वैश्या के घर की तरफ ही लगा रहता था। उसके पापों की गिनती करते-करते आप निरन्तर पाप-चिंतन तो ही किया करते थे। इसलिए आपको नरक के लिए ही प्रस्थान करना पडेगा .और आपके पाप-पुण्यों का निर्धारण यमराज करेंगे। और वे लोग साधू को अपने पाश में बाँध कर ले गए। दूसरों की बुराई नहीं देखना चाहिए। हमें अपने आप पर ध्यान देना चाहिए। अगर कोई बुरे कर्मों में लिप्त है भी तो उसे सन्मार्ग पर लाने का प्रयास करना चाहिए।

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