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तीन हँसते हुए संत-a new short hindi inspirational story of three saints

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अजीब बात है। एक समय तीन संत एक साथ रहा करते थेु उ नका कोई काम- धधा नहीं था ,वे केवल हँसते रहते थे। एक नगर से दूसरे नगर घूमते हुए ,रास्ते में हँसते रहते। भी बाज़ार -हाट के बीच खड़े हो जाते और एक साथ हंसना शुरू कर देते। अजीब पागलपन था। भीड़ इकट्ठी हो जाती। दुकाने बंद हो जाती क्योंकि सभी लोग उन हँसोड़ो को घेरे रहते। वे भूल जाते की उनका बाज़ार आने का प्रयोजन क्या था। वे तीनो देखने में भी सुन्दर थे। हँसते तो उनका पेट ऊपर- नीचे होता। यानि लगातार हिलता .खड़े लोग भी हंसना शुरू कर देते ,.लोग उत्सुक होकर हंसाने का कारण पूछते। वे कहते। हमारे पास काऱण बताने के लिए कोई शब्द नहीं है। प्रयोगं से भी अनभिज्ञ हैं हम तो सिर्फ हंसना जानते हैं। लोग जहां पैसे कमाने के लिए चिंतित रहते हैं ,अपनी परिवार की परवरिश में मिहनत करते रहते हैं -सर्वत्र लोभ ,धन का वातावरण कि एकाएक तीनो पागल वहां पहुँच जाते हैं और हंसना शुरू कर देते हैं। ना कोई ग्राहक और ना कोई बेचनेवाला कुछ पलों के लिए एक नयी दुनिया लोग विचरण करने लगते। हंसनेवालों में सभी तरह के लोग होते ,-लोभी,कंजूस ,ईर्ष्यालु ,क्रोधी .कुछ दिनों बाद उन तीनों हंसोड़ों में सीक की मृत्यु हो गई।
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लोग कहने लगे -बड़े हँसते थे ये लोग ,अब देखेंगे कैसे हँसते हैं अपने मृत्यु के बाद। शोक में रोयेंगे .पर यहां तो उलटा नज़ारा था। वे दोनों नाच रहे थे ,हंस रहे थे मानो कोई उत्सव मना रहे हों। लोग कहने लगे ,-कितने असभ्य और मू र्ख हैं ये दोनों ,भला किसी के मरने पर कोई हँसता और नाचता है भला. ?तभी एक ने कहा -हम तीनो कभी-कभी सोचा करते कि पहले कौन मरेगा। यह मरकर जीत गया तो भला गम क्यों मनाएं .हम किस चीज से इसे विदा करें हमें तो सिर्फ हंसना आता है। हमारे लिये वह मरा नहीं है। उसकी हंसी हमेशा हमारे साथ रहेगी। अगर जीवन शाश्वत है तो हंसना भी तो शाश्वत चीज है। जीवन का अस्तिव तो अविरल प्रवाह है। जीवन का कोई अंत नहीं होता। आत्मा अमर है बस एक के बाद एक नया जीवन शुरू होता है यानि पुनर्जन्म। अपने गम,उदासी को उत्सव के रूप में परिवर्तित कर दें फिर खुशियां हमारे द्वार पर होंगी।

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