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चालीस भाइओं की पहाड़ी-a new short hindi motivational story of forty brothers’ fight

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चालीस भाइओं की पहाड़ी-रस्किन बॉन्ड-कुछ बर्ष पूर्व कश्मीर की ऊँची पहाड़ियों पर टूस नाम का किसान रहता था। उसके पास बहुत सारी भेंड़े ,और मवेशी थे ,फिर भी पति -पत्नी बहुत दुखी थे। क्योंकि उनकी कोई संतान नहीं था। उनकी प्राथनाएं निष्फल हो रही थी क्योंकि उनकी इच्छा अधूरी थी। एक दिन की बात है एक पीर उस रास्ते से गुजर रहे थे। वे जब टूस के टेंट के पास से गुजर रहे थे तो उन्होंने आवाज़ लगाई -,’मेरे पास ना गोश्त है ,ना ही रोटी का टुकड़ा अपनी खैरात मुझे दे दे। टूस ने जवाब दिया -‘मैं अपनी जिंदगी के हर दिन दयावान रहा हूँ लेकिन आज तक मुझे एक बेटे का वरदान तक नहीं मिला है। इसलिए मैं तुम्हे कुछ नहीं दूंगा। ”जिसे जन्नत ने मना कर दिया ,उसे भला कौन मंजूर कर सकता है। ?पीर दूसरे टेंट की तरफ बढ़ चला। पीर का युवा शिष्य के पास उस दुखी दम्पति को संतुष्ट करने की शक्ति थी लिहाज़ा उसने चालीस कंकड़ इक्कठे किये और टूस की पत्नी की गोद में रख दिए। जाते -जाते उसने उनलोगों को आशीर्वाद भी दिया। निर्धारित समय पर उस स्त्री ने एक ही समय चालीस बेटों को जन्म दिया। .टूस फिर चिंतित हुआ क्योंकि उसे मालूम था की वह इतने बच्चों को एक साथ नहीं पाल सकेगा। उसने अपनी पत्नी से कहा -हमलोग अब एक ही उपाय कर सकते हैं कि अपने पसंद की एक लड़के को रख ले और बांकी को जंगल ले जाकर छोड़ दें।
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उन्होंने ऐसा ही किया। उनचालीस बच्चों को जंगल के भेड़ियों के रहमो करम पर छोड़ दिया। एक दिन एक गड़ेरिओं को जो अपनी भेड़ों को चारा रहा था ,एक बंद कंदरा को देखा। वहाँ उसने देखा कि बहुत सारे बच्चे जंगली ट्युलिपों के बीच खेल रहे थे। गड़ेरिआ लड़का डर गया -आखिर इस निर्जन इलाके में इतने बच्चे आये कैसे ?बात फैल गई। टूस के कानो में भी यह बात पड़ी ,वह समझ गया कि वे बच्चे उसके अपने थे। वह उस पहाड़ी की तरफ दौड़ा जहां वे बच्चे खेल रहे थे। टूस को देखते ही वे गुफा में छुप गए. उसकी पत्नी जो अपने बच्चे के विरह वेदना से पीड़ित थी ,ने एक पीर से संपर्क किया। पीर ने कहा -‘उसके भाई को वहाँ ले जाओ ,वहाँ उसे उतार देना और खुद छुप जाना। वे लोग बाहर निकल आये और उस बच्चे के पीछे -पीछे आकर अपनी माँ के पास आ गए। टूस का तो मानो ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं था। गाँव में भोजन और संगीत का इंतजाम हुआ और गरीबों के बीच उपहार बांटा गया। उसने सभी चालीस बच्चों को नमाज़ अदा करना तथा पवित्र किताबें पढ़ना सिखाया। देवदूत अजराइल के फरमान के मुताबिक़ सारे चालीस बच्चे एक ही दिन मर गए। पुरे गाँव में मातम छा गया। सभी मृत चालीस भाइयों को उस पहाड़ी पर ले जाया गया ,जहां वे पाए गए थे ,कहते हैं ,आज भी रहस्य्मय पर्वत पर बच्चे घूमते हैं जिसे कुह -चेहल -तान यानी चालीस भाइयों के नाम से जाना जाता है।

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