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जरासंध-a new short hindi motivational story of Jarasandh Elephant

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जरासंध एक महारथी राजा था। वह मगध [वर्तमान बिहार]का राजा था। वह अन्य राजाओं को परास्त कर अपने पहाड़ी किले में बंदी बना लेता था। वह बहुत क्रूर था। चक्रवर्ती राजा बनने की चाहत में राजाओं का वध कर दिया करता था। भीम ने १३ दिनों तक कुस्ती लड़ने के बाद उसे हराकर वध किया था। वह मथुरा के राजा कंस का स्वसुर था। उसके दोनों पुत्रियां ासित और प्रापित से विवाह किया था। उसने भगवान् श्रीकृष्ण से प्रतिशोध लेने के लिए मथुरा पर १७ बार आक्रमण किया था। पर असफल रहा। शिशुपाल उसका सेनापति था। जरासंध भगवान् भोलेनाथ का परम भक्त था. उसका जन्म कथा भी बेहद रोचक है। मगध देश के राजा बृहद्रथ की दो पत्नियाँ थी मगर कोई संतान नहीं था ,राजा महात्मा चंडकौशिक के पास गए और अपनी सेवा से उन्हें संतुस्ट किया। महात्मा ने एक फल दिया और कहा कि उस फल को आधा -आधा काटकर दोनों पत्नियों को खिला देना। राजा ने वैसा ही किया। समय आने पर दोनों रानियों ने शिशु शरीर का एक-एक टुकड़ा पैदा किया। जब रानियों ने अपूर्ण शिशु को देखा तो वे डर गई और जीवित टुकड़ों को बाहर फ़ेंक दिया।
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उसी समय उधर से एक दानवी गुजर रही थी। उसने अपनी आसुरी माया शक्ति से दोनों टुकड़ों को जोड़ दिया। शिशु एक हो गया। एक शरीर होते ही शिशु जोर -जोर से रोने लगा। शिशु की रोने की आवाज़ सुनकर दोनों रानियां बाहर निकली और उसे गोद ले लिया। उसी समय राजा भी वहाँ आ गए। दानवी ने राजा को सारी बातें सच -सच बता दी। राजा बहुत खुश हुए और उस बालक का नाम जरासंध रख दिया। ज़रा नाम की दानवी ने संधित किया था। भगवान् श्रीकृष्ण के योजनानुसार भीम और अर्जुन ब्राह्मण वेश में जरासंध को कुश्ती के लिए ललकारा। १३ दिनों तक भीम से कुश्ती लगातार चलता रहा। १४ वे दिन भगवान् श्रीकृष्ण के इशारा पर भीम ने जरासंध के शरीर के दो टुकड़े कर दिए। सभी वन्दी राजा रिहा किये गए। भगवान् श्रीकृष्ण ने जरासंध के पुत्र सहदेव को अभयदान देकर मगध का राजा बना दिया।

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