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हस्तरेखा-a new short hindi story of King Vasusena and Farmers

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राजा वसुसेना की शृद्धा ज्योतिष पर बहुत गहरी थी। राज़ ज्योतिषों ने ज्योतिष ऐसा मुलम्मा चढ़ाया था कि वे मुहर्त के कोई काम ही नहीं नहीं करते थे। शत्रु राजा को जब इस बात का पता चला तब वे लोग घात लगा बैठे कि ऐसे मुहूर्त में हमला करें जिसमे प्रतिकार का मुहूर्त बने और राजा को परास्त किया जा सके। संयोगवश राजा एक बार दौरे पर निकले। रास्ते में एक किसान मिला जो हल -बैल के साथ खेत की जुताई करने जा रहा था। साथ में राज़ ज्योतिष भी थे। उन्होंने किसान को रोककर कहा -मुर्ख ,जानता नहीं आज तुम जिस दिशा में दीर्घशुक्ल है ,उसी में चला जा रहा है। तुम्हे भयंकर हानि उठानी पड़ेगी। किसान ने कहा -मैं तो प्रतिदिन इसी दिशा में जाता हूँ। उसमे दिशाशूल के दिन भी होते होंगे। यदि आपके बातों में डैम होता तो मेरा तो कब का र्सर्वनाश हो गया होता। ज्योतिष महराज झेंप गए ,बोले ,’दिखा तो अपना हाथ ‘किसान ने हाथ तो बढ़ा दी पर हथेली नीचे की ओर राखी। जोतीतीष ने चिढ़कर कहा -इतना भी नहीं जानता कि हाथ दिखाने के लिए हथेली ऊपर की ओर रखना पड़ता है। ?’किसान मुस्कराया ,,कहा -‘हथेली वो फैलाये जिसे कुछ मांगना हो ,मैं तो हाथों की कमाई से अपना जीवन यापन करता हूँ।
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फिर मैं दूसरों के आगे क्यों हाथ पसारुं। मुहूर्त तो वो लोग देखते हैं जो कर्महीन और निठल्ला हैं। मेरे लिए तो सब दिन पवित्र है। यह सुनकर महाराज वसुसेना को सद्बुद्धि आ गयी। और उन्होंने हर कार्य से आत्मिक सम्बन्ध बना लिया तथा सुबह मुहूर्त देखने की परम्परा को हमेशा के लिए छोड़ दिया। हँसिकाएँ –पति और पत्नी का रिश्ता बिलकुल साइकोलॉजिकल होता है। सिर्फ ये नहीं पता चलता है कि साइको कौन है और लॉजिकल कौन है।

// विज्ञान कहता है कि सिर्फ मादा मच्छर ही खून चूस सकते हैं। नर मच्छर तो केवल आवाज़ कर सकते हैं। धन्य हो प्रभु ,आपका सिस्टम हर जगह सेम टू सेम ///

कम्बख्त-गम जुदाई सब गया,अच्छे-अच्छों को माफ़ कर गया
मैंने सोचा दिल पर रख रहा है हाथ
कम्बख्त जेब साफ़ कर गया [अरुण मित्तल की कविता ]

गगरी भरे लहू पीया,मटकत -मटकत जाये
पंख फड़फड़ाये जोर से,निज तन ना उठत हाय [मच्छर -तफ़रीष ऋतुपर्ण के सौजन्य से ]

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