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जंगली बूटी-a new short inspirational story in hindi language of amrita pritam

a new short inspirational story in hindi language of amrita pritam

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अमृता प्रीतम-अंगूरी,उनके पुराने नौकर की दूसरी बीबी है। यानी उसका पति ‘दुहाजू’ हुआ। पांच-छह साल पहले प्रभाती अपनी पहली पत्नी की किरिया करने के लिए गाँव गया था। अंगूरी के बाप ने उसका अंगोछा निचोड़ दिया था। जैसे वह कह रहा हो-‘उस मरनेवाली की जगह मैं तुम्हे अपनी बेटी देता हूँ,क्योंकि तुम्हारे आंसूं से भींगे अंगोछे को मैंने सूखा दिया है।’प्रभाती की पत्नी अंगूरी शहर आ गई। उसके पैरों चांदी की झाँझरें की छनक-छनक की आवाज़ मोहल्ले की रौनक बन गई थी। वह अपने चांदी के गहने एक नखरे से पहनती थी और एक नखरे से दिखाती भी थी। छोटी सी कोठरी में उसका दम घुटने लगा था/’क्या पढ़ती हो बीबीजी उसने पूछा–‘तुम पढ़ोगी? नहीं,औरतों को पाप लगता है पढ़ने से ”मर्द को नहीं लगता ?’नहीं ‘ अंगूरी को बचपन से यही सिखाया गया था। गहरा सावळां रंग-कहते हैं औरत आंटे की लोई के समान होती है। प्रभाती तो इस घनी गुंथी लोई की ढककर कठवत है। यह कुछ अजीब सा तुलना करना था। ‘अंगूरी,तुम्हारे गाँव में शादी कैसे होती है ?”लड़की छोटी सी होती है,पांच-सात साल की,वह किसी की पाँव पूज लेती है। .लड़की का बाप जाता है,फूलों का एक थाली ले जाता है ,साथ में कुछ रुपये ,लड़के के आगे रख देता है। ‘लडकियां तो अपने होने वाली पति को देखती तक नहीं।
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लडकियां प्रेम भी करती हैं ?’कोई -कोई ‘ उन्हें पाप नहीं लगता ?”पाप लगता है,अंगूरी ने बड़े भोलेपन से कहा। अगर पाप लगता है तो वे प्रेम क्यों करती हैं?”जे तो ,एक जंगली बूटी होती है बस उसे पान में डालकर या मिठाई में डालकर खिला देता है ,छोकरी उससे प्रेम करने लगती है। तूने जंगली बूटी देखी है ?’नहीं ,वे छिपाकर डालते हैं। ‘जो कोई जड़ी -बूटी खा लेती है ,बहुत हंसती है। रोती भी बहुत है। एक दिन उसने कहा -बीबीजी ,मुझे पढ़ना सीखा दो ‘ क्या हुआ अंगूरी ?’उसके चेहरे को पढ़ना इतना आसान नहीं था। ‘छंद की लय ,छंद का आशय ,छंद का सोलह श्रृंगार ,तुम हो ,अर्पित तुम्हे है रस -छंद उदगार -सृजनकार की संधार ,तुम हो ‘

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