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लॉकडाउन-A new short inspirational story of lockdown from Mahabharata

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लॉकडाउन -कथा है कि कुरुक्षेत्र के युद्ध के लिए युद्धक्षेत्र को तैयार किया जा रहा था। हाथियों का इस्तेमाल पेड़ों को उखाड़ने के लिए किया जा रहा था। एक पेड़ पर गौरेया अपने चार बच्चों के साथ रहती थी। जब उस पद को उखाड़ा जा रहा था तब घोंसला जमीं पर आ गिरा। लेकिन चमत्कार ही था की उसके बच्चे बच गए। बच्चे अभी उड़ने से असमर्थ थे सो भयभीत गौरिया मदद के लिए इधर -उधर कातर दृष्टि से देखने लगी। तभी वहाँ कृष्ण अर्जुन के साथ आ पहुंचे। वे युद्ध के मैदान में युद्ध जीतने के रणनीति के तहत वहाँ पहुंचे थे। गौरेया ने पंख फड़फड़ाये और भगवान् कृष्ण से कहा -‘हे कृष्ण ,-‘मेरे बच्चों को बचाएं। कल युद्ध होनेवाला है मेरे बच्चे कुचले जाएंगे। सर्वब्यापी भगवान् ने कहा -‘तुम्हारी बात मैं सुन रहा हूँ किन्तु मैं प्रकृति के कानून में हस्तक्षेप नहीं कर सकता। गौरेया ने कहा ,’हे भगवान ,आप उद्धारकर्ता हैं मैं अपने बच्चों के भाग्य आपके हाथों सौंपती हूँ ,’यह तो आपके ऊपर है कि आप उसे मारते हैं या बचाते हैं। ‘कालचक्र पर किसी का बस नहीं है। गौरैया ने कहा -‘प्रभु आप क्या और कैसे करते हैं यह तो मैं नहीं जान सकती आप तो स्वयं काल के नियंता हैं मैं अपने परिवार के साथ श्रद्धा के साथ समर्पण करती हूँ। कृष्ण ने कहा। -‘अपने घोंसले में तीन सप्ताह के लिए भोजन का संग्रह करो। इन बातों से अनभिज्ञ अर्जुन गौरैया को दूर भगाने का प्रयास करते हैं। दो दिनों बाद शंख के उद्घोष से युद्ध शुरू करने की घोषणा की गई। कृष्ण ने अर्जुन से अपना धनुष ,बाण की मांग की।
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धनुर्धर अर्जुन ने कहा कि मुझे आज्ञा दे भगवान् .पर कृष्ण ने अर्जुन से धनुष लेकर एक हाथी को निशाना बनाया। तीर हाथी के गले में लटके एक बड़ी घंटी से टकराया और एक चिंगारी उडी। कृष्ण ने अर्जुन के तीर धनुष वापस कर दिए। पर केशव ,आपने हाथी को तीर क्यों मारा ? -अर्जुन ने विस्मय से पूछा। क्योंकि इस हाथी ने एक पेड़ जिसपर गौरैया का घोंसला था ,उसे गिरा दिया था। हाथी की तो केवळ घंटी ही टूटी है। युद्ध शुरू हुआ। १८ दिनों में असंख्य जाने गयी। जुंग का मैदान असंख्य लाशों से अटी पड़ी थी। कृष्ण रुके और अर्जुन से कहा ,-क्या आप मेरे लिए यह घंटी उठाएंगे ?’और इसे एक तरफ रख देंगे। अर्जुन ने प्रश्नवाचक निगाहों से प्रभु की तरफ देखा। अर्जुन ,यह वही घंटी है जो हाथी को तीर मरने से टूटकर गिरा था। अर्जुन ने आज्ञा का पालन किया। उन्होंने जैसे घंटी उठाया ,चार युवा पक्षी और मादा गौरैया बड़ी आनंद से उड़ते हुए उनकी परिकर्मा करने लगे। १८ दिनों तक इसी घंटी ने उन पक्षियों की प्राण रक्षा की थी। मुझे माफ़ करे हे कृष्ण ,मैं तो भूल ही गया था कि आप कौन हैं ?’आपको मानव शरीर में देखकर पहचानने में भूल हो गयी। घर में रहें ,सुरक्षित रहें सदैव खुश रहें।

और चलते चलते
ताउम्र बात तो दिल की होती रही
अब पता चला कि जिंदगी के लिए कमबख्त फेफड़ें बेशकीमती हैं
एक मित्र ने दूसरे मित्र से पूछा -तुम्हारी पत्नी को अगर भूत पकड़ ले तो तुम क्या करोगे ?
कुछ नहीं,गलती तो भूत ने की अब वही इसका फल भी वही भुगते

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