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साधना-a new short motivational story from Mahabharata of kaushik brahman

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महाभारत की एक कहानी है। कौशिक नाम का एक ब्राह्मण था। वह साधना के लिए पास के वनो में जाया करता था। सतत अभ्यास से उसे कुछ -कुछ सिद्धियाँ प्राप्त होने लगी। परन्तु शुरुवाती दौर था इसलिए कौशिक को इसका ज्ञान नहीं था। एक दिन की बात है कौशिक किसी पेड़ के निचे साधना में लीन थे तभी एक बगुली पेड़ पर आकर बैठी और कौशिक पर बीट कर दिया। कौशिक ने कुपित दृष्टि से ऊपर की तरफ देखा और पक्षी भष्म होकर नीचे गिर पड़ा। अपनी साधना के प्रभाव को देखकर कौशिक अचंभित हुए और प्रसन्न भी। थोड़ी देर बाद वे भिक्षाटन पर निकल पड़े। जिस घर पर वे भिक्षाटन के लिए रुके उस घर की स्त्री व्यस्त थी। वह अपने पति को प्रेम से भोजन परोस रही थी। कौशिक को बहुत प्रतीक्षा करनी पड़ी गृहणी आयी तो वे उसे क्रुद्ध दृस्टि से देखने लगे। स्त्री मुस्कराई और बोली ,-हे ब्राह्मणश्रेष्ट ,मैं कोई बगुली नहीं हूँ जो आपकी क्रोध दृस्टि से भस्म हो जाऊं कौशिक को यह सुनकर सदमा लगा। उनकी साधना का असर एक साधारण गृहणी पर नहीं नहीं पड़ा और इधर गृहणी को घर बैठे यह कैसे पता चल गया कि बगुली भस्म होकर गिर पड़ी थी। यह सिद्धि घर बैठे उसे कैसे मिल गयाअपनी भूल पर कौशिक ने तुरंत हाथ जोड़े। उस स्त्री को यह सिद्धि सिर्फ पतिव्रत धर्म पालन करने से प्राप्त हुआ था। ?गृहणी ने मिथिलांचल में रहनेवाले गुरु का पता बता दिया। थोड़ी पूछताछ करने पर धरम-व्याध के घर का रास्ता बता दिया। कौशिक वहाँ पहुंचे तो उन्होंने देखा कि धर्म -व्याध तो ग्राहकों को मांस बेचने में व्यस्त हैं। थोड़ी देर बाद वे कौशिक को लेकर घर पहुंचे। उनकी बातचीत को ‘व्याध -गीता के नाम से भी जाना जाता है। धर्म -व्याध अपने बूढ़े माता -पिता की सेवा करते थे और उन्हें इसी सेवा के कारण ज्ञान प्राप्त हुआ था जो उसने कौशिक को दी।
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[२]सज़ा -एक बार अकबर के राज्य में तीन चोर एक ही रात में चोरी करते पकडे गए। दरबार में तीनो की पेशी हुयी। अकबर ने पूछा -क्यों जी यह सब करते लज़्ज़ा नहीं आती ? पहले अपराधी को यह कहकर छोड़ दिया गया। दूसरा अपराधी लाया गया। बादशाह ने उसे दस कोड़े लगवाए। फिर उसे छोड़ दिया गया। तीसरा अपराधी लाया गया। बादशाह ने कहा -इसका सिर मुंडन कराओ चुने से पोतो और गधे पर बिठाकर पुरे नगर में घुमाओ। वैसा ही किया गया। बीरबल ने पूछा -तीनो ने एक समान अपराध किये फिर सज़ा अलग -अलग तरह के क्यों ? बादशाह ने कहा। खुद अभी जांच कर ले कि तीनो अभी क्या कर रहे हैं> खुपिया सिपाही ने बताया कि पहला अपराधी जिसे बिना सज़ा का छोड़ा गया था उसने आत्महत्या कर ली है। दूसरा घर में बंद होकर रो रहा है। और तीसरा नुक्कड़ पर पान खा कर ठहाके लगा रहा है। कहता है ,फिर चोरी करनी है इस राज्य में कोई सज़ा नहीं मिलती।

और चलते चलते —

पेशेंट डॉक्टर साहब से –कोई अच्छी दवाई बताइये वायरस से बचने के लिए

डॉक्टर साहब फेबिकोल लिख दे रहा हूँ। पीछे लगा के घर में शान्ति से बैठिये।

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