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गजब का दिन-a new short motivational story in hindi language about a strange day

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गजब का दिन -स्वेतलाना इतनी बातूनी थी कि वह बिना ढेर साड़ी बताये किसी को छोड़ती नहीं थी। वह बड़ी -बड़ी गप्पे हांका करती। कभी किसी के घर तो कभी किसी के घर। स्त्रियाँ उसकी बातों को सुनकर खूब आनंदित होती। वह अपने घर की निजी बातें भी बता देती. उसका पति मिनाज उसकी इस आदत से बहुत परेशान रहा करता था। माना करने पर भी वह नहीं मानती। बात करने के चक्कर में खाना भी समय पर नहीं बनाती। एक बार मिनाज को खेतों में हल चलाते वक़्त कोई धातु की चीज़ टकराने की आवाज़ सुनी। हल्का अन्धेरा होने पर ,कोई देख ना ले इस सतर्कता से उसने वहाँ खोदना शुरू किया। उसे हीरे -मोती सोने के आभूषण का खज़ाना मिला। यह सब एक स्वर्ण कलश में रखा था। पर मिनाज को ख़याल आया कि अगर वह खज़ाना घर ले गया तो उसकी पत्नी ढिंढोरा पिट देगी और खज़ाना राजा के पास चला जाएगा। उसने ख़ज़ाने को जंगल में दबा दिया। घर आकर उसने स्वेतलाना से पूरियां बनाने को कहा। वह पूरियां उठाता और एक पूरी खाकर बांकी पुरियों को थैले में डाल लेता। जब थैली पुरियों से भर गई तब स्वेतलाना ने खुशखबरी सुनाने को कहा। उसने कहा कि आज राजा के बेटे की शादी है। मैं जगमग देखकर थोड़ीदेर में लौटता हूँ। वह बाज़ार जाकर ढेर साड़ी मछलियां और जलेबियाँ खरीदी और घर आकर अपनी पत्नी को सारी बातें बता दी। उसने जल्दी साथ चलने को कहा ताकि क्गजाने को घर लाया जा सके। जब वे जंगल से होकर गुजर रहे थे तभी स्वेतलाना का सिर किसी चीज़ से टकराया। वह मिनाज से बोली ,सुनते हो जी ,यहां पेड़ पर जलेबी लटकी थी जो मेरे हाथ आ गई है। ‘हाँ यहां जलेबियों के पेड हैं। उसने देखा सभी पेड़ों पर जलेबियाँ उगी हैं। वाह आज तो गजब का दिन है -स्वेतलाना ने कहा। कुछ ही दूर बाद जंगल में जगह -जगह मछलियां बिखरी पड़ी मिली।
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मिनाज ने कहा-‘लगता है आज मछलियों की बारिश हुई है। यह तो गजब होगया .आज तक तो मछलियों की बारिश के बारे में नहीं सूना ,स्वेतलाना ने विस्मय से कहा। थोड़ा आगे जाने पर झाड़ में पूरियां तंगी मिली। झाड़ पर पूड़ियाँ जंगल में भी अनोखे पेड़ होते हैं -स्वेतलाना ने कहा। पास में ही मिनाज ने तालाब में से एक जाल को उठाया उसमे खरगोश निकला। क्या जंगल में खरगोश भी पानी में रहते हैं ? स्वेतलाना ने हैरत भरे अंदाज़ में पूछा। अब मिनाज ने उसे छिपा खज़ाना दिखाया। वे ख़ज़ाने को लेकरघर पहुंचे। सुबह होते ही मिनाज ने देखा कि घर के बाहर लोगों की भीड़ लगी है। लोग ख़ज़ाने को देखने आये थे। स्वेतलाना ने सुबह ही सारे गाँव में बात फैला दी थी की उन्हें बड़ा खज़ाना मिला है। मिनाज ने कहा कि लगता हैकि मेरी पत्नी को सपने में खज़ाना मिला है। राजा को यह बात मालूम हुई। उससे ख़ज़ाने के बारे में पूछा गया। उसने अपने गप्पी पत्नी के बारे में राजा से बताया। राजा ने उसकी पत्नी को बुलावा भेजा। राजा के पूछने पर उनके बेटे की शादी के बारे में बताया। राजा का बेटा अभी चार बर्ष का था। शादी की बातें झूठी निकली। फिर उसने जलेबियों के पेड़ ,मछलियों की बारिश झाड़ में पुरियों का फलना के बारे में राजा से कहा। पानी में रहनेवाले ख़रगोश के बारे में भी बताया। राजा ने कहा ,-लगता है यह एक पागल औरत है। राजा के सैनिकों ने स्वेतलाना को बाहर निकाल दिया। अगले दिन राजा के दो सैनिक आये और स्वेतलाना से घर में रखे ख़ज़ाने के बारे में पूछा। स्वेतलाना वहाँ गई जहां खज़ाना रखा था। पर वहाँ कोई खज़ाना नहीं मिला। राजा के सिपाही लौट गए। मिनाज के चतुराई से उसका खज़ाना बच गया। वे दोनों सुखीपुर्वक रहने लगे। स्वेतलाना ने गप्प मरना और ज्यादे बात करना छोड़ दिया।

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