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मन्त्र-a new short motivational story in hindi language about friendship

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एक समय की बात है तीन मित्र एक गुरु के पास मन्त्र लेने पहुंचे। उन्होंने पहले तो गुरूजी को प्रणाम किया फिर अपनी जिज्ञासा से अवगत कराया। महात्मा ने तीनो से गुरु मन्त्र तथा शिष्य बनाने के पूर्व परीक्षा लेनी चाही .उन्होंने एक प्रश्न पूछा -,’बताओ कान और आँख में कितना अंतर है ?’एक ने जवाब दिया ,-‘गुरुवार केवल पांच अंगुल का। ‘दूसरे ने कहा -‘गुरूजी ,आँख देखने का का काम करती है और कान सुनने में काम आता है। ‘देखा जाये तो आँख का महत्व कान से अधिक है। ‘महात्मा ने उन दोनों को एक तरफ खड़ा कर दिया। अब तीसरे की बारी थी। उसने कहा -‘कान का महत्व आँख से अधिक है। क्योंकि आँख तो केवल लौकिक और दृश्यमान जगत को ही देख पाता है। किन्तु कान को पारलौकिक संसार का ज्ञान प्राप्त करने का सौभाग्य प्राप्त है। अतः कान का महत्व आँख से कई गुना अधिक माना जा सकता है। महात्मा ने तीसरे को रोकते हुए उन दोनों को जाने को कहा। और अपनी विचार शक्ति को बढ़ाने को कहा।
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[२] फल -एक बार कुछ लोग एक सांप को मिलकर मार रहे थे। उसी रास्ते से संत एकनाथ गुजर रहे थे . उन्होंने लोगों से कहा -‘भाईओं ,इस बेचारे प्राणी को क्यों मार रहे हो ?’कर्मवश यह सांप योनि में है। परन्तु यह भी तो एक आत्मा है। एक युवान ने यह सुनकर कहा -‘यदि यह आत्मा है तो फिर काटता क्यों है ?’एकनाथ ने कहा -‘तुमलोग बेवज़ह मारोगे ,तो वह काटेगा ही। लोगों का संत में काफी सम्मान था लिहाज़ा उस सांप को ज़िंदा छोड़ दिया गया। कुछ दिनों के बाद एकनाथ शाम के वक़्त स्नान हेतु घाट पर जा रहे थे रास्ते में बीच सड़क पर एक सांप पहन फैलाये बैठा था। लाख कोशिश के बाद भी वह सांप रास्ते के बीच बैठा ही रहा टस से मस नहीं हुआ। संत मज़बूरन दूसरे घाट पर स्नान करने चले गए। जब वे लौट रहे थे तो देखा कि बारिश के कारण एक गहरा गड्ढ़ा हो गया है। अगर सांप ने रास्ता ना रोका होता तो संत एकनाथ उस गड्ढे में कब के समा गए होते। और चलते चलते –बात करने के तरीके -‘ईश्वर से-‘दोनों हाथ जोड़ के ‘-गुरु से -नज़र झुका के। /माँ से -खुलकर /पिता से -आदरपूर्वक /भाई से -दिल खोलकर / बहन से-प्यार से /बच्चों से -लाड -दुलार से /दोस्तों से -हंसी -मज़ाक से /और पत्नी से ?भाईओं, पत्नी से बात करने के तरीके की खोज जारी है। कोरोना की वैक्सीन की तरह जबतक पक्की दवा नहीं मिलती तब तक मुंह बंद करके हाँ में हाँ और ना में ना मिलाते रहे जैसा चल रहा है ,चलने दे। रिस्क कदापि ना ले -मस्त रहें ,स्वस्थ रहें।

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