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तोहफा-a new short motivational story of king krishan dev rai ji

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वजह -करना संक्रमण काल। इटली का एक ९३ बर्षीय बूढ़ा व्यक्ति ठीक हुआ और जब वह अस्पताल से डिस्चार्ज होने लगा तब अस्पताल के स्टाफ ने एक दिन वेंटिलेटर इस्तेमाल करने का बिल यूरो उसके हाथों में थमा दिया। बूढ़ा व्यक्ति जोर -जोर से रोने लगा। उसे रट देख डॉक्टर ने कहा -‘आप प्लीज मत रोईए ,यदि आप यह बिल नहीं भर सकते तो जाने दीजिए। बूढ़े ब्यक्ति ने जो कहा उसे सुनकर सारा स्टाफ रोने लगा। उसने कहा कि मैं बिल के रकम पर नहीं रो रहा हूँ ना ही मैं इसे चुकाने में असमर्थ हूँ मई यह बिल भर सकता हूँ। मैं तो इसलिए रो रहा हूँ कि मैं ९३ साल से साँसे ले रहा हूँ पर मैंने कभी पेमेंट नहीं की। जब एक दिन सांस लेने की कीमत ५०० यूरो है तब आपको पता है कि मुझे परमेश्वर को कितनी रकम चुकानी है ? इसके लिए तो मैंने परमेश्वर का कभी धन्यवाद तक नहीं दिया। परमेश्वर द्वारा बनाया हुआ यह संसार। यह शरीर ,ये साँसे अनमोल है जिसका पेमेंट हम उनकी स्तुति ,और उपासना कर कर सकते हैं।
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तोहफा -एक समय की बात है राजा कृष्णदेव रॉय अपने दरबारियों से कहा ,-‘नया साल प्रारम्भ होने वाला है इसलिए मेरी इच्छा है कि राज्य की जनता को भेंट दी जाए। आप लोग बताइये जनता के लिए सबसे बढियाँ तोहफा क्या हो सकता है ?’दरबारीगण सोच में पड़ गए। तभी एक मंत्री ने कहा ,;महाराज ,पुरे देश के संगीतकार ,नाटक मंडलियों ,और कलाकारों को बुलाया जाये यही नगर के जनता के लिए उत्तम तोहफा होगा। राजा को यह सुझाव बहुत पसंद आया। राजा ने इस आयोजन पर खर्च के बारे में पूछा। मंत्री ने कहा -‘कुछ ख़ास नहीं बस यही लगभग बीस लाख स्वर्ण मुद्राएं। ‘राजा ने कहा ,’इतना अधिक खर्च “मंत्री ने कहा ,;-खाने -पिने पर तो खर्च करना ही पडेगा। कई रंगशालाएँ बनानी पड़ेंगी पुरे शहर को सजाना पडेगा। राजा ने तेनालीराम से राय मांगी। उन्होंने कहा ,-‘महाराज ,उतसव राजधानी में नहीं होना चाहिए। क्योंकि राज्य की जनता इसमें शामिल नहीं हो सकेगी। अच्छा होगा कि कलाकारों को जनता के बीच जाकर अपनी प्रस्तुति देना चाहिए ताकि मनोरंजन के साथ लोगों को अपनी संस्कृति से जुड़ने का अवसर मिलेगा। राजा को यह प्रस्ताव जाँच गया। उन्होंने कहा की कलाकारों के आने जाने ,और पारिश्रमिक का खर्च हम करेंगे ,खाने -पीने का खर्च वहाँ की जनता कर देगी। यह उत्सव मेला कहा जाएगा। दरबारियों का मुंह लटक गया क्योंकि उन्हें घोटाला करने का मौक़ा हाथ से छीन गया। उत्सव बड़े ही धूमधाम से हुआ। तेनालीराम के सूझ्भूझ का कोई जवाब नहीं।

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