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बिषाद-a new short motivational story of russian writer Anton Chekhov

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बिषाद – अंतोन चेखव -चारों तरफ शाम का धुन्धलका फैला हुआ था। स्ट्रीट लाइट में हलकी रौशनी में बर्फ के मोठे -मोठे फाहे चमक रहे थे।ेइओना का बदन सले पर बैठे -बैठे अकड़ गया था। फिर भी वह अपनी जगह पर बैठा था। वह किसी सवारी का इंतज़ार कर रहा था। उसकी घोड़ी भी बर्फ से ढँक चुकी थी। वह और उसकी घोड़ी काफी देर से एक ही जगह खड़े थे। तभी एक आवाज़ सुनाई दी ,-‘ऐ स्लेज़वाले ,बीबर्ग चलोगे >?’ सामने एक फौजी अफसर पूछ रहा था। उसकी घोड़ी हिनहींना आई , फौजी अफसर स्लेज़ पर बैठ गया। वह चाबुक फटकारते हुए आगे बढ़ने लगा। तभी अँधेरे में कोई राहगीर चीख पड़ा ,-‘हमपर ही चढ़े आ रहे हो ,दिखाई नहीं देता क्या ?’ सवारी ने भी अपनी नाराज़गी दिखाई। सवारी इवोना की बेचैनी देखकर पूछता है ,-‘क्या बात है ? ‘ ‘मेरा इकलौता बेटा इस हप्ते गुजर गया साहब ‘ अरे ,कैसे हो गया ,क्या हुआ था उसे ?’ उसने कहा ,-‘उसे बहुत तेज़ बुखार आया था। वह तीन दिन तक अस्पताल में पड़ा रहा फिर हमें छोड़कर हमेशा के लिए चला गया। अचानक कोई चिल्लाया ,-‘अरे ,कुत्ते ,अंधा है क्या ?आँखे है या बटन ,शैतान की औलाद।
इओना ने तेजी से घोड़ी को चाबुक मारा। क्योंकि सवारी ने उसे तेज़ चलाने को कहा। अफसर को बीबर्ग पहुंचाकर उसने अपनी सले गाडी को खड़ा कर दिया। तीन घंटे बीत गए। तभी तीन लड़के मस्ती और धमाल करते आते हैं और पुलिसिआ चौकी तक चलने को कहते हैं। दस -दस के तीन ही सिक्के है हमारे पास ,वे कहते हैं। क्या फर्क पड़ता है ,सवारी होनी चाहिए ,वह मन ही मन बुदबुदाता है। सीट दो दो ही हैं एक को तो खड़ा होना पडेगा।
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आखिर फैसला हुआ कि कुबड़ा लड़का खड़ा होकर जाएगा। बाबा घोड़े को भगाओ ना , कुबड़ा लड़का कहता है। इस बीच दो लड़के किसी औरत के बारे में बात करते हैं। वह उन लड़कों की तरफ देखकर कहा ,-‘मेरा बेटा इसी हफ़्ते गुजरा है ‘.’हम सब को किसी ना किसी दिन मरना है ‘कुबड़े ने धीरे से कहा। बुढऊ क्या घर पर बीबी तिमहारा इंतज़ार कर रही है ?’ ‘आप लोग क्या मज़ाक करते हैं ,बेटा ,अब तो बस मेरी बीबी ही ज़िंदा है। वो भी कब्र में पावं लटकाये बैठी है। मेरा बेटा मर गया और मैं अब तक ज़िंदा हूँ। कितनी अजीब बात है। मौत भी गलत दरवाज़े पर चली गयी। तीनो अपने गंतब्य स्थान पर आख़िरकार पहुँच गए। वह अपने आप को बेहद अकेला महसूस करने लगा। चारों तरफ सन्नाटा बिखरा पड़ा था। उसे लग रहा है कि दुःख ने उसे धुंध में घेर रखा है। वह किसी ऐसे आदमी को तलाश रहा है जिसे वह अपनी मन की बात सूना सके। तभी उसे एक चौकीदार दिखाई देता है। क्या समय हुआ है भाई ?’-वह पूछता है / नौ से ज्यादे हो रहे होंगे। अब लौट जाओ ,कोई सवारी नहीं मिलेगी। वह फिर गम में डूब गया। उसने अपनी घोड़ी से कहा -‘चल ,घर चल अब लौट चलें। घोड़ी दुलकी चाल से चलने लगी। वह एक गंदे कमरे मई बैठा है। आतिशदान के पास फर्श और बेंच पर कई लोग खर्राटे भर रहे हैं। दमघोटूं गर्मी है। आज तो घोड़ी के दाने के लिए भी पैसे नहीं मिले -वह सोचता है। तभी एक जवान पानी पिने के लिए उठता है। क्या तुम्हे मालूम है कि मेरा बेटा इस दुनिया में नहीं रहा ? ‘अस्पताल में उसकी मौत हो गई। यह एक लम्बी कहानी है। उस आदमी पर कोई असर नहीं होता। वह उसे यह बताना चाहता है कि उसका बेटा कैसे मरा ,कैसे उसे उसने दफनाया। वह अपना कोट पहनकर घोड़ी के पास जाता है। चलो आज घास से ही अपना पेट भरो। आज दाने का इंतजाम नहीं हो सका। काश आज मेरा बेटा ज़िंदा होता। वह गाडी चला सकता था। सोचो अगर तुम्हारा बछड़ा तुम्हे छोड़कर चला जाये तुम उसकी मां हो ,तुम्हे कितना दुःख लगेगा। है ना ? घोड़ी सुखी घास चबाते हुए गहरी सांस भरती है मानो वह भी अपने मालिक के साथ दुखी हो। वह हाथ चाटने लगती है जैसे उसे सांत्वना दे रही हो। वह घोड़ी को प्यार से सहलाने लगती है। वह उसे बाहों में भरकर उसे ही अपनी कहानी सुनाने लगता है।

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