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लव आजकल-a new simple hindi love story on new type of love

a new simple hindi love story on new type of love

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जिम में ट्रेडमिल पर चलते चलते वैशाली ने सामने लगे शीशे में खुद को देखा. फिर मन ही मन अपने रूपरंग और फिगर पर इतराई कि कौन कहेगा वह इस महीने 35 साल की हो गई है. वह चलने की स्पीड बढ़ाते हुए अब लगभग दौड़ने सी लगी थी. अचानक उसे महसूस हुआ कि उसे कोई देख रहा है. उस ने सामने शीशे में फिर देखा. करीब 25 साल का नवयुवक वेट उठाते हुए उसे चोरीचोरी देख रहा था. वह थोड़ी देर टे्रडमिल पर दौड़ी, फिर साइक्लिंग करने लगी. वह लड़का अब ट्रेडमिल पर था. जिम में हर तरफ शीशे लगे थे. शीशे में ही उस की नजरें कई बार उस लड़के से मिलीं, तो वह अनायास मुसकरा दी. उस की नजरों से शह पा कर वह लड़का भी मुसकरा दिया. दोनों अपना अपना वर्कआउट करते रहे. अपनी सोसाइटी के इस जिम में वैसे तो वैशाली शाम को आती थी पर शाम को जिस दिन किट्टी पार्टी होती थी, वह जिम सुबह आती थी. अपने पति निखिल के औफिस और 5 वर्ष के बेटे राहुल को स्कूल भेजने के बाद वह आज सुबह 9 बजे ही जिम आ गई थी.
वैशाली ने उस लड़के से आंख मिचौली करते हुए खुद को एक नवयुवती सा महसूस किया. घर आ कर जब तक वह फ्रैश हुई, उस की मेड किरण आ गई, फिर वह काम में व्यस्त हो गई. अगले दिन वैशाली निखिल और राहुल के लिए नाश्ता बना रही थी, तभी अचानक जिम वाला लड़का ध्यान आ गया कि कहीं देखा तो है उसे. कहां, याद नहीं आया. होगा इसी सोसाइटी का, कहीं आतेजाते देखा होगा, फिर सोचा वह लड़का तो सुबह ही होगा. जिम में, शाम को तो दिखेगा नहीं. उस लड़के की तरफ वह पहली नजर में ही आकर्षित हो गई थी. स्मार्ट, हैंडसम लड़का था. वह अपना मन उस से हटा नहीं पाई और निखिल और राहुल के जाने के बाद जिम के लिए तैयार हो गई.
9 बज रहे थे. जा कर देखा, वह लड़का आ चुका था. वैशाली उसे देख कर मुसकरा दी. वह भी मुसकरा दिया. रोज की तरह दोनों अपनीअपनी ऐक्सरसाइज करते रहे. एकदूसरे से जब भी नजरें मिलीं, मुसकराते रहे, कोई बात नहीं हुई. 1 हफ्ता यही रूटीन चलता रहा. दोनों ही एकदूसरे के प्रति आकर्षित थे. वैशाली बहुत खूबसूरत थी, फिगर की उचित देखरेख से बहुत यंग दिखती थी. एक दिन वह लड़का वैशाली के जिम से निकलने पर साथसाथ चलता हुआ अपना परिचय देने लगा. ‘‘मैं विनय हूं, अभी अभी एक कंपनी में जौब शुरू की है.’’
वैशाली ने मुसकराते हुए कहा, ‘‘मैं वैशाली.
विनय बोला, ‘‘मैं जानता हूं, आप मेरे सामने वाली बिल्डिंग में ही रहती हैं.’’
वैशाली चौंकी, ‘‘आप को कैसे पता?’’
‘‘मैं आप की सहेली रेनू का देवर हूं, आप को मैं ने 1-2 बार अपने घर पर देखा भी है, शायद आप ने ध्यान नहीं दिया होगा. आप के बेटे राहुल की मेरी भाभी कभीकभी ड्राइंग में हैल्प करती हैं.’’
वैशाली हंस दी, ‘‘हां, रेनू की ड्राइंग अच्छी है, कई बार चार्ट बनाने में रेनू ने उस की हैल्प की है.’’

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दोनों बातें करते करते अपनी बिल्डिंग तक पहुंच गए थे. वैशाली घर आ कर भी विनय के खयालों में डूबी रही… कितनी अच्छी स्माइल है, कितना स्मार्ट है और मुझ जैसी 1 बेटे की मां को पसंद करता है, यह उस की आंखों से साफ महसूस होता है. विनय को भी वैशाली अच्छी लगी थी. कहीं से एक बच्चे की मां नहीं लगती. जिम में वर्कआउट करते हुए तो एक कालेज गोइंग गर्ल ही लगती है. दोनों ही एकदूसरे के बारे में सोचने लगे थे. अब वैशाली शाम की जगह सुबह 9 बजे ही जिम जाने लगी थी, जहां अब मुख्य आकर्षण विनय ही था और यही हाल विनय का भी था. पहले वह कभीकभार जिम से छुट्टी भी कर लेता था पर जब से वैशाली से दोस्ती हुई थी, उसे देखने के चक्कर में कतई छुट्टी नहीं करता था. और अब तो दोनों के मोबाइल फोन के नंबरों का भी आदान प्रदान हो चुका था. सोमवार को जिम बंद रहता था. उस दिन दोनों बेचैनी से एक दूसरे से फोन पर बात करते. निखिल अपनी पत्नी की हरकतों से अनजान अपने काम और परिवार की जिम्मेदारियों को हंसीखुशी निभाने वाले एक सभ्य पुरुष थे. वैशाली के जोर देने पर विनय अब वैशाली जी की जगह वैशाली पर आ गया था. 2 साल पहले ही निखिल का ट्रांसफर दिल्ली से मुंबई हुआ था पर उन्हें अकसर किसी न किसी काम से दिल्ली जाना पड़ता रहता था.
एक दिन निखिल 3-4 दिनों के लिए दिल्ली गए तो वैशाली ने राहुल के स्कूल जाने के बाद विनय को घर बुलाया. जिम से दोनों ने छुट्टी कर पहली बार अपने रिश्ते को एक कदम और आगे बढ़ा दिया. विनय पहली बार वैशाली के घर आया था. दोनों के बीच पहली बार शारीरिक संबंध भी बन गए.
विनय ने कहा, ‘‘सौरी वैशाली, शायद मुझे नहीं आना चाहिए था.’’
‘‘कोई बात नहीं विनय, बस अब मेरा साथ कभी न छोड़ना.’’
‘‘पर वैशाली, तुम्हारे पति को कभी भनक लग गई तो?’’
‘‘नहींनहीं, यह नहीं होना चाहिए, बहुत गड़बड़ हो जाएगी, बहुत संभल कर रहना होगा.’’
वैसे भी महानगरों में कौन क्या कर रहा है, इस बात से किसी को मतलब नहीं होता है और फिर किसी के पास समय ही कहां होता है. उस के बाद दोनों अकसर अकेले में मिलते रहते थे. वैशाली तनमन से विनय के प्यार में डूबी थी. विनय अकसर औफिस से हाफडे लेता था, दोनों के संबंधों के 6 महीने कब बीत गए, दोनों को ही पता न चला. वैशाली मशीनी ढंग से अपनी घर की जिम्मेदारियां पूरी करती और विनय के खयालों में डूबी रहती. एक दिन वैशाली किट्टी पार्टी में गई थी. वहां रेनू भी थी. रेनू ने उत्साहपूर्ण स्वर में सब को बताया, ‘‘बहुत जल्दी एक गुड न्यूज दूंगी तुम लोगों को.’’
सब पूछने लगीं, ‘‘जल्दी बताओ.’’
रेनू हंसी, ‘‘अभी नहीं, डेट तो पक्की होने दो.’’
अनीता ने पूछा, ‘‘कैसी डेट? बता न.’’
‘‘विनय के लिए लड़की देखी है, सब को पसंद आ गई है, बहुत अच्छी है, बस शादी की डेट फिक्स करनी बाकी है.’’
वैशाली को गहरा झटका लगा, ‘‘क्या? विनय के लिए?’’
‘‘हां भई, अब तो अच्छीखासी जौब कर रहा है… उस की जिम्मेदारी भी पूरी कर दें.’’
रेखा ने पूछा, ‘‘वैसे तो आजकल लड़के खुद ही लड़की पसंद कर लेते हैं. उस ने कोई लड़की खुद नहीं पसंद की?’’

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