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a satire news in hindi-राखी ना बंधवाने वाला ओलोम्पिक रेस में दौड़ा


हम एक से बचकर एक व्यंग्य देसिकहानियाँ पर प्रकाशित करते रहते हैं। पेश है इसी कड़ी में “राखी ना बंधवाने वाला ओलोम्पिक रेस में दौड़ा” a satire news in hindi.आशा है ये आपको अच्छी लगेगी।
लेखक-आदित्य
पड़ोस में रहने वाला पुन्नू मोहोल्ले में महशूर था,ये मत समझिये की कोई नेक काम करने की वजह से,वो महशूर था,लड़कियों के बीच,जब देखो तब लड़कियों के बीच बेवजह अपनी तारीफ किया करता रहता था। मोहोल्ले की लाडिया भी समझ गयी की ये फेंकता है,और लडकिया उससे बात करने से कतराती थी। लेकिन वो जबरदस्ती बातें करता था और लड़को को बताता था की सभी लडकिया उस पर फ़िदा हैं। लेकिन बात क्या थी वो तो पुन्नू का दिल और लड़कियों को मालूम था,लडकिया पुन्नू को नजरअंदाज करती थी, लेकिन पुन्नू कोई ना कोई वजह ढूंढ ही लेता था,लड़कियों से बात करने की। शाम के समय लडकिया पुन्नू की डर से घर से नहीं निकलती थी।एक दिन शाम में अचानक से बिजली चली गयी,लडकिया घर से बाहर निकल गयी,पुन्नू की तो जिससे लॉटरी निकल पड़ी हो,वो सभी से बात करने में लग गया। अब तो हर शाम पुन्नू मनाता था की बिजली कट जाये,और उसे लड़कियों से बात करने का मौका मिल जाये। जहाँ हम लोग बिजली जाने से परेशान होते थे,वहीँ पुन्नू खुश होता था। सभी लडकिया आजिज हो गयी थी,लेकिन कर भी क्या सकती थी,पुन्नू की चुप-चाप हो कर उसकी ढींगे सुनने के सिवाय। पुन्नू को ये पता ही नहीं चलता था की उसकी ढींगे सभी को मालूम चल गया है,वो तो बस लंबी-लंबी फेकने में लगा रहता था,किसी तरह लडकिया उससे इम्प्रेस हो जाये बस। इम्प्रेस करने की चक्कर में कई बार पुन्नू को समस्याओ से भी उलझना पड़ा,लेकिन उसे कोई फर्क ही नहीं पड़ता था। लडकिया इसका फायदा उठा कर उससे काम भी करवा लेती थी,और पुन्नू ख़ुशी ख़ुशी काम कर दिया करता था। पुन्नू की माँ भी उसके स्वभाव से परेशान थी की,पुन्नू घर का कोई काम नहीं करता है,लेकिन लोगो और लड़कियों के काम तुरन्त कर देता है,पुन्नू की माँ को भी अगर को कोई काम पुन्नू से करवाना होता था तो वो पड़ोस की लड़की को बोल देती थी और पुन्नू ख़ुशी ख़ुशी काम कर देता था।






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एक दिन अचानक पड़ोस की सभी लड़कियों ने पुन्नू को राखी बाँधने का मन बना लिया। इस पर सबो ने सोचा पुन्नू को राखी बांध कर उसे अपना भाई बना लिया जाये। ये बात उड़ते-उड़ते पुन्नू को पता चली। राखी वाले दें वो सुबह-सुबह घर से निकल गया,सबकी नजर से अपने आप को बचाते हुए की उसे लड़की देख ना ले और राखी ना बांध दे। सुबह से बाहर निकला हुआ पुन्नू को आखिर दिन में भूख लग ही गयी,वो वापस घर लौट ही रहा था की कुछ लड़कियों ने उसे रोका उसे समझ में आ गया की राखी बाँधने के लिए उसे रोका जा रहा है,वो उलटे पाव इतना तेज भागा,जो की ज़िन्दगी में कभी भागा ना हो।कुछ वक्त के बाद शाम से थोड़ा देर पहले फिर हिम्मत करके पुन्नू घर की और चल पड़ा,लेकिन उसकी किस्मत खराब एक लड़की ने उसे फिर देख लिया और उसे रुकने को कहा,अब तो पुन्नू फिर भाग खड़ा हुआ,इस बार वो पिछली बार से और तेज भागा,रास्ते में पुन्नू को तेज भागता देख मैंने रोक लिया और पूछा क्या बात है पुन्नू इतना तेज क्यों भाग रहे हो,जितना तेज तुम भाग रहे हो लग रहा है ओलोम्पिक में पदक जरूर जीत लोगे। पुन्नू बोला पदक जीतू या ना जीतू लेकिन आज भाग भाग कर जरूर जान निकल जायेगा,मैंने कहा ऐसा क्या हुआ? पुन्नू बोला मोहोल्ले की लडकिया राखी बाँधने पर तुली हुई हैं,मैंने कहा इसमें समस्या क्या है,बंधवा लो,पुन्नू बोला बंधवा तो लू लेकिन देने के लिए कुछ नहीं है,इसलिए भाग रहा हूँ। लेकिन बात क्या थी वो तो मेरे समझ में आ गयी थी। मैं फिर अपने घर वापस आ गया,लेकिन पुन्नू बेचारा सारा दिन इसी तरह भागता रहा।और भाग भाग कर उसके दिमाग में ये ख्याल आया की वो इसी तरह भागता रहा तो सचमुच ओलोम्पिक में पदक जीत सकता है,इसलिए उसने अपना नाम ओलोम्पिक में दौड़ रेस में डलवा दिया। इस तरह पुन्नू राखी बंधवाने की डर से आज ओलोम्पिक में दौड़ रहा है.हमें अपेक्षा है की ये “
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