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नशा-a short inspirational artical on intoxication for young audiance

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इस दुनियां में नौटंकीबाजों की कोई कमी नहीं। लोग तरह-तरह की नौटंकी करते हैं। किस्सा यूँ है कि एक शराबी सड़क पर जा रहा था लड़खड़ाते हुए। गन्दी -गन्दी गालियाँ देते हुए खास कर पुलिस वालों पर राहगीर परेशां थे। एक दरोगाजी ने इस शराबी को पकड़ा और दो चार लप्पड़ जमकर लगाए। शराबी और जोर-जोर से गालियां देनी शुरू कर दी। एक सज्जन बगल से गुजर रहे थे। मार कहते देख उन्हें दया आ गई। उन्होंने दरोगाजी से विनती की इस शराबी को जाने दे होश आने पर यह ठीक हो जायेगा अभी नशे में है इसलिए अनाप शनाप बोले जा रहा है। दारोगाजी ने बात मान ली। एक जोरदार थप्पड़ लगाकर चुप रहने को कहा और वहां से दफा होने को कहा।
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वह शराबी अब भी पुलिस वालों पैर भद्दी- भद्दी गालियां दिए जा रहा था। खैर शराबी सड़क के निचे उतर गया। एक नाला बीच में था ,पानी में बहाव था उसने आराम से अपने जुटे और मोज़े उतारे और हाथों में पकड़कर नाला पार करने लगा। दारोगाजी सब देख रहे थे।दे खिये इस शैतान को इसने शराब नहीं पी है नौटंकी कर रहा है। जूते ,मोज़े उतरने का इसे होश है इसे तो पुलिसवालों को गरियाना था इसलिए नौटंकी कर रहा था। पकड़ साले को -पैर वह अब कहाँ हाथ लगने वाला था। वो भागा की पीछे मुड़कर नहीं देखा। इसी तरह की एक और नौटंकी का किस्सा सुनिए। चुनाव का समय था। बहुत सारे लोगों ने अपनी बीमारी को लेकर चुनाव ड्यूटी से मुक्ति का आवेदन दे रखा था। एक मेडिकल टीम गठित की गई प्रभारी पदाधिकारी बड़े नेक दिल इंसान थे। जिन्हे गंभीर बीमारी थी उन्हें मुक्त कर देते। तभी एक ३०-३५ बर्ष का एक लिपिक आया। उसका पूरा शरीर हिल रहा था। उसे सहारा देनेवालेने बताया की वह लकवा पीड़ित है। हेल्थ ग्राउंड पर उसे ड्यूटी से मुक्ति दी गई। पैर यह क्या –थोड़ी दूर जाते ही वह ख़ुशी से चिल्लाया और हाथ-पैर भेजने लगा। उसे पकड़ने के लिए एक दो लोगों को भेजा गया पैर वह ऐसा दुलत्तिझाड़ भागा की मत पूछिए प्रभारी ने उसकी ड्यूटी सबसे दुर्गम बूथ पैर कर दी गई। संवेदना हासिल करने के लिए पता नहीं लोग कैसी-कैसी नाटक किया करते हैं।

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