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भगवान का न्याय-a short religious and inspirational story in hindi language

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साधू “मौजी साधू” के नाम से ही जाना जाता था क्योकि यह साधू अपनी ही धुन मे मगन रहते थे चाहे इन्हे कोई कुछ भी कहे यह किसी को भी पलट कर कुछ नहीं बोलते थे
हमेशा खुश रहते जहां भी मन किया चले जाते , जहां भी मन किया सो जाते , भगवान का गुन गान करते रहते खुश रहते भगवान पर इनका अटूट विश्वास था
इनके इसी तौर तरीको की वजह से लोगो ने इनका नाम “मौजी साधू” रख दिया था तब से यही नाम प्रसिद्ध है और इसी नाम से जाने जाते है मौजी साधू ऐसे ही अपनी धुन मे मगन एक दिन दिल्ली शहर पहुँच जाते है शाम का समय था , और काले बादलों ने भी आसमान को ऐसा घेरा हुआ था की बस अभी मानो सारा पानी उसी शहर मे बरस जाएगा उधर साधू अपनी मस्ती मे चले आ रहे थे
इतने मे ज़ोर से बादलों के गरजने की आवाज़ आनी शुरू हो जाती है फिर कुछ ही देर बाद ठंडी हवाए चलनी शुरू हो जाती है जिस वजह से मौसम काफी ठंडा हो जाता है फिर कुछ ही देर बाद बारिश की बूंदे ज़मीन पर अपनी दस्तका दे देती है
इधर मौजी साधू एक बाज़ार मे पहुँच जाते है , इधर बाज़ार मे सभी लोग बारिश की बूंदों से खुद को बचते बचाते आस पास की दुकानों मे शरण ले लेते है और बारिश के निकल जाने का इंतज़ार करते है उधर हमारे मौजी साधू जी अपनी ही धुन मे मगन खुले आसमान के नीचे हाथ फैलाए बारिश की बूंदों का आनंद उठा रहे होते है
मौजी साधू का जब मन भर गया तो एक दूनक के बाहर खड़े हो गए | अब वहाँ खाने पीने की इतनी सारी दुकाने थी की वहाँ से बन रहे स्वादिस्ट पकवानों की खुशबू मौजी साधू के नाक से होती हुई पेट तक पहुँच जाती है मौजी साधू की भूख इस कदर बारह जाती है मानो उन पकवानो मे डूब ही जाए
पर साधू के पास पैसे तो होते नहीं साधू एक टक टकी लगाए सामने की दुकान पर देख रहा था जहां जलेबियाँ तली जा रही थी और दूध खौलाया जा रहा था इतने मे बरुष भी थम जाती है
उधर जलेबी बना रहे आदमी की नज़र भी उस साधू पर जाती है देखा देखि का यह सिन्सिला लगभग 20 मिनट तक चलता रहता है
उधर अब जलेबी वाला आदमी समझ जाता है की साधू भूखा है और उसके पास पैसे भी नहीं है | जलेबी वाला आदमी मौजी साधू को अपने हाथ का इशारा करके अपनी दुकान मे आने का इशरा करता है | इशारा देख साधू तुरंत उठ कर दुकान मे आदमी के पास चला जाता है
दुकानदार साधू को कुछ देर रुकने का इशारा करता है मौजी साधू वहीं ज़मीन पर बैठ जाता है | दुकान दार अपने हाथो मे कुछ जलेबी और मिट्टी से बने गिलास मे गरम गरम दूध लिए साधू के पास आता है और सब साधू के हाथो मे रख देता है
यह देख मौजी साधू उस दुकान दार को खूब सारी दुआएं देने लगता है दुकान दार खुश होकर वहाँ से चला जाता है
मौजी साधू दूध पीता है और हाथ मे जलेबी लिए मस्ती से खाते हुए अपनी ही धुन मे रास्ते पर निकल पड़ता है कुछ ही दूर एक नई शादी का जोड़ा यानि पति पत्नी वहाँ से गुज़र रहे थे बारिश की वजह से सड़को पर कुछ कुछ जगह पर पानी रुका हुआ था

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इधर साधू अपनी धुन मे मगन हाथो मे जलेबी लिए खाता हुआ चला जा रहा था की साधू का पर जैसे ही सड़क पर रुके पानी पर पड़ता है पानी के खूब सारे चीते ज़ोर से उछल कर उस आदमी की पत्नी के कपड़ो पर जा गिरता है उधर बिचारा मौजी साधू इन सब घटना से अनजान आगे चला जा रहा था
यह देख पति को ज़ोर दार गुस्सा आया और मौजी साधू का गिरेबान पकड़ कर ज़ोर दार तमाचा मौजी साधू के मुंह पर धर दिया बेचारे साधू की जलेबियाँ भी नीचे गिर चुकी थी
धर साधू हक्का बक्का रेह गया की मारा क्यों मेरा कसूर क्या था आदमी बोला तेरी इतनी हिम्मत मेरी पत्नी कपड़ो पर गंदा पानी उछालता है
इतना बोलते हुए फिर से साधू के सर पर मारता है और उसे नीचे गिरा देता है फिर वहाँ से चला जाता है
इधर साधू बिना कोई प्रतिकृया दिखाए बस आसमान की तरफ देखता है और बोलता है वाह मालिक एक पल की खुशी दी और चीन भी ली सब जलेबियाँ गिर गई इतना बोल कर फिर से खुश हो जाता और हासते हुए बोलता है सब तेरी माया जय हो …जय हो… इतना बोलकर फिर से मौजी साधू अपनी धुन मे मगन आगे बढ़ जाता है
हम इस दुनिया मे जो भी करते है चाहे वो अच्छा हो या बुरा भगवान हर बात का हिसाब अपने पास रखता है क्यों की भगवान सब देखते है तो आप ही बताओ उस साधू की आखिर क्या गलती थी जो भी हुआ था वो अनजाने मे हुआ था साधू ने जान बूझ कर तो पानी नहीं मारा था और यह बात वहाँ हर कोई जानता था साधू को मरने वाला इंसान भी यह बात जानता था की कोई जानबूझ कर तो नहीं करेगा लेकिन फिर भी एक बदले की आग और गुस्से से भरे दिमाग के आगे उसने कुछ सोचा न समझा और अपनी ताकत के घमंड मे चूर उस साधू इंसान को मारा पीटा गाली दी और नीचे गिरा दिया उधर उसकी पत्नी भी पति का साथ देती रही साधू चाहता तो उसका जवाब दे सकता था लेकिन वह जानता था भगवान ज़रूर न्याय करेंगे
इसके ठीक दो दिन बाद वो आदमी जिसने साधू को मारा था वो ऑफिस के लिए तैयार होकर घर से बाहर निकला आदमी कुछ दूर ही जाता है की अचानक एक तेज़ रफ्तार कार जगह कम होने की वजह से उसी आदमी के शरीर एक दम ज़रा सा छु कर निकाल जाती है
जिस वजह से उस आदमी का बैलेंस बिगड़ जाता है और खुद को गिरने से बचाते बचाते वह बगल से आरही साइकल वाले के ऊपर गिर जाता है
इस प्रकार दोनों नीचे गिर जाते है ठीक उसी समय साइकल वाले के पीछे से आरहा स्कूटर का टायर उस आदमी के दाएँ हाथ पर चढ़ जाता है
जिस वजह से उसके दाएँ हाथ की हड्डी क्रेक हो जाती है दर्द के मारे वह आदमी चिल्ला उठता है तुरंत उसको हॉस्पिटल बगल के हॉस्पिटल मे पहुंचाया जाता है उसकी पत्नी को जैसे ही इन सब का पता चलता है वह भी अपने पति के पास पहुँच जाती है
पति की ऐसी हालत देख पत्नी ज़ोर ज़ोर से रोने लगती है बार बार पूछती है की यह सब कैसे हुआ इधर पति जैसे ही कुछ बोलने की कोसिस करता है उसकी आवाज़ गले से बाहर ही नहीं निकलती आवाज़ न निकाल पाने से पति के शरीर मे उलझन सी होने लगती है
यह देख पत्नी पति से सर को सहलाती है और पूछती है क्या हुआ आप कुछ बोल क्यों नहीं रहे पत्नी तुरंत डॉक्टर को बुलाकर लेकर आती है
डॉक्टर पति के गले को चेक करता है चेक करने पर पता चलता है की ग्ले की वोकल नस मे सूजन आगाई है पत्नी पूछती है डॉक्टर साहब यह कैसे हुआ
डॉक्टर बोलते है की जब एक्सीडेंट की वजह से जब इनकी हड्डी क्रैक हुई थी तब तेज़ दर्द की वजह से ये खूब ज़ोर से चिल्लाए होंगे जिस वजह से इनके गले की नसो मे सूजन आगाई है वोकल पोइण्ट सूज गया है इसे ठीक होने मे महीना लग जाएगा | डॉक्टर पति को बोलता है की आप बोलने की कोसिस न करे वरना यह ठीक नहीं हो पाएगा

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