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कृष्ण प्रेम-a simple and short inspirational story of a englishman and shri krishna

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भक्ति कथा -कृष्ण प्रेम -रोनाल्ड निक्सन अँगरेज़ थे,आज भी लोग उन्हें ‘कृष्ण प्रेम के नाम से जानते हैं। ये इंग्लैंड के रहनेवाले थे। इन्होने महज १८ बर्ष की आयु में प्रथम जर्मन ययुद्ध में भाग लिया था। युद्ध में ह्त्या,मारकाट,मृत्यु का तांडव रक्तपात उन्होंने अपनी आँखों से देखी ह्रदय विदारक चीत्कार ने इनकी शान्ति हरण कर ली। युद्ध के वीभत्स दृश्य ने इनके ह्रदय को आंदोलित कर दिया था मानसिक शान्ति चली गई थी। एक दी ये कैंब्रिज विश्वविद्यालय गए,यहां इन्हे वेदांत,ईश्वर ज्ञान से परिचय हुआ। ईश्वर प्राप्ति की लालसा में ये भारत आ गए। ये ब्रज में आकर बस गए। कृष्ण-कन्हैया से प्रगाढ़ प्रेम हो गया और कृष्ण को अपना छोटा भाई मानने लगे।भोग लगाते तो हलुआ में छोटी-छोटी उँगलियों के निशान देख कर प्रेम के अश्रु-धारा बहने लगते।

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सर्दियों का समय था। भगवान् कृष्ण को सुलाकर खुद कुटिया से बाहर सो गए। मध्य रात्रि को उन्हें प्रतीत हुआ कि कोई उन्हें,’दादा, दादा कहकर पुकार रहा हो। शुरू में तो इन्हे भ्रम का एहसास हुआ। लेकिन फिर वही पुकार सुनकर वे अंदर गए,देखा तो वे कृष्ण को रजाई ओढ़ाना भूल गए थे। बड़े प्यार से बोले,’आपको भी सर्दी लगती है क्या?’इतना सुनते ही ठाकुर जी की आँखों से अश्रु धार बाह निकले। निक्सन भी फूट -फूट कर रोने लगे। उस रात वह इतना रोये कि उनकी आत्मा शरीर को छोड़ भगवान् के लोक में प्रस्थान कर गयी। बांके बिहारी तभी मिलते है जब हमारी,लालसा और सच्ची भक्ति हो।

और अंत में एक कर्मचारी-बॉस,कल से मैं अपने घर ६ बजे ही चला जाऊंगा .
बॉस ,क्यों ,क्या हुआ?
कर्मचारी सर ,मेरी तनखाह मेरी जरूरत के अनुसार सही नहीं है। इसलिए मैं रात में ऑटो-रिक्शा चलाना चाहता हूँ। मुझे अपने परिवार की जरूरतों को पूरा करना है।
बॉस-ओके अगर रात में तुम्हे भूख लगे तो अन्ना नगर क्रासिंग पर जरूर आना।
कर्मचारी -‘क्यों सर ?’
बॉस -,”मैं वहाँ इडली -डोसा बेचता हूँ।

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