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भैंस की सवारी-A true new hindi short inspirational story of a buffalo

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यह कहानी सत्य घटना पर आधारित है। इस दुनिया में भांति-भांति के लोग होते हैं। पलटू भी इन्ही में से एक है। वह पढ़ा -लिखा नहीं है। उसने एक भैंस पाल रखी है वह दिन भर गांव के बड़ा तालाब के किनारे भैंस को चराता है। बीच-बीच में वह तालाब में नहाने चला जाता है वह एक कुशल तैराक भी है वह तालाब के बीच जाठ पर चढ़कर पानी में छलांग लगi ता है. उसके भैंस पर परर नहीं। सोचिये भैंस को कितना कस्ट सवारी करने का तरिका भी लाजवाब है। वह भैंस के गुदा मार्ग के पास ही बैठता है। भैंस के पीठ पर बैठने के बजाए गलत जगह पर बैठने से सोचिये भैंस को कितनी तख़लीफ़ होती होगी। यह एक तरह से जानवरों पर अत्याचार ही है। पालतू को कई बार लोगों ने मना किया की भैंस के पीठ पर बैठो ,उसे चलने तथा ऊंचाई पर चढ़ने में तकलीफ होती होगी पर पलटू बाबा को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है। वह इत्मीनान से कभी विरहा तो कभी नचारी गाता है वह भी खूब लय में। एक दी बारिशः हो रही थी। तालाब किनारे कीचड़ में भैंस को चले में अत्यंत कठिनाई हो रही थी। भैंस के नाथ की रस्सी उसने अपने कलाई में लपेट राखी थी। पर आज तो कुछ और होनी थी। भैंस कस्ट में थी तथा गुस्से में भी। उसने जी जान लगाकर दौड़ लगा दी। बेचारे पलटू जी निचे गिर पड़े। इधर भैंस तालाब के किनारे दौड़ लगा रही थी उधर पालतू जी के कलाई में लपेटी रस्सी उलझ गई थी।
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लिहाजा वे घसीटे जा रहे थे। साथ में दर्द से चिल्ला भी रहे थे। कटीलेपद। घने घास के बीच रगरण से उसका शरीर बुरी तरह छील गया था। अनवरत खून निकल रहा थे। कीचड़ और खून। चिल्लाहट सुन बहुत लोग जमा हो गए और भैंस को रोकने का प्रयास किया पर भैंस आज पूरा बदला लेने केमूद में था मनो कह रहा हो की और बैठो गलत जगह पर अब कैसा लग रहा है/ खैर अथक प्रयास के बाद ग्रामीणों ने भैंस पर काबू पाया। कलाई बुरी तरह से काट चुकी थी पलटू जी बुरी तरह से घायल हो चुके थे उन्हें अस्पताल ले जाया गया। कईटाँके लगे। उन्हें स्वस्थ होने महीने के लगभग लगे। अब वे भैंस नहीं चराते। ना की उस भैंस को उन्होंने सस्ते दाम पर बेच दिया। बेजुबानो पर अत्याचार करने का यही हश्र होता है। हमें जानवरों के प्रति स्नेहिल होना चाहिए।
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