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an educational story in hindi-एक बेटे की प्रेरक कहानी

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हम हर दिन एक से बढ़कर एक प्रेरणादायक कहानिया प्रकाशित करते हैं। इसी कड़ी में हम आज  “एक बेटे की प्रेरक कहानी” an educational story in hindi प्रकाशित कर रहे हैं। आशा है ये आपको अच्छी लगेगी।
लेखक- संजीव
सूरज अपने माता पिता का इकलौता बेटा था जिसे दोनों ने बड़े ही जतन और लाड प्यार से पाला था। समय बिता और सूरज बड़ा हुआ,उसने नौकरी की और फिर अपनी पसंद की लड़की से शादी कर ली। सब कुछ ठीक चल रहा था की बूढ़े माँ बाप सूरज और उसकी पत्नी की नजरो में चुभने लगे और वो दोनों मिलकर माँ बाप को वृद्धाश्रम में छोड़ आये। एक बार सूरज बहुत बीमार पड़ गया और डॉक्टर से जांच करवाने पर पता चला की उसकी दोनों किडनी फेल हो चुकी है।पत्नी सदमे से बेहोश हो गयी और उसे उसके घर वाले घर ले गए। सूरज को एक किडनी देने वाले की तलाश थी पर वो इतना आसान नहीं था। इस सब के बारे में सूरज के माँ बाप को कुछ पता नहीं चला। एक दिन अचानक डॉक्टर ने बोला की आपके किडनी देने के लिए कोई राजी हो गया है और कल आपका ऑपरेशन है। ऑपरेशन सफल हुआ और सूरज फिर से ठीक होकर घर लौट गया।


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घर लौटने के कुछ ही उसने सुना की उसके पिता की तबियत बहुत ख़राब है पर उसने या उसकी पत्नी ने वृद्धाश्रम जाकर उनसे मिलने की जहमत नहीं उठायी और उन्हें जल्द ही उनकी मृत्यु का समाचार मिला। ये सुनकर वो थोड़ा दुखी हुआ और उनका क्रिया कर्म करके अपनी माँ के पास बैठा था की उसकी माँ ने बोला की तुम्हारे पिता कभी नहीं चाहते थे की मैं तुम्हे ये बताऊँ की उन्होंने ही तुम्हे अपनी एक किडनी दी थी पर बुढ़ापे के कारण उनका शरीर ऑपरेशन को झेल नहीं सका और वो चल बसे. मरते वक़्त भी उनके मुँह पर बस तुम्हारा ही नाम था और वो तुम्हे अंतिम बार देखना चाहते थे। ये सुनकर सूरज अवाक् रह गया और उसे अपने किये का बहुत पछतावा हुआ।
कहानी से सीख – अपने माता पिता का ख्याल रखना चाहिए क्यूंकि वो देव तुल्य होते हैं।

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