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मुसीबत में कभी पीछे न हटे बल्कि उसका सामना करें-An good inspirational story of 2018


किसी गाँव में भोला नाम का एक व्यापारी रहता था. गाँव में उसकी अच्छी खासी पहचान थी, गाँव ही नहीं बल्कि शहर के लोग भी उसे जानते थे. व्यापारी भोला शहर से सामान खरीदता और उसे आस पास के गाँव में बेच देता. यही उसका काम था. वो बहुत दयालु किस्म का इन्सान भी था. वो किसी को भी मुशीबत में देख नहीं सकता था. भोला उसकी मदद करता और किसी को भी कानों कान खबर तक न होती.
भोला चाहता था कि जब भी किसी की मदद करे, तो इस बारे में किसी को कुछ पता न चले, लेकिन कहीं न कहीं से बाद में बात खुल ही जाती है.
एक बार भोला पास के एक गाँव में किसी शादी में गया हुआ था. गर्मियों के दिन थे. भोला सुबह-सुबह ही शादी वाले घर चला गया. ये शादी उसके खान मित्र के बेटे की थी.
बारात करने के बाद शाम को अँधेरा होने से पहले भोला अपने घर की ओर निकल पड़ा. उसके मित्र ने उसे कुछ मिठाइयाँ, रोटी दे दी. भोला पैदल सामान लेकर चल दिया.

रास्ते में उसे एक भिखारी दिखाई दिया, जो कई दिनों से भूंखा दिख रहा था. भोला को उस भिखारी को देख दया आ गई और उसने अपने झोले से कुछ रोटियां और मिठाई निकाल कर दे दीं.
पास एक बंदर बैठा सब देख रहा था, जब भोला अपने रास्ते चलने लगा, तो बन्दर भी उसके पीछे लग गया.
भोला को लगा जैसे कोई उसके पीछे चल रहा है. जब उसने पीछे मुड़ कर देखा तो पीछे एक बन्दर था. भोला अपने झोले में हाँथ डालकर रोटी के कुछ टुकड़े और मिठाई उस बन्दर को दे दी.
बन्दर बहुत खुश हुआ और उसे बड़े चाव से खा गया, लेकिन इतने में उसकी नियत नहीं भरी, उसे और खाना था. बन्दर भोला के फिर से पीछे चलने लगा.
अबकी बार भोला ने उसे रोटी नहीं दी बल्कि उसे पत्थर मार कर वहां से भगा दिया. बंदर वहां से भाग गया. भोला फिर से अपने रास्ते चलने लगा. कुछ दूर चलें के बाद उसे एक मन्दिर दिखाई दिया. भोला से सोंचा कुछ देर यहीं बैठ कर आराम कर लिया जाए.
भोला वहां बैठ गया, और आराम करने लगा. अँधेरा होने से पहले ही उसे घर पहुँचाना था, इसलिए वो मन्दिर में ज्यादा देर तक नहीं बैठा.
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जैसे ही वो फिर अपने रास्ते पर चला, उसे अपने रास्ते में कई सारे बन्दर दिखाई दिए, जो उसे ही घूर रहे थे. भोला इतने सारे बन्दर देखकर परेशान हो गया.
उसे डर भी लग रहा था. भोला वहीं रुक गया, बन्दर उसे पास आ रहे थे और भोला अपने कदम पीछे की ओर ले रहा था. पास बैठा एक संत ये सब देख रहा था.
उस संत ने जो से आवाज लगाई. अपने कदम पीछे न लो, बल्कि बंदरों का सामना करो और अपने घर जाओ. भोला वहीं रुक गया और हिम्मत करके आंगे चलने लगा.
बन्दर उसे आस पास घूमते रहे लेकिन कुछ किये नहीं. क्योंकि उन्हें भी डर लग रहा था कि कहीं भोला उन्हें मारे न.
और इस तरह भोला सही से अपने घर पंहुचा गया.
कहानी से सीख:- परेशानी जितनी भी बड़ी क्यों न हो उससे भागते नहीं, बल्कि उसका डट कर सामना करते हैं.
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