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आखिरी काम : एक प्रेरक प्रसंग-Best inspirational story of the year

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एक बुड्ढा कारपेंटर अपने काम के लिए काफी जाना जाता. उसके बनाए हुए लकड़ी के घर दूर-दूर तक प्रसिद्ध थे परंतु अब बुड्ढा हो जाने के कारण उसने सोचा क्यों ना बाकी की जिंदगी आराम से गुजारे और वह अगले ही दिन सुबह-सुबह अपने मालिक के पास जा पहुंचा और बोला- “ठेकेदार साहब! मैंने वर्षो तक आप की सेवा की है. अब मैं अपनी बाकी की जिंदगी आराम से गुजारना चाहता हूं इसलिए आप मुझे काम छोड़ने की आज्ञा दीजिए.”
कारपेंटर की यह बात सुनकर ठेकेदार को बहुत दुख हुआ. वह उसे सर्वाधिक प्रिय मानता था. उसने अगले ही दिन कारपेंटर को बुलाया और कहा- “ठीक है, तुम काम छोड़ सकते हो परंतु जाते-जाते तुम्हें एक आखरी काम करना होगा और एक घर बनाना होगा.”
ठेकेदार की यह बात सुनकर कारपेंटर अत्यधिक प्रसन्न हुआ और ठेकेदार को धन्यवाद देते हुए बोला कि जल्द ही वह अपना आखिरी काम पूरा करेगा.
जल्द ही कारपेंटर अपने आखिरी काम अर्थात घर बनाने में जुट गया. अन्य दिनों की अपेक्षा इस बार हुआ है उसे अपना आखिरी काम समझकर अंजाम दे रहा था. अन्य दिनों में वह घर बनाने के लिए लकड़ियों का चुनाव ध्यान से करता था परंतु इस बार काम को आखिरी समझकर वह जल्दबाजी करने लगा. जल्दी उसने अपना आखरी काम पूरा कर दिया अर्थात एक घर का निर्माण अन्य दिनों की अपेक्षा जल्दी ही कर दिया.
अब वह प्रसन्न भी हो रहा था कि अब वह आगे का जीवन खुशहाली से व्यतीत करेगा. यह सोचते हुए वह ठेकेदार के पास पहुंचा और बोला- “लीजिए ठेकेदार साहब! मैंने अपना आखिरी काम भी पूरा कर लिया है क्या मैं अब अपने घर की ओर प्रस्थान कर सकता हूं.”
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यह सुनकर ठेकेदार प्रसन्न होते हुए बोला- “आपने अपने जीवन का अधिकांश भाग मेरी सेवा में लगाया है. मेरा भी आपके प्रति निश्चित ही कर्तव्य बनता है. अब आपको अपने उस पुराने घर में जाने की कोई जरूरत नहीं है आप उसे छोड़ कर उसी घर में रह सकते हैं जिसका निर्माण अभी आपने किया है. यह आपकी वर्षो की मेहनत का इनाम है. जाइये आप अपने परिवार के साथ खुशहाली से रह सकते हैं.
कारपेंटर सुनकर स्तम्ब रह गया. वह मन ही मन सोचने लगा कि कहां मैंने लोगों के लिए एक से एक बढ़कर एक बढ़िया घर बनाए हैं और वहीँ जल्दबाजी में आखरी काम समझते हुए घटिया घर का निर्माण कर बेठा. अब शिवाय पछताने के उसके पास कुछ नहीं बचा था.

शिक्षा: इसी प्रकार हमें अपने जीवन में सभी कामों को सम्मान समझते हुए ही करना चाहिए. जल्दबाजी में गलत करने से हमें भविष्य में पछताना पड़ सकता है.
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