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सज्जन पुरुष की आदतें, जो आंखे खोल दें-Best Motivational Story In Hindi

Best Motivational Story In Hindi

सुबह-सुबह रोज मेरे कानों में गलियां गूंजा करती थीं. पता नहीं इस कलयूग में ये कैसी सुबह होती है. हमारे समय में तो भजन-आजान से सबुह हुआ करती थी, लोग सभी लोगों से बड़े सम्मान के साथ बात किया करते थे, लेकिन अब तो किसी के पास बातें करने का समय नहीं हैं. आज के कलयूग में भी कुछ अच्छे लोग हैं, तो सम्मान के साथ बातें करते हैं, लेकिन कुछ बहुत ही असभ्य लोग भी तो रहते हैं, जिनको मान सम्मान से कोई मतलब नहीं होता. इस तरह के लोग सिर्फ उन्हीं से अच्छे से बात करते हैं, जो इन लोगों से बड़े होते हैं, मलतब सिर्फ पैसों से. इस कलयूग में मान सम्मान सिर्फ उन्हीं के लिए है, जिसके पास रूपया और पैसा है. गरीबों को तो सिर्फ गलियां ही मिलती हैं.
मेरे घर के बगल में एक बहुत ही सज्जन पुरुष रहा करते थे, उनके पास रुपया-पैसा तो नहीं था, लेकिन ज्ञान बहुत ज्यादा था. वो फ्री में बच्चों को ज्ञान भी दिया करते थे. उनके विचार बहुत उच्च कोटि के होते थे. वो जब भी फ्री होते मेरे पास आ जाते. मुझे भी उनसे बातें करना अच्छा लगता था.
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उन्हीं के घर के सामने एक बहुत ही असभ्य इन्सान रहता था, जिसको सिर्फ पैसों की पड़ी रहती थी. वो न तो किसी से ठीक से बात करता था, और न ही मदद किया करता था. मैं तो उसकी तरफ देखता भी नहीं था. लेकिन मेरे घर के बगल में रहने वाले सज्जन पुरुष उससे रोज बातें किया करते थे, और रोज उनको गलियां सुनने को मिलती थीं.
सुबह दोनों एक ही समय पर घर से निकलते थे, सज्जन पुरुष रोज सुबह उस असभ्य इन्सान से नमस्कार करते, और वो इस नमस्कार का जवाब गलियों से देता. और मेरी सुबह गली सुनने के साथ होती, यही सब चलता रहा था,
एक दिन शाम को सज्जन पुरुष मेरे पास बैठे थे. उसी दिन मैंने उनसे पूछ ही लिया, कि आखिर वो उस असभ्य पुरुष से रोज नमस्कार क्यों करते हैं, जबकि वो जवाब में आपको गलियां सुनाता है. उन्होंने जो जवाब मुझे दिया, मेरे दिल में उनके लिए इज्जत और बढ़ गई, मुझे लगने लगा कि इस कलयूग में भी अच्छे इन्सान मिल जाते हैं.


उस सज्जन पुरुष ने बड़ी विनम्रता के साथ जवाब दिया कि जब वो असभ्य इन्सान मेरे लिया अपनी बुरी अददत को नहीं छोड़ सकता, तो मैं उसके लिए अपनी अच्छी आदत कैसे छोड़ दूँ.
आज के ज़माने में अगर हम किसी से गालियाँ दे कर बात करेंगे तो, वो भी हमसे उसी ही भाषा में बात करेगा. चाहे वो कितना भी सभ्य क्यों न हो, लेकिन ये सज्जन पुरुष ने अपनी आदत नहीं बदली.
कहानी से सीख: किसी बुरी आदत के लिए अपनी अच्छी आदतों को नहीं बदलना चाहिए.

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