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नजाकत-delicacy a new short sad love story in hindi language

नजाकत……
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संतोष के पिता बैंक में नौकरी करते थे, उनका तीन सालो के बाद एक जगह से दूसरे जगह ट्रांसफर हो जाया करता था, हलाकि उसने बचपन की पढ़ाई भोपाल में ही रह कर की थी, उसके पापा का ट्रांसफर आस-पास की जगहों में ही होता था, इसलिए उन्होंने अपना परिवार भोपाल में छोड़ रखा था। जब संतोष बड़ा हुआ और प्राम्भिक पढ़ाई पूरी कर लिया तो उसके पापा का ट्रांसफर सतना हो गया, वो अपने पुरे परिवार के साथ सतना शिफ्ट कर गए। सतना संतोष के लिए नयी जगह था, उसकी जान पहचान किसी के साथ नहीं थी, ना ही वह जिस मोहल्ले में आया था, वहां किसी को जानता था, इसलिए ज्यादातर समय वह अपने कंप्यूटर के साथ बिताता था, उसे बचपन से गाना सुनने का शौक था, वह किशोर दा और कुमार शानू का गाना सुना करता था। वैसे भी दोनों के रोमांटिक गानो का कोई तोड़ नहीं था, इसलिए वह अपने कंप्यूटर में कुमार सानू का रोमांटिक गाना लगा कर स्पीकर में सुन रहा था, गाने का वॉल्यूम थोड़ा तेज होने की वजह से पास के मकान में रहने वाले भी शायद सुन रहे थे, क्योँकि संतोष ने जब एक गाना को अधूरा ही बदला तो उसे खिड़की से आवाज आयी, कितना अच्छा गाना था, क्यों बदल दिया, यह आवाज किसी लड़की की थी, जिस सुन कर संतोष चौंक गया, और वह अपने खड़की से झांक कर देखा तो पड़ोस में रहने वाली लड़की ने ऐसा बोला था, हलाकि उस लड़की का चेहरा वह साफ़ साफ़ नहीं देख पाया था. शाम को वह जब बाहर निकला तो लड़की अपने छत पर घूम रही थी, संतोष को देखते ही लड़की ने सीधा सीधा कह दिया, इतना अच्छा गाना बजाते हो की दिल खुश हो गया सुन कर, लेकिन बिच में ही क्यों बदल देते हो? संतोष ने कहा, उससे भी अच्छा गाना सुनने का दिल किया इसलिए, लड़की हॅसने लगी, फिर धीरे धीरे उन दोनों में बात चीत शुरू हुई, लेकिन संतोष उस लड़की से बहुत कम ही बात किया करता था, चूँकि उसे मालूम था की तीन सालो के बाद उसे वह जगह छोड़नी पड़ेगी , और वह बहुत जल्द दिल्ली चला जाएगा, इसलिए वह उस लड़की से ज्यादा बात नहीं करता था, हुआ भी वही कुछ दिनों के बाद संतोष दिल्ली चला गया, लेकिन दिल्ली में 6 महीने रहने के बाद अचानक से उसकी तबियत खराब हो गयी और वह वापस सतना आ गया, जहाँ वह लड़की उसे देख कर खुश हो गयी, लेकिन संतोष ने उसकी ख़ुशी की तरफ ध्यान नहीं दिया, शायद इसलिए क्योँकि उसकी तबियत सही होते ही वह वापस दिल्ली चला जाता, उसे सतना में रहने का बिलकुल दिल नहीं करता था, हलाकि उस लड़की की तरफ से उसे इशारा मिल रहा था, वह लड़की संतोष के साथ दोस्ती करना चाह रही थी, लेकिन संतोष ने कभी दिलचसपी नहीं दिखाई यही वजह था की उसे उस लड़की का नाम भी नहीं मालूम था। खैर, उसे ठीक होते होते एक महीना लग गया, और इस एक महीने में उस लड़की ने कई बार संतोष से बात की, लेकिन संतोष अभी तक यह समझ नहीं पाया था की वाकई लड़की उसे पसंद करती है, या सिर्फ पडोसी ही है, अब संतोष की मम्मी और उस लड़की की मम्मी के बिच दोस्ती भी हो गयी थी, दोनों का एक दूसरे के घर आना जाना भी शुरू हो गया था, लेकिन कभी संतोष उसके यहाँ नहीं गया ना ही वह लड़की कभी उसके घर आयी, इसलिए संतोष ने कभी उस लड़की की तरफ ध्यान नहीं दिया। ठीक होने के बाद वह वापस दिल्ली चला गया, करीब एक साल के बाद वह वापस सतना आया, तो उसे लड़की थोड़ा परेशान नजर आ रही थी, संतोष को समझ में नहीं आ रहा था की आखिर वह लड़की इतना परेशान क्यों है, तभी उसे घर पर एक शादी का कार्ड नजर आया, संतोष ने पूछा, किसके शादी का कार्ड है?
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इस पर मम्मी ने कहा की, पड़ोस की लड़की का शादी का कार्ड है, डेट देखने पर पता चला की कल ही शादी है, अब संतोष को आस्चर्य हुआ की कल शादी है, लड़की को खुश होना चाहिए था, तो वह परेशान है, खैर वह कुछ नहीं बोला और गाना सुनने लगा, तभी आवाज आयी की बंद करो, गाना सुनने का क्या फायदा , जब कोई फीलिंग ही ना हो, यह सुन कर संतोष घर से बाहर निकला तो लड़की छत पर खड़ी थी, वह चुप चाप लड़की को देखने लगा, लड़की की आँखों में उसे उदासी दिखी। शादी की शाम सभी खुश थे, संतोष की मम्मी भी उस लड़की के यहाँ गयी थी, तभी संतोष के पापा बैंक से आ गए, संतोष अपनी मम्मी को बुलाने उस लड़की के घर गया,आज पहली बार वह उसके घर गया था, जहाँ उसकी मुलाकत शादी के जोड़े में उस लड़की से हुई, आज पहली बार वह उस लड़की को इतने करीब से देखा था, लड़की ने संतोष को देखा तो उसके चेहरे पर ख़ुशी दौड़ गयी, अब तो संतोष कुछ समझता, उससे पहले उसकी मम्मी आ गयी और उसने कहा की पापा आ गए हैं घर चलो, मम्मी जाने लगी तो लड़की ने संतोष से कहा, तुम मेरे लिए नहीं आये थे….इतना सुनना था की संतोष आश्चर्य से उसकी तरफ देखने लगा, उसकी समझ में कुछ नहीं आ रहा था, क्या वह लड़की उसे प्यार करती थी, फिर उसने इजहार क्यों नहीं किया ? उसे अभी तक महसूस क्यों नहीं हुआ? खैर अब क्या हो सकता था, अब तो बारात भी आ चुकी थी, संतोष वापस अपने घर लौट गया, और लड़की की शादी हो गयी

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