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do nayi gajab ki prernadayak kahaniyaan

1.
(क्या हमारे माता-पिता हमे आगे बढ़ने से रोक रहे है)


एक बार की बात है एक पिता अपने सात साल के बेटे के साथ पतंग उड़ा रहे थे।पतंग काफी उचाई छू रही थी।वो लगभग बदलो को छूती हुई हवा के साथ लहरा रही थी।कुछ समय बाद बेटा पिता से बोला “पापा हमारी पतंग धागे की वजह से ऊपर नही जा रही हमे इस धागे को तोड़ देना चाहिए। इशके टूटते ही हमारी पतंग ऊपर चली जाएगी
पिता ने तुरन्त ऐसा ही किया।उन्होंने धागे को तोड़ दिया।फिर कुछ ही देर में पतंग और ऊपर जाने लगी। पुत्र के चेहरे पर खुशी दिखाई दी पर ये खुशी कुछ पल के लिए ही थी क्योंकि वह पतंग थोड़ी ऊपर जाने के बाद खुद ब खुद नीचे आने लगी और कही दूर जमीन पर आके गिर गयी।
यह देख पिताने बेटे को कहा “पुत्र जिंदगी की जिस उचाई पर हम है वहा से हमे अक्सर लगता है कि कुछ चीजें जिस से हम बंधे हुये है वो हमें उचाईयों पर जाने से रोक रही है।जैसे कि हमारे माता,पिता,अनुसासन,हमारा परिवार आदि।इसलिए हम कई बार सोचते है कि शायद में इसी वजह से sucess नही हो रहा।मुझे इस से आजाद होना चाहिए।
जिस प्रकार से वह पतंग उस धागे से बंधी हुई रहती है उसी तरह से हम भी इन रिस्तो से बंधे हुये हैlवास्तव में यही वो धागा होता है जो पतंग को उचाईयों पर ले जाता है ।हाँ जरूर तुम ये धागा तोड़ के यानी की अपने रिश्ते तोड़ के उचाईयों को छू सकते हो लेकिन उस पतंग की तरह ही कभी ना कभी कट कर नीचे गिर जाओगे।
पतंग तब तक उचाईयों को छूती रंहेंगी जब तक पतंग उस डोर से बंधी रंहेंगी।ठीक इसी तरह से हम जब तक इन रिश्तों से बंधे रंहेंगे तब तक हम उचाईयों को छूते रंहेंगे।क्योंकि हमारे जीवन मे सफलता रिश्तों के संतुलन से मिलती है।

Moral
इस कहानी से में बस आपको यही समझना चाहता हूँ कि हमारे माता पिता हमे आगे बढ़ने से बिल्कुल रोक नही रहे बस वो रोक टोक करके उस धागे को टूटने से बचाना चाहते है।क्योंकि वो जानते है कि आप इस धागे को तोड़ के उचाईयों को नही छू सकते।

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2.
(फुटा घड़ा )
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बहुत समय पहले लोगो के घर आज की तरह पानी के नल नहीं हुवा करते थे।लोग दूर तक पैदल ही पानी भरने के लिए जाया करते थे।
ऐसे ही किसी गाँव में एक गरीब किसान रहता था।वह पानी भरने के लिए रोज सुबह उठ कर जाता और शाम को घर लोट आता था।उसका daily का routine यह था।उसके पास दो घड़े थे पर उसमे से एक घड़ा फुटा हुवा था।वह दोनों घड़ो को डंडे के किनारे पर बांध देता और आपने कंधे पर उठा कर ले जाता था।पर एक घड़ा फुटा होने के कारण घड़ा का आधा पानी रास्ते मै ही गिर जाता था पर इस बात का किसान को कभी अफसोश नहीं था।
किसान की मेहनत बेकार जाती यह देख फुटा घड़ा बड़ा उदास हो गया।और दूसरे घड़े से बोला “किसान कितनी मेहनत करता है और में उसकी सारी मेहनत ख़राब कर देता हूं।वो सुभा सुभा दूर तक पानी लेने जाता है और मेरी वजह से वह दो घड़े के पानी की जगह डेढ़ घड़ा ही पानी ला पता है।” यह कह कर वह अपने को कोसने लगा।दूसरा घड़ा बोला मे तो किसान की मेहनत को बिलकुल ख़राब नहीं होने देता।मे पूरा घड़ा पानी लाता हु।
एक दिन जब किसान सुबह घड़ा उठा कर जा रहा था तभी फुटर घड़े ने बोला “हे किसान मुझे तुम माफ़ कर दो।मे तुम्हारी मेहनत ख़राब कर देता हूं।तुम रोज मेरे में पानी भर कर लाते हो पर मेरे फूटे होने की वजह से तुम्हारा आधा पानी रास्ते में ही गिर जाता है।कृपा करके मिझे माफ़ कर दो।” और यह कह कर फुटा घड़ा उदास हो जाता है।
यह सुन किसान बोला “अरे मुझे पता है कि तुम्हारा पानी रास्ते में ही गिर जाता है।तुम्हे माफ़ी मांगने की कोई जरुरत नहीं है।तुम उदास न हो आज जब में घर लौटूंगा तब तुम उन रास्ते पर लगे हुए फूलो को देखना।”
घड़े ने ठीक ऐसा ही किया जब शाम को किसान घर लोट रहा था तब उसने रास्ते में लगे फूलो को निहारता रहा।पर वह देख रहा था कि अभी भी उसका पानी गिर रहा है।थोड़ी देर के बाद जब वह घर लौटा तो फूटा घड़ा बोला “किसान मिझे माफ़ कर दो आज फिर से मे तुम्हारे लिए पूरा घड़ा पानी नहीं ला सका।मुझे माफ़ कर दो।”
यह सुन किसान बड़ा उदास हो गया और बोला “तुमने उन फूलो को अच्छी तरह से नहीं देखा।वह सारे फूल तुम्हे ही देख कर मुस्कुरा रहे थी।क्योंकि तुम्हारी वजह से है वह फूल खिले हुए थे।तुमने ही उनको जीवनदान दिया है।मुझे पता था कि तुम्हारे घड़े में से पानी गिर जाता है इसलिए मेने रास्ते में फूल के बीज बो दिए थे।और तुम्हारे घड़े के पानी की वजह से ही वह बड़े हुए है।यह सुन घड़ा बहुत प्रसन्न हो गया।

Moral
दुनिया में की कोई पूर्ण नहीं है.सबके अन्दर कुछ ना कुछ कमिय जरुर होती है.लेकिन दोस्तों अपनी कमियों को कमजोरियां ना बनने दे.ये कमिय ही इन्सान को अनोखा बनती है,ये कमिय ही है जो हमे दूसरो स अलग बनाती है.अपने अन्दर अपनी कमियों को अपनी ताकत बनाये.जय हिन्द.
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