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ना जाने कहाँ और कैसे-Don’t know where and how a new short inspirational Story

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ना जाने कहाँ और कैसे -किसी जमाने में एक आदमी था जो अकेला और कुंवारा था। एक दिन वह शिकार पर निकला। पर एक भी शिकार हाथ नहीं लगा। वह घर लौट रहा था कि अचानक एक पेड़ पर एक कबूतरी बैठी दिखी। उसने कबूतरी को तीर से बींध डाला /उसका गर्दन मड़ोड़ने वाला ही था की उस कबूतरी ने इंसानी आवाज में कहा -मुझे मत मारो। मुझे ज़िंदा ले जाओ और खिड़की पर रख दो। बस हों ही मैं ऊँघने लागूं तुम तुम जोर से अपना दायां हाथ जमा देना ,तुम्हारी किस्मत का सितारा चमक उठेगा। वह उसे घर ले गया थोड़ी देर इंतज़ार करने के बाद जैसे ही कबूतरी ऊँघने लगी वह जमीं पर गिरी और शाहजादी मारिया बन गई। उसने शादी करने को कहा। उसने शादी कर भी ली। पर तीरंदाज़ अब भी जंगल की तरफ जाता और जंगली मुर्गों का शिकार करता। हम बहुत गरीबी की जिंदगी जी रहे हैं अगर तुम सौ रूबल उधार लेकर मुझे रेशमी धागा खरीद कर ला दो तो मैं ऐसा उपाय करुँगी कि हमारी जिंदगी सुधर जाए.उसने धागे खरीद कर ला दिए। वह रात भर बुनती रही। उसने ऐसा लाजवाब कालीन बना जिसे दुनिया ने पहले कभी नहीं देखा था .उस कालीन में सभी कुछ दृश्य उकेरे गए थे। सुबह पत्नी ने कहा -इसे सौदागरों की गली में जा कर बेच दो पर ख्याल रखना कि तुम अपनी तरफ से कोई कीमत नहीं लगानावेजो दें ,चुपचाप ले लेना। जल्द ही उस कालीन को खरीदने के लिए सौदागरों की भीड़ लग गई। सभी उस कालीन की कारीगरी देखकर हैरान थे पर कोई भी उसकी सही कीमत नहीं लगा पा रहे थे तभी ज़ार का सलाहकार वहाँ पहुंचा उसने पूछा -सच -सच बता ऐ तीरंदाज़ ये अद्भुत कालीन तुम्हे कहाँ से मिला ? मेरी बीबी ने बना है -उसने कहा। ये लो दस हज़ार रूबल उसने कालीन ज़ार को दिखाई। ज़ार ने उसे बीस हज़ार रूबल देकर कालीन रख लिया। वह फिर तीरंदाज़ के पास पहुंचा। दरवाज़ा खुलते ही वह अचंभित रह गया। वह सकते में था। उसके सामने एक ऐसी सुंदरी खड़ी थी जिसे अगर वह जिंदगी भर भी देखता रहे तो भी उसकी आँखों की प्यास ना बुझे। वह जब कुछ भी नहीं बोला तब उसने दरवाज़ा बंद कर लिया। उसने उस खूबसूरत महिला के बारे में ज़ार को बताया जिसकी याद में उसे भूख प्यास भी नहीं लग रही थी। ज़ार ने सूना तो वह भी उस तीरअंदाज़की बीबी को देखने निकल पड़ा. उसने उस पारी को देखा और उसके कुछ नहीं बोलने पर शाहजादी ने उसे बाहर किया और दरवाज़ा बंद कर दिया।
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उसने वापस महल पहुंचकर तीरंदाज़ की बीबी को चीन लेने का इरादा बनाया। मैंने तीरंदाज़ से छुटकारा पाने के लिये एक रास्ता ढूंढ लिया है अन्नदाता – उसने तीरंदाज़ को बुलाया और कहा कि तुम दूसरी दुनिया में जा कर मालूम करो कि मेरे पिताजी का कैसा हाल है। अगर तुम नहीं जाओगेतो तुम्हारा सर धड़ से अलग कर दूंगा। तुम इतने उदास क्यों हो ,तीरंदाज़ की बीबी ने पूछा। सुबह होते ही उसने उसे सुखारी से भरे थैला और सोने की अंगूठी दी। उसने बताया कि ज़ार से एक सलाहकार को साथ लेने को कहे और उसे सोने की अंगूठी देकर दुसरी दुनिया भेज दे। उसने ऐसा ही किया। वह आदमी लौटकर आया ही नहीं और कुछ दिनों बाद वह ज़ार से मिलकर कहा की उसके पिताजी अच्छे से हैं। इस प्रकार ज़ार की कुटिल चाल सफल नहीं हो पाई।

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