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संगत का असर-effect of company a new short inspirational story of bird and her childs

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एक समय की बात है एक चिड़िया अपने दो बच्चों के साथ एक विशाल पेड़ पर रहती थी। एक रात जोरों की आंधी आई। चिड़िया इस आंधी में पेड़ से गिर कर मर गई। बिजली कड़क रही थी दोनों बच्चे एक दूसरे से जुदा हो गए। तेज़ आंधी में विशालकाय पेड़ भी धराशायी हो गया। और वे दोनों बच्चे जंगल के दूसरे भाग में बह गए। एक चिड़िया का बच्चा डकैतों के नज़दीक पहुँच गया तो दूसरा एक ऋषि के आश्रम के पास पहुँच गया। एक दिन एक राजा शिकार पर निकला। एक हिरन का पीछा करते -करते वह थक चुका था। वह डकैतों के गुफा के पास एक पेड़ के नीचे थोड़ा आराम करने के लिए बैठ गया। राजा ने तभी एक भूरे रंग की पक्षी की आवाज़ सुनी। वह डकैतों को राजा को लूटने के लिए आवाज़ लगा रहा था। राजा अविलम्ब उस जगह से उठा और घोड़े पर सवार होकर वहाँ से चल दिया। वह चलते -चलते ऋषिके आश्रम के पास पहुंचा। राजा ने वहाँ भी उसी भूरे रंग की समान पक्षी को देखा। उसने पक्षी की आवाज़ को सुनी। पक्षी की आवाज़ बहुत ही मृदुल थी । यह चिड़ियाँ राजा को कह रही थी कि ऋषि की आने तक वह आश्रम के भीतर जाकर विश्राम करे। उस चिड़ियाँ ने कहा कि वह चिड़ियाँ उसका ही भाई है और उसने डकैतों की भाषा सीख ली है। जब ऋषि आश्रम आये तब राजा ने सारी कहानी सुनाई। ऋषि ने कहा कि यह सब संगत का असर है। संसर्गे गुणाः दोषाः। जिसके कारण दोनों भाई पक्षी पर अलग -अलग असर हुआ है। इसलिए इसमें पक्षी का कोई दोष नहीं है। वह तो वही दुहरा रहा है जो बचपन से उसने सूना।
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और एक कड़वा सत्य-कांच पर पारा चढ़ाओ तो आईना बनता है ,और किसी को आईना दिखा दो तो उसका पारा चढ़ जाता है। बड़ी -बड़ी बातें करनेवाले ,बातों में ही रह जातें हैं और हलके से मुस्करानेवाले ,बहुत कुछ कह जाते हैं। वेद कहता है कि जीवन को सुखमय बनाने के लिए दम्पति में आस्तिकता हो। कुछ नैतिक कर्तव्य हैं जैसे ,सत्य भाषण ,संयमी होना एवं दान करना जिनका दम्पति के जीवन में होना जरूरी है। अथर्वेद कहता है कि दोनों के ह्रदय परस्पर मिले हुए हों। अंतः कृष्णुस्व मां हृदि। दोनों का प्रेम प्रबल हो और ऐश्वर्य प्राप्त करें। वर्त्तमान समय में दम्पति यदि इन मूल्यों का अंश मात्र भी अनुसरण करें तो पारिवारिक विघटन तथा समाज में नैतिक मूल्यों के गिरावट को रोका जा सकता है।

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