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अहंकार-Ego a new short inspirational story of an elephant and a mosquito

Ego a new short inspirational story of an elephant and a mosquito
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-एक मच्छर हाथी को एक पुल से गुजरते देखा। और उसने उस विशाल हाथी के ऊपर सवारी करने की ठानी। मच्छर ने हाथी से कहा -हेलो दोस्त ,,क्या मैं तुम्हारे पीठ पर बैठ सकता हूँ ,?इस तरह से तुम्हे एक कंपनी भी मिल जायेगी और इस तरह से पुल क्रॉस करना आसान हो भी हो जाएगा। हाथी ने कुछ नहीं कहा। मच्छर हाथी के पीठ पर बैठ चुका था। उसे बहुत अभिमान हो रहा था कि आज उसका एक सहयात्री हाथी जैसा विशाल जानवर है। जब दोनों पुल पर से गुजर रहे थे तभी मच्छर जोर से चिल्लाया – धान दो मेरे भाई ,हम दोनों बहुत ही भारी हैं ऐसा नहीं हो कि हम दोनों के भार से पुल धराशायी हो जाय . इस बार भी होती ने कुछ नहीं कहा। जब दोनों पुल से गुजर गए तब मच्छर ने कहा -देखो ,मैंने कितनी अच्छी तरीके से तुम्हे गाइड किया। हाथी चुप ही रहा। अंत में मच्छर उसकी पीठ से उड़ा और जोर से भनभनाया। यह है मेरा बिजनेस कार्ड , यदि भयिष्य में मेरी कोई जरूरत पड़े तो सेल फ़ोन पर मुझे कॉल जरूर करना। हाथी को लगा जैसे उसने कहीं से कुछ सूना हो। पर वह इसे दिवास्वप्न समझ कर आगे बढ़ गया। आप भी उसी हाथी की तरह हैं जिनमे असीमित गुण हैं और आपका अपने जीवन पर पूर्ण नियंत्रण है। आप जब भी आगे बढ़ेंगे इन मच्छरों द्वारा आपका ध्यान भटकायेंगे। ,आपकी व्यर्थ की आलोचना करेंगे। आपकी खुशियों का कोई और नहीं आप स्वयं ही मालिक हैं। इसलिए इन मच्छर रूपी आलोचकों से भरसक दूर ही रहिय क्योंकि यही मच्छर हमारी बैचैन अहंकार है। जो हमेशा हमारी एकाग्रता को भटकाता है। इसलिए सावधान रहिये। ज्ञान गंगा -जिंदगी गुजर गई ,सबको खुश रखने में – जो खुश हुए वो अपने नहीं थे ,जो अपने थे वो कभी खुश नहीं हुए — कुछ कह गए ,कुछ सह गए , कुछ कहते -कहते रह गए मैं सही ,तुम गलत के खेल में ,ना जाने कितने रिश्ते ढह गए। कीमती तीतर – बाज़ार में एक चिड़ीमार तीतर बेच रहा था। एक छोटी जालीदार टोकरी में सिर्फ एक ही तीतर था जबकि दूसरे टोकरी में बहुत सारे तीतर थे। एक ग्राहक ने पूछा -कितने के एक तीतर। ? 40 रुपये की।
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उसने छोटी टोकरी मे इकलौते तीतर की कीमत पूछी। मैं इसे बेचना नहीं चाहता। लेकिन अगर आप जिद करोगे तो इसकी कीमत 1000 रुपये होगी। इसमें क्या खासि यत है जो इतनी कीमत है -ग्राहक ने पूछा। यह मेरा पालतू तीतर है। और यह चीख पुकार कर दूसरे तीतरों को बुलाता है। और जाल में फ़साने का काम करता है। और मैं आसानी से इनसबों का शिकार कर लेता हूँ। और बतौर इनाम इसे इसकी मनपसंद खुराक दे देता हूँ जिससे यह खुश हो जाता है। इसलिए इसकी कीमत ज्यादा है . उस आदमी ने उस तीतर को खरीद लिया औरउस चिड़ीमार के सामने ही सरेआम गर्दन मड़ोड़ दी। उसने पूछा -अरे भाई साहब आपने ऐसा क्यों किया ? ऐसे दगाबाज़ को ज़िंदा रहने का कोई हक़ नहीं है। जो अपने हित के लिए अपने ही समाज को फंसाने का काम करे और अपने लोगों को धोखा दे। और ऐसे हज़ारी तीतर अपने देश में बहुत मिल जायेंगे।

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