ga('send', 'pageview');
Articles Hub

व्यथित ह्रदय-emotional heart a new short inspirational story in hindi language

व्यथित ह्रदय
emotional heart a new short inspirational story in hindi language,inspirational story in hindi,inspirational story in hindi for students, motivational stories in hindi for employees, best inspirational story in hindi, motivational stories in hindi language
वह एक गृहपति था। उसका एक लड़का था प्राणो से भी प्यारा ,दुलारा उसकी आँखों की पुतली था वह। उसी को देखकर वह जीता था। दुर्भाग्यवश वह लड़का इस संसार से चल बसा। गृहपति उसके विछोह में पागल सा हो गया। एक दिन वह श्रावस्ती जहां भगवान् बुद्ध वास करते थे ,जा पहुंचा। वह भगवान् के पास चुपचाप बैठ गया। बुद्ध बोले -गृहपति ,तेरी इन्द्रियों में कुछ चंचलता दिखाई देता है क्या कुछ विकार उतपन्न हो गया है ? महाराज ,मेराप्यारा एकलौता बेटा मेरी सुख की दुनिया उजाड़कर इस संसार से चला गया उसी के शोक में गली -कूंचों का भ्रमण कर रहा हूँ मैं उसी के वियोग में मर रहा हूँ , ठीक है गृहपति ,भगवान् बुद्ध ने कहा -इस संसार में दुःख ,शोक सब विपत्तियां भी अपनी प्यारी वस्तुओं से ही उतपन्न हुआ करती हैं। गृहपति यह सुनकर चौंका ,कहा ,-ऐसा क्यों महाभाग ,भला कहीं प्रिय वस्तुओं से शोक ,दुःख विपत्ति भी होती है ? वह वहाँ से चल पड़ा। बिना भगवान् को प्रणाम किये ही। रास्ते में उसे जुवारियों का एक अड्डा मिला। जुवारी क्रीड़ा में मस्त थे। उसने निंदा के स्वर में कहा -भला देखो गौतम कहते हैं कि सारे शोक ,विपत्तियां प्रिय वस्तुओं से ही हुआ करती हैं। सभी जुवारी हंस पड़े। तुम ठीक कहते हो गृहपति ,प्यारी वस्तुएँ संसार में सुख और आनंद के लिए है। उनसे दुःख और शोक की कल्पना करना निरि मूर्खता है। वह गौतम के विचारों के विरुद्ध प्रचार करने लगा। बात फ़ैल गई यह बात राजा प्रसेनजित के कानो में पड़ी उन्होंने पुजारिन मल्लिका से इस वक्तब्य के बारे में पूछा।
और भी प्रेरक कहना पढ़ना ना भूलें==>
लत है छुटती नहीं-A new short inspirational story on the habit of drinking
अघोरपंथ-A new short and simple article on aghories and their lifestyle
राजपूत कैदी-Escaping prisoner a new short inspirational story in hindi language
emotional heart a new short inspirational story in hindi language,inspirational story in hindi,inspirational story in hindi for students, motivational stories in hindi for employees, best inspirational story in hindi, motivational stories in hindi language
मल्लिका ने कहा -महाराज अगर ऐसा भगवान् बुद्ध ने कहा है तो ठीक ही कहा होगा। गौतम जो भी कहे तुम उसका अनुमोदन करती हो राजा ने कर्कश स्वर में कहा। यह सब तेरा भ्रम है। मल्लिका वहाँ से हट गई उसने णालीजंघ नामक ब्राह्मण को बुलाकर भगवान् बुद्ध के पास भेजा। यह पूछने कि प्रिय वस्तुवें शोक का कारण कैसे बन सकती हैं ? भगवान् ने ब्राह्मण से कहा -यह सत्य है इसी श्रावस्ती में कुछ दिन पूर्व एक स्त्री की माता मर गई। उसके वियोग में वह विक्षिप्त सी हो गई है। वह सभी से यहां तक कि पेड़ों से भी पूछती है कि क्या तुमने मेरी माता को देखा है ? इसी तरह एक स्त्री अपने पीहर गई ,वहाँ उसके भाई -बंधू उसके पति से छीनकर दूसरे के हवाले करना चाहते थे ,स्त्री को यह कतई स्वीकार नहीं था । उसका पति यह सोचकर कि स्वर्ग में हम दोनों एक साथ हो जाएंगे अपनी स्त्री को मारकर खुद की भी जान ले ली। बुद्ध की बातों को सुनकर नालीजंघ संतुष्ट हुआ और मलिक्का को सारी बातें बताई। उसने महाराज से कहा -आपकी प्रिय पुत्री वज्जनी आपको प्यारी लगती है ना ? हाँ वह तो मेरी आँखों की पुतली है। क्या उसपर विपत्तियों का आक्रमण हो तो आप दुखी नहीं होंगे ? इसी प्रकार उसने राजा के प्रिय व्यक्तियों के बारे में पूछा। दुःख भी होगा और हो सकता है मेरे जीवन का अंत भी हो जाए -राजा ने कहा , महाराज अब तो भगवान् बुद्ध की कही हुई बात समझ में आई ना ?उनका उपदेश हमेशा जीवन की कसौटी पर खरी उतरती हैं। आइये हम सब उसी तरफ मुंह करके उन्हें प्रणाम करें। इस हार्दिक भक्ति को देखकर भक्ति भी मन ही मन ईर्ष्या करने लगे तो आश्चर्य क्या ? [डिजिटल लाइब्रेरी ऑफ़ इंडिआ से साभार ]

मैं आशा करता हूँ की आपको ये story आपको अच्छी लगी होगी। कृपया इसे अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ फेसबुक और व्हाट्स ऍप पर ज्यादा से ज्यादा शेयर करें। धन्यवाद्। ऐसी ही और कहानियों के लिए देसिकहानियाँ वेबसाइट पर घंटी का चिन्ह दबा कर सब्सक्राइब करें।

Tags-emotional heart a new short inspirational story in hindi language,inspirational story in hindi,inspirational story in hindi for students, motivational stories in hindi for employees, best inspirational story in hindi, motivational stories in hindi language

80%
Awesome
  • Design
loading...
You might also like