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प्रशंसा-four very short entertaining stories in hindi language

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अपनी प्रशंसा किसे अच्छी नहीं लगती ?किसी आपराधिक प्रवृति के लोगों को अगर कहें कि लोग आपके बारे में कहते हैं कि आप कितने अच्छे हो। समाज हित में आपका कितना नाम है आपकी सहृदयता के सब कायल हैं। -इन सब बातों को सुनकर शायद ही वह खुश हो। बल्कि ये कहें कि आप से लोग कितना डरते हैं। लोग आपका नाम सुनकर भय से कांपने लगते हैं तो वे खुश होंगे. क्रियात्मक विचारों से ही मानसिकता का पैमाना निश्चित होता है

[२]औकात -एक औरत बुरी तरह से पिटती हुई तड़प रही थी। पडोसी को उस पर दया आ गई। उसने उसके पति को कहा -‘क्यों भाई ,क्यों एक अबला पर ऐसे जुल्म ढा रहे हो ? देखो तो यह कितनी जख्मी हो गई है ?पति ने कहा ,’भाई साहब ,यह अबला नहीं है। यह मुझसे ज्यादे कमाती है। इसमें इस एहसास से घमंड ना हो जाये इसलिए कभी -कभार दो -चार हाथ जमाने पड़ जाते है ,ताकि यह अपनी औकात में रहे। मगर आप अपना वक़्त क्यों व्यर्थ में जाया कर रहे हैं ,अपने बहन -बेटियों के लिए बचा कर रखिये।
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[३]सुरक्षा -एक लड़की ने कहा-शादी से पहले मैं कितनी स्वतंत्र थी ,कॉलेज में क्या करती थी ,कोई नहीं पूछता था। लेकिन शादी के बाद तो बस पिंजरे में कैद हो गई हूँ। इस फ़रियाद को सुनकर पिंजरे का पक्षी पुकार उठा -,’है ,हेलो ,है हेलो .भाई साहब ये ,बोलनेवाला पक्षी कब ले आये ?’बस कल ही लाया हूँ। पता नहीं क्यों आज़ाद रहनेवाले पक्षी को लोग पिंजरे में क्यों रखकर पालते हैं ?तपाक से उत्तर मिला यानी फरियादी के पति की -,”कुछ जानवरों का जन्म कैद में ही रहने के लिए होता है। क्योंकि वे वहीँ ज्यादे सुरक्षित ढंग से रहते हैं ,.

[३]ममता -आधुनिक जगत में ममता का स्वरुप किस कदर बिगड़ गया है और लोग कितने संवेदनशून्य हो चुके है उसकी एक झलक इस छोटी सी कहानी में मिलता है। -,मुझे एक जरूरी मीटिंग में शरीक होने के लिए लेडीज क्लब जाना है। बाबा अगर उठ जाये तो उसे खिलौनों से बहलाना .,अगर फिर भी रोये तो उसे टॉफ़ी खिला देना ,बाबा फिर सो जाएगा। ‘समय अपनी पंख फैलाये उड़ता रहा तीस साल गुजर गए। वृद्ध माता -पिता अपने एकलौते बेटे को डीएडिक्शन सेंटर ले जा रहे थे। मशहूर मनःचिकित्सक ने जब उस युवक के माता से जानना चाहा की आखिर उनके बेटे को नशे की बुरी लत कैसे पड़ी तो माँ के अपराधबोध से अश्रु -धारा फूट पड़ी । वह कुछ पलों के लिए खामोश हो गयी पति ने अब माँ के ममता को छलकते देखा और अपनी पत्नी पत्नी की ओर कारुणिक दृष्टि से देखा। उसे अब समझ में आया कि बच्चों को माता -पिता का स्नेह और देखरेख कितना आवश्यक होता है।

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