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कान्वेंट स्कूल.- funny news in hindi for students

funny news in hindi for students

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हम एक से बढ़कर एक funny जगत की story प्रकाशित करते हैं। पेश है इसी कड़ी में आज हम “कान्वेंट स्कूल”funny news in hindi for students प्रकाशित कर रहे हैं . आशा है आपको ये खबर पसंद आएगी
आज कल कान्वेंट स्कूल का जमाना है, हमारे समय में तो कान्वेंट स्कूल हुआ ही नहीं करते थे. सरकारी स्कूल में ही पढ़ाई होती थी, वहीँ से पास किया और सरकारी जॉब मिल गया. आज कल तो बचपन से ही बच्चो को कान्वेंट स्कूल में डाल दो, वरना बच्चा पढ़ने में कमजोर हो जाएगा, वर्मा जी शर्मा जी को बता रहे थे. वर्मा जी को तकलीफ इस बात की थी की उन्होंने अपनी पूरी पढ़ाई में जितनी खर्च की थी वो तो अब एक साल में खर्च हो जाती है. अब तो बचपन से ही स्कूल में डोनेस्शन शुरू हो जाता है, पहले ऐसा कुछ नहीं था, स्कूल में बच्चे पुरे नजर नहीं आते थे, ना ही फीस ज्यादा था, स्कूल दूर होने के बाबजूद भी पैदल जाना होता था, अब तो स्कूल जाने के लिए स्कूल बस का पैसा अलग दो. ऊपर से पहले एक ड्रेस में ही काम चल जाया करता था अब तो सप्ताह में 3 अलग अलग रंग ड्रेस पहनने को दिया जाता है, किताब कॉपी की तो कोई सीमा ही नहीं है, उस पर कभी इस प्रोग्राम के नाम पर पैसे तो कभी किसी और प्रोग्राम के नाम पर पैसे लिए जाते हैं. वर्मा जी ने भी शर्मा जी के बातो में हाँ में हाँ मिलाया, यह सच्चाई थी कान्वेंट स्कूल की. सही तो कह रहे थे शर्मा जी. अब तो सरकारी सचुल में पढ़ाई ही नहीं होती है, इसलिए तो बच्चो को कान्वेंट स्कूल में पढ़ाया जाता है. एक दिन शर्मा जी ऑफिस से पहले घर आ गए, उन्होंने बच्चो को अंग्रेजी में कुछ याद करते हुए सुना, उनका छोटा बेटा, तेजी से अंगेरजी में बोल रहा था,

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सुन कर अच्छा लगा, सोचा जो भी हो पैसा सफल जा रहा है, क्योँकि बच्चा अंग्रेजी तो पढ़ रहा है,बोल रहा है, पैसा वसूल हो रहा है, वो फिर सोच में डूब गए उनके समय तो अंगेरजी की पढ़ाई होती ही नहीं थी, हाँ इतना था की जितनी पढ़ाई होती थी पूरी होती थी, ठोस होती थी, याद रह जाती थी, शिक्षक भी अच्छे से समझाते थे. अचानक उनका ध्यान टुटा, क्योँकि बेटा कुछ गलत पढ़ रहा था, उन्होंने बेटा से कॉपी मंगवाया, तो देखा की बेटा अपने कॉपी से 10 लाइन रट रहा है, शर्मा जी ने पूछा इसे समझो ना की रटो, समझने के बाद रटने की जरूरत नहीं पड़ेगी और वैसे भी टेन्स गलत है. इस पर बेटा ने कहा पापा आप कॉपी दो मुझे रटना, रोज मैं रट कर जाता हूँ, अगर नहीं रटूँगा तो डांट पड़ती है. शर्मा जी को आस्चर्य लगा की कान्वेंट स्कूल के बच्चे यूँ ही रट कर अंगेरजी बोलते हैं उन्हें टेन्स का कोई ज्ञान नहीं होता. उन्होंने अपने बेटा से टेन्स के बारे में पूछा, लेकिन बेटा कोई जवाब नहीं दे पाया, अब शर्मा जी को समझ आया की आखिर ये कान्वेंट स्कूल इतना क्यों चलता है, क्योँकि यहाँ बच्चो को बचपन से अंग्रेजी में 10 लाइन रटाया जाता है, जिसे घर पर माता-पिता सुन कर खुश होते हैं की बच्चे इंग्लिश बोल रह हैं लेकिन उनका ग्रामर तो जीरो होता है. इस तरह कान्वेंट स्कूल बच्चो और उनके पेरेंट्स के आँख में धुल झोंके का काम करते हैं……..
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