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नेता जी-funny story in hindi for whatsapp

funny story in hindi for whatsapp

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हम एक से बढ़कर एक funny story प्रकाशित करते हैं। पेश है इसी कड़ी में आज हम “नेता जी”funny story in hindi for whatsapp प्रकाशित कर रहे हैं . आशा है आपको ये story पसंद आएगी
मेरे मोहल्ले में रहना वाला दीपांकर को नेता बनने के बहुत बड़ा शौक था, हलाकि उसके घर में कोई नेता था नहीं, हाँ आज जरूर था की उसका परिवार बहुत बड़ा था और मोहल्ले में उसके परिवार की इज्जात थी, लेकिन दीपांकर को तो नेता बनने का भूत सवार था, इसलिए गली के नुक्कड़ पर चाय के दुकान को सारा दिन बैठा रहता और भाषण देते रहता, चूँकि और भी लड़के जिन्हे कोई काम नहीं था, वो उसका भाषण सुनते और हाँ में हाँ मिलाते रहते, वजह साफ़ था की दीपांकर हमेशा खर्च जो करता था, मतलब उसके पैसे से कितने बेरोजगार रोज खाना और चाय पीते थे, लेकिन आखिर कब तक, दीपांकर के पिता उससे परेशान हो गए थे, आखिर कितना खर्च देते, किसी ने दीपांकर के पिता को समझाया की उसकी शादी कर दे जिम्मेदारी आएगी तो महफ़िल जमाना छोड़ देगा, पिता को बात अच्छा लगा और दीपांकर की शादी करवा दी, कुछ दिन तक दीपांकर नुक्कड़ पर जाना छोड़ दिया, फिर वहीँ रवैया चालु, फिर से नेता की तरह भाषण देना और खर्च करना, फिर से महफ़िल जमने लगी, अब तो उसके पिता और परेशान पहले दीपांकर का खर्चा अब उसकी पत्नी का भी खर्चा, उनकी समझ में नहीं आ रहा था की वह क्या करे? तभी किसी ने बताया की उसे खर्चा देना बंद कर दे. उसके पिता ने यह भी किया, अब तो दीपांकर ना चाहते हुए भी काम करना शुरू कर दिया, लेकिन शाम को वह जरूर भाषण देने और सरकार को कोसने पहुंच जाता. एक बार मोहल्ले के लड़को ने मोहल्ले में 15 अगस्त को झंडा फहराने की सोची. लेकिन खर्चा कहाँ से आएगा. तभी सभी को दीपांकर की याद आयी, सभी ने सोचा क्यों ना दीपांकर से बात करे, शाम को सभी ने दीपांकर से बोला की इस बार मोहल्ला में झंडा फहराया जाएगा, जिसे आप फहराओगे, और आपको भाषण भी देना है, दीपांकर खुश हो गया और ख़ुशी से हाँ बोला दिया. फिर लड़को ने कहा की लेकिन एक समस्या है, दीपांकर ने समस्या पूछा तो लड़को ने बताया की इतने पैसे नहीं है की सारा इंतजाम हो जाए, दीपांकर ने तुरंत पैसे निकाल कर दिए और बोला की तैयारी शुरू की जाए, लड़के तो यही चाहते थे की पैसे मिले, फिर लड़को ने कहा की झंडा भी नहीं है, दीपांकर ने बोला, उसके पास झंडा है वह ले आएगा, सुबह का 7 बजे का समय फिक्स हुआ.

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दीपांकर पूरी रात अपने भाषण की तैयारी करता रहा फिर अपनी बीवी को बोला की सुबह उसे झंडा फहराने जाना है इसलिए वह उसे सुबह जगा दे. बीवी हाँ में सर हिला दी, पूरी रात दीपांकर सपने में झंडा फहराया और भाषण देते रहा, सुबह उसकी नींद नहीं खुली, करीब सात बजे उसकी बीवी ने उसे उठाया और बोला की सात बजने वाला झंडा फहराने नहीं जाना है, तब जा कर दीपांकर की नींद खुली और वह जल्दी जल्दी उठा और जल्दी जल्दी तैयार होने लगा, उसने झंडा निकाला, और तेजी से बाथरूम में चला गया, उसने समय देखा तो पाया की वह लेट हो चूका है, वह और तेजी से तैयार होने लगा, एक तो जल्दबाजी उस पर नींद भी पूरी तरह से खुला ना होने की वजह से वह गलती से झंडा की जगह अपनी बीवी के लाल रंग के पेटीकोट को झंडा समझ कर तेजी से उसमे फूल भर कर बाँध दिया और तय जगह पर उसे बांस में टंगवा दिया. सभी दीपांकर का इन्तजार कर रहे थे सभी सोच रहे थे की जल्दी से भाषण खतम करे की वो लोग खाने पर टूट पड़े, क्योँकि सारा पैसा तो दीपांकर ने दिया था, मंच पर झंडा फ़रहाया गया, लेकिन यह क्या झंडा के बदले पेटीकोट फहरा रहा था, दीपांकर बिना यह देखे भाषण शुरू कर दिया, और उसने बोला की इसी के निचे हमने आजादी की कसम खायी थी, इसके लिए ही हमारे कितने वीरों ने कुर्बानी दी, और आज हम आजाद हैं, ना जाने दीपांकर ने क्या क्या बोल डाले, सभी लगतार हसे जा रहे थे, लेकिन दीपांकर तो अपना भाषण खत्म करना था, तभी किसी ने बोला यह हो क्या रहा है? झंडा कहाँ है, तब जा कर दीपांकर ने सर उठाया तो पाया की उसने गलती से लाल रंग के झंडे के बदले पेटीकोट लहरा दिया है वह चुप चाप वहां से चला गया, और सभी हसने लगे, बांकी बचे सभी लोगो जम कर दावत खायी और वो दिन था और आज का दिन है दीपांकर कभी भाषण नहीं दिया…………..

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