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जब लड़की ने कुतिया बन कर किया हंगामा, डरे मोहल्ले वाले-ghost story in hindi pdf download

जब लड़की ने कुतिया बन कर किया हंगामा, डरे मोहल्ले वाले

कई साल पहले राजेन्द्र नगर कालोनी में एक सरदार फैमली रहें आई थी. इस फैमली में सरदारजी, उनकी पत्नी और एक बेटा और बेटी थे. देखने में तो सब खुश दिख रहे थे. कुछ ही दिनों में कॉलोनी में अपनी अच्छी खासी पहचान बना ली थी. सरदारजी और उनकी पत्नी दोनों ही सर्विस करते थे.

कॉलोनी में उनके दोनों बच्चे शाम को खेलते थे. उनकी भी बच्चों के साथ अच्छी खासी दोस्ती हो गई थी.

एक दिन मैं शाम को गार्डन में घूम रहा था, कि आचानक से मेरी नजर सरदार जी की बेटी पर पड़ी, जो देखने में कुछ आजीब सी दिख रही थी. पहले मैंने ध्यान नहीं दिया, फिर एक दिन जब मेरी नजर उसपर पड़ी तो मुझे हैरानी हुई, उसकी हरकते कुछ आजीब सी थी, वो इंसानों की तरह नहीं बल्कि एक कुतिया की तरह बर्ताव कर रही थी.

कॉलोनी में बिना किसी से इस बार में जिक्र किये मैं सरदारजी के पास चला गया. सरदार जी और उनकी पत्नी ने मेरी बार गौर से सुनी, लेकीन उसे टाल दिया. मेरे कुछ समझ में नहीं अ रहा था, लेकीन एक बात मैंने जरूर गौर की, जब मैं उन्हें उनकी बेटी के बारे में बता रहा था तो वो बड़े ही परेशान नजर आ रहे थे और अपने डर को छिपाने के लिए वो मेरी बातों को टाल दिए.

इसके कुछ दिन बाद तक उनकी बेटी शाम को गार्डन खेलने नहीं आई. फिर रविवार आया, सबकी छुट्टी का दिन. शाम को कॉलोनी के सभी लोग गार्डन में घुमने आये हुए थे, वहीं सरदार जी की फैमली भी गार्डन में घूम रही थीं, तभी मेरी नजर फिर से उनकी बेटी पर पड़ी, आज उसकी तबियत ठीक नहीं थी, इसलिए वो चुपचाप एक कोने में बैठी हुई थी.

मेरे देखते देखते न जाने कब को एक कुतिया की तरह बर्ताव करने लगी, वो लड़की पूरी तरह से कुतिया बन चुकी थी, हाँथ और पैर के बल पर चल रही थी और कुतिया जैसी आवाज निकाल रही थी, ये सब देख कर कॉलोनी के सभी लोग डर गए, सरदार जी तुरंत अपनी बेटी को पकड़ कर घर ले गए, जब कॉलोनी के लोगों ने उनसे इस बार में पूछा तो वो पहले तो रो दिए, लेकिन बाद में उन्होंने पूरी सच्चाई बताई.
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सरदार जी ने बताया कि जब वो एक गाँव में रहते थे तो पास वाले घर में एक बुढ़िया भी रहती थी, उसकी एक कुतिया थी, जिसे बुढ़िया बहुत प्यार करती थी. एक दिन मैं तेज़ सपीद में गाड़ी चला रहा था कि आचानक वो कुतिया मेरी गाड़ी के नीचे आ गई और मर गई. बुढ़िया को बहुत बुरा लगा, क्योंकि वो कुतिया ही उसकी सबकुछ थी.

उसनें मुझे शार्प दिया कि मेरी बेटी अब कुतिया बन जाएगी, जब उसकी हरकतें कुतिया जैसे होने लगीं तो हमने शहर ही बदल दिया, लेकिन वो शाराप नहीं ख़त्म हुआ.

कॉलोनी के लोगों ने उन्हें एक बाबा से पास जाने की सलह दी, कुछ ही हफ़्तों में सरदारजी की बेटी ठीक हो गई और अब वो सभी बच्चों के साथ अच्छे से खेलती थी.  

 

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