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भय असफलता का-heart touching motivational story in hindi language

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हम एक से बढ़कर एक Motivational story प्रकाशित करते हैं। पेश है इसी कड़ी में आज हम “भय असफलता का”heart touching motivational story in hindi language प्रकाशित कर रहे हैं . आशा है आपको ये story पसंद आएगी
भय असफलता का…..
पहली बात यह है की भय ही सबसे बड़ा दुश्मन है सफलता का, इसलिए तो कहा गया है, जो डर गया समझो वह मर गया, या यूँ कह ले की डर के आगे ही जीत है. वाकई जो अपने अंदर के डर से सामना करता है वही विजयी होता है. इसलिए तो जीवन के कितने ही महत्वपूर्ण क्षण इन्सान भय से खो देता है.वह भी बी है किसका, तो अपनी गरीबी का, जो पोजीशन में उसे खोने का, जो धन है उसे खोने का. जो प्यार है उसे खोने का.इंसान हमेशा डरते रहता है, और कभी सफलता नहीं पाता, लेकिन जो इंसान जिंदगी में रिस्क लेता है वही सफल होता है. और जो डरता है, उसे ही भय होता अपने असफल होने का, इसी पर आधारित है, आज की कहानी….
दो दोस्त थे संजीव और पंकज. दोनों एक ही साथ पले बड़े थे, दोनों का घर भी आस-पास था लेकिन दोनों के स्वभाव में बहुत अंतर था. जहाँ संजीव हिम्मत वाला था वहीँ पंकज डरपोक था. जहाँ संजीव हमेशा चुनौतियों को मजूर करता था, वहीँ पंकज चुनौतियों से भागता था, लेकिन दोनों की दोस्ती पक्की थी. दोनों बड़े हुए और काम की तलाश शुरू की, जहाँ पंकज थोड़े से काम कर के थक जाता था वहीँ संजीव पूरा काम करने के बाद ही दम लेता था. एक बार दोनों को एक अवसर मिला काम करने का, हलाकि यह अवसर गाँव के और लोगो को भी मिला था,

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लेकिन शर्त यह थी काम करने से पहले टेस्ट लिया जाएगा और कुछ दिनों तक काम करने का कोई पैसा भी नहीं मिलेगा, काम पूरा होने के बाद ही पैसा मिलने की गुंजाईश थी. गाँव के कुछ लोग टेस्ट का नाम सुन कर ही पीछे हट गए, उनमे पंकज भी था, उसका मानना था की जब टेस्ट निकलेगा ही नहीं तो जा कर क्या फैयदा, कुछ लोग यह सोच कर हट गए, क्योँकि पैसा नहीं मिल रहा था, अगर काम पूरा नहीं हुआ तो पैसा नहीं मिलेगा, इससे क्या फैयदा होगा? लेकिन संजीव टेस्ट देने चला गया, और वह टेस्ट में भी पास हो गए.फिर उसने बिना फल की चिंता किये हुए काम करते रहा, गीता में भगवान् श्री कृष्ण ने सही कहा था की कर्म किये जाना चाहिए फल की चिंता नहीं करना चाहिए.यही सोच कर संजीव लगातार काम करते रहा और वह काम में सफल भी हो गया. उसके बाद तो जिसने काम करने के लिए बुलाया था वह संजीव को मालोमाल कर दिया, आज संजीव बहुत ज्यादा अमीर हो गया जबकि पंकज आज वहीँ का वहीँ रह गया……..
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