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तेरी गली-Her street a new short and sweet love story in hindi language of boy from Varanasi

तेरी गली…..
Her street a new short and sweet love story in hindi language of boy from Varanasi
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वाराणसी का रहने वाला संजीव, इंटर पास करने के बाद मेडिकल की तैयारी के लिए दिल्ली चला गया, जहाँ उसने एक इंस्टिट्यूट में एडमिशन करवा लिया, इंस्टिट्यूट एक पास ही एक एरिया में उसने एक फ्लैट रेंट पर ले लिया और रहने लगा, उसने बहुत मेहनत किया, लेकिन उसका मेडिकल एंट्रेंस नहीं निकला, जिसकी वजह से वह थोड़ा अपसेट हो गया, लेकिन उसने कोशिश करना नहीं छोड़ा, भले ही उसका मेडिकल एंट्रेंस नहीं निकला लेकिन उसे पूरा सिलेबस याद हो गया, उसने आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली के ही कॉलेज में एडमिशन ले लिया, और वही रह कर पढ़ने लगा, अब वह अपने घर वाराणसी भी बहुत कम ही जाता था, एक तरह से वह दिल्ली में ही बसने का मन बना लिया था, उसके घर के पास से ही एक गली जाती थी, जिस गली में एक गुजरती परिवार रहा करता था, उसका पास के ही बाजार में बहुत बड़ा किराना का दुकान था, जहाँ से ही संजीव घर का सारा सामान खरीदता था, कुछ सालो के बाद उसका स्कूल का दोस्त सोहन वाराणसी से दिल्ली उसके यहाँ गया, संजीव बहुत खुश था, क्योँकि काफी सालो से वह अकेला रहता था, अब उसका दोस्त उसके साथ रहने आया था, दोनों ने कुछ करने का सोचा, फिर तय हुआ की संजीव की पढ़ाई पूरी होने के बाद दोनों कुछ व्यवसाय शुरू करेंगे, घर का राशन खरीदने के लिए जब सोहन संजीव के साथ निकला तो संजीव वही दुकान ले गया, इस पर सोहन ने पूछा की घर के पास के ही किराना के दुकान से सामान क्यों नहीं लेते हैं जो इतनी दूर आते हैं, इस पर संजीव ने कहा की इसका सामान अच्छा होता है, सोहन मान गया, एक शाम लाइट चली गयी और गर्मी भी बहुत थी, दोनों घर के छत पर आ गए, जहाँ गली के दूसरी साइड के माकन के छत पर दो लड़कियां खड़ी थी, जिनमे बड़ी लड़की बहुत सुन्दर थी, जिसे देख कर सोहन ने संजीव से उस लड़की के बारे में पूछा, तो संजीव ने बताया की वह किराना का दुकान इसी का है, तब सोहन को पता चला की आखिर संजीव इतनी दूर क्यों जाता है, वह दिल ही दिल में हस रहा था, खैर, लड़कियां संतोष और सोहन को देखे जा रही थी, अब सोहन को समझ नहीं आ रहा था की लड़कियां उन्हें क्यों देख रही है? सोहन भी लड़कियों को देखने लगा, जबकि संजीव उनके तरफ ध्यान नहीं दे रहा था, काफी देर तक देखा देखी के बाद रात होने को आया तो दोनों लड़कियां घर चली गयी और संजीव और सोहन भी घर चला आया, रात को सोहन ने संजीव से पूछा की वो दोनों उन्हें क्यों देख रही थी, संजीव ने कहा तुम नए नए हो शायद इसलिए देख रही होंगी, या वो तुम्हे पसंद करती होंगी, इस पर सोहन ने कहा, मैं तो पहली दफा छत पर गया था तो वो भला मुझे पहचानती नहीं है तो क्यों देखेंगी? इस पर संजीव ने कहा, तुम स्मार्ट हो इसलिए जान पहचान करना चाहती हों, यह सुन कर सोहन को अटपटा लगा, फिर उसने कहा, ऐसा तो नहीं वो तुम्हे देख रही थी, संजीव ने कहा की ऐसा नहीं है, इससे पहले में बहुत बार छत पर गया लेकिन वो मुझे नहीं देखी, तो कल कैसे देख सकती हैं?
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सोहन को समझ नहीं आ रहा था, कल शाम एक बार फिर दोनों छत पर गए और फिर वही हुआ , दोनों लड़कियां देखे जा रही थी, अब समझ में नहीं आ रहा था की ये क्या हो रहा है? सोहन ने संजीव से कहा की लड़कियां फिर हमे देखे जा रही हैं, संजीव ने ध्यान नहीं दिया लेकिन सोहन लड़कियों को देखे जा रहा था, अब सोहन कल हो कर अकेले छत पर आया तो पाया की बड़ी वाली आज अकेले आयी थी और वह सोहन को लगातार देखे जा रही थी, सोहन ने इशारे से बात करने की कोशिश की, लड़की ने भी इशारे से हाथ हिला दिया, अब उसकी समझ में यह आ गया की वह संजीव को नहीं उसे ही देख रही थी, काफी देर तक इशारे और निगाहों में बात हुई, फिर उसकी छोटी बहन आयी तो बड़ी बहन ने इशारे करना बंद कर दिया, सोहन ने भी कोई इशारे नहीं किया, यह सारी बात सोहन ने संजीव को बताई तो संजीव ने कहा की ” मैंने पहले ही कहा था की वह तुम्हे देख रही है मुझे नहीं” सोहन भी मान गया, अब रोज शाम को सोहन छत पर चला जाता और निगाहों से बात किया करता था, जब उसकी छोटी बहन आती, वह शांत हो जाती, सोहन ने उसका नाम नीली आँखों वाली रखा, क्योँकि उसकी आँखें नीली थी और वह दूध की तरह गोरी थी, जबकि उसकी छोटी बहन का नाम दरोगा जी रखा, क्योँकि वह जब भी आती अपनी बहन पर नजर रखना शुरू कर देती, अब तो रोज शाम होने से पहले सोहन छत पर आ जाता जहाँ नीली आंखों वाली उसका इंतजार करती रहती थी, एक सुबह सोहन और संजीव दूध लेने गया तो जहाँ से वो दोनों दूध लाते थे, वहां दूध ना मिलने की वजह से दूसरे दुकान जाने लगे, तो संजीव ने कहा की इसी गली में उस नीली आंखों वाली का घर है, उसने घर भी दिखाया, सोहन ऊपर की तरफ देखा तो पाया की बालकनी में लड़की खड़ी थी, और उसे देख कर मुस्कुरा रही थी, इस तरह दोनों की निगाहें टकराई और दोनों के चेहरे पर ख़ुशी आ गयी, सोहन ने कहा की यह आम गली नहीं पाक गली है क्योँकि इस गली में उस लड़की का बसेरा है, अब तो सोहन को जहाँ भी जाना होता उसी गली से हो कर जाता और शाम को जरूर छत पर आ कर उस नीली आँखों वाली से इशारे से बात करता, लेकिन आखिर कितने दिनों तक वह इशारो में बात करता, अब वह उससे बात करना चाहता था लेकिन जब भी कोशिश करता, उसकी छोटी बहन यानी की दरोगा आ जाती, अब तो सोहन परेशान हो गया करे तो क्या करे? तभी उसके घर से कॉल आया की उसका फाइनल परीक्षा होने वाला है, इसलिए उसे जाना पड़ा, उसने संजीव को कहा की वह घर से परीक्षा दे कर आएगा तो पाक वाली गली की उस नीली आँखिनो वाली से बात करेगा और अपने प्यार का भी इजहार करेगा, वह परीक्षा देने वाराणसी चला गया , जहाँ उसे चार महीने लग गए, क्योँकि परीक्षा का डेट आगे बढ़ गया और परीक्षा खत्म होने के बाद उसे बुखार हो गया, इसलिए वह ठीक होने के बाद वापस दिल्ली आया और पाक गली से गुजरा तो वह लड़की बालकनी में नजर नहीं आयी, फिर शाम को छत पर गया तो भी वह लड़की नजर नहीं आयी, इस पर उसने संजीव से पूछा तो संजीव ने बताया की उसने घर से भाग कर शादी कर ली, यह सुन कर सोहन आस्चर्य से संजीव को देखने लगा, ये क्या हो गया? सोहन ने पूछा किस्से? तो संजीव ने बताया की उसके पीछे वाले मकान के पीछे वाले मकान में कोई रहता था, जो शाम को छत पर जाया करता था, जिससे उसकी नजर मिली और नजर मिलने के बाद ही दोनों ने कुछ दिनों पहले ही भाग कर शादी कर ली, सोहन को आस्चर्य हुआ की वह इतने दिनों से निगाहें मिलायी, उस लड़की क्ले चक्कर में पूरी शाम बर्बाद किया और वह किसी और से शादी कर ली, अब सोहन उस गली से गुजरना भी पसंद नहीं करता था, जो कल तक उसके लिए पाक गली थी आज उसके लिए नापाक गली हो गयी….

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